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182_पाप की कमाई से सच्चा सुख नहीं मिलता (चिंतन)

Pages : 01
Tags : पाप | कमाई | सुख |
Author Name : श्री अशर्फीलाल जी वकील
Data Source : ऋषि चिंतन के सान्निध्य में भाग-१
Publication/Year : युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि-मथुरा/2013
Read Also In : HINDI GUJARATI ENGLISH MARATHI
Content From Same Data Source
1_उठो ! हिम्मत करो (चिंतन)
1_उठो हिम्मत करो (चिंतन)
2_आनंद की खोज (चिंतन)
3_पहले दो, पीछे पाओ (चिंतन)
4_उद्देश्य ऊँचा रखें (चिंतन)
5_तुम ईश्‍वर को पूजते हो या शैतान को (चिंतन)
6_आत्मिक तृप्ति का आधार (चिंतन)
7_गीता का कर्मयोग (चिंतन)
8_कर्म या पाखंड (चिंतन)
9_आत्मशक्ति का विकास (चिंतन)
10_सच्चा धर्मात्मा कौन (चिंतन)
11_प्रभु की माया (चिंतन)
12_कर्त्तव्यपालन (चिंतन)
13_दृष्टिकोण बदलो (चिंतन)
14_हृदय-मंदिर के अंदर संतोष (चिंतन)
15_अंतर्मुखी होने पर ही शांति (चिंतन)
16_असत्य की ओर नहीं, सत्य की ओर (चिंतन)
17_सत्य का प्रकाश (चिंतन)
18_दूसरों पर दया करो (चिंतन)
19_तृष्णाएँ छोड़ो (चिंतन)
20_सत्संग का महत्त्व (चिंतन)
21_सत्यस्वरूप आत्मा (चिंतन)
22_स्थायी सुख कहाँ है (चिंतन)
23_सच्चा और अच्छा व्यापार (चिंतन)
24_ज्ञान का संचय (चिंतन)
25_क्रोध मत करो, क्षमा करो (चिंतन)
26_बादलों की तरह बरसते रहो (चिंतन)
27_प्रार्थना कब सफल होगी (चिंतन)
28_अपनी रोटी बाँटकर खाइए (चिंतन)
29_किसी परिस्थिति में विचलित न हों (चिंतन)
31_प्रेम ही सर्वोपरि है (चिंतन)
32_तुम बीच में खड़े हो (चिंतन)
33_प्रेम ही सुख-शांति का मूल है (चिंतन)
34_धर्म का सार (चिंतन)
35_ईश्वर कहाँ है (चिंतन)
36_जीवन का सद्व्यय (चिंतन)
37_ज्ञानयोग की एक सुलभ साधना (चिंतन)
38_सहृदयता में जीवन की सार्थकता (चिंतन)
39_मृत्यु का भय दूर कर दीजिए (चिंतन)
40_रोने से काम न चलेगा (चिंतन)
41_जिंदगी में आनंद का निर्माण करो (चिंतन)
42_मन जीता तो जग जीता (चिंतन)
43_ज्ञान की उपासना कीजिए (चिंतन)
44_हम स्वयं अपने स्वामी बनें (चिंतन)
45_दुर्भावनाओं को जीतो (चिंतन)
46_प्रेम का वास्तविक स्वरूप (चिंतन)
47_शक्ति संचय कीजिए (चिंतन)
48_शेखी मत बघारो (चिंतन)
49_विचार ही कर्म के बीज हैं (चिंतन)
50_जीवन को तपस्यामय बनाइए (चिंतन)
51_सत्यता में अकूत बल भरा हुआ है (चिंतन)
52_अपने को जीतो (चिंतन)
53_हमारी दुनियाँ वैसी, जैसा हमारा मन (चिंतन)
54_मन से भय की भावनाएँ निकाल फेंकिए (चिंतन)
55_अपनी भूलों को स्वीकार कीजिए (चिंतन)
56_जोश के साथ होश (चिंतन)
57_मानसिक विकास का अटल नियम (चिंतन)
58_जीने योग्य जीवन जियो (चिंतन)
59_जीवन की बागडोर आपके हाथ में (चिंतन)
60_कर्म की स्वतंत्रता (चिंतन)
61_भलाई करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी (चिंतन)
62_दुःख काल्पनिक होते हैं (चिंतन)
63_अच्छाइयाँ देखिए अच्छाइयाँ फैलेंगी (चिंतन)
64_वर्तमान परिस्थितियाँ हमने स्वयं उत्पन्न की हैं (चि
65_आत्मनिर्माण सबसे बड़ा पुण्य-परमार्थ है (चिंतन)
66_पूर्ण शांति की प्राप्ति (चिंतन)
67_जीवन में सच्ची शांति के दर्शन (चिंतन)
68_अपने को आवेशों से बचाइए (चिंतन)
69_बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए (चिंतन)
70_सत्य की अकूत शक्ति पर विश्वास कीजिए (चिंतन)
71_सद्ज्ञान का संचय करो (चिंतन)
72_सच्ची कमाई, सद्गुणों का संग्रह (चिंतन)
73_स्वर्ग और नरक इसी लोक में (चिंतन)
74_अपनी दुनिया अपनी दृष्टि में (चिंतन)
75_अधिकार और कर्त्तव्य (चिंतन)
76_अपनी शक्तियों को विकसित कीजिए (चिंतन)
77_पराजय, विजय की पहली सीढ़ी है (चिंतन)
78_मृत्यु से जीवन का अंत नहीं होता (चिंतन)
79_आध्यात्मिकता की कसौटी (चिंतन)
79_आध्यात्मिकता की कसौटी (चिंतन)
80_गुण-ग्राहक दृष्टि को जाग्रत कीजिए (चिंतन)
81_तुम पापी नहीं पुण्यात्मा हो (चिंतन)
82_जानी तथा ज्ञानी (चिंतन)
83_अपने ऊपर विश्वास कीजिए (चिंतन)
84_बुद्धिमानो मूर्ख क्यों बनते हो (चिंतन)
85_लक्ष्यविहीन जीवन (चिंतन)
86_शारीरिक और बौद्धिक श्रम (चिंतन)
87_साधक को सब कुछ भूल जाना चाहिए (चिंतन)
88_विचारों का केंद्रबिंदु—क्यों और कैसे (चिंतन)
89_दूसरों के दोष ही गिनने से क्या लाभ (चिंतन)
90_परिस्थितियों के अनुकूल बनिए (चिंतन)
91_समाज सेवा से ही आत्मरक्षा (चिंतन)
92_अनीति से धन मत जोड़िए (चिंतन)
93_अपने में अच्छी आदतें डालिए (चिंतन)
94_अपनी दशा सुधारिए (चिंतन)
95_आत्मज्ञान को प्राप्त करो (चिंतन)
96_धर्म की प्रथम घोषणा (चिंतन)
97_सूक्ष्म और अतिसूक्ष्म (चिंतन)
98_भाग्य का निर्माण अपने हाथ में है (चिंतन)
99_ब्रह्म की सर्वव्यापकता (चिंतन)
100_अपनी उत्तम कल्पनाओं को चरितार्थ कीजिए (चिंतन)
101_विश्वास करो कि तुम महान हो (चिंतन)
102_हमारी अतृप्ति और असंतोष का कारण (चिंतन)
103_अपनी योजना पर मजबूती से टिके रहिए (चिंतन)
104_हमारी आर्थिक कठिनाइयाँ कैसे दूर हो (चिंतन)
105_लक्ष्य में तन्मय हो जाइए (चिंतन)
106_सत्कर्मों से दुर्भाग्य भी बदल सकता है (चिंतन)
107_मरने से डरना क्या (चिंतन)
108_आत्मसुधार की एक नवीन योजना (चिंतन)
109_मनुष्य की महानता का रहस्य (चिंतन)
110_अपने लक्ष्य पर केंद्रित हो जाइए (चिंतन)
111_देवत्व का अवलंबन (चिंतन)
112_हम दिव्य जीवन जिएं (चिंतन)
113_विश्वमाता की पवित्र आराधना (चिंतन)
114_संवेदना शक्ति का विकास कीजिए (चिंतन)
115_आप निराश मत होइए (चिंतन)
116_बच्चों के निर्माण का दायित्व (चिंतन)
117_सच्चे मित्र का चुनाव (चिंतन)
118_ईश्वरीय सत्ता का तत्त्वज्ञान (चिंतन)
119_आत्मा ब्रह्मरूप है, इसे पहचानिए (चिंतन)
120_सर्वत्र अपना ही प्राण बिखरा पड़ा है (चिंतन)
121_जैसे आप वैसा आपका संसार (चिंतन)
122_अपना दृष्टिकोण ऊँचा रखें (चिंतन)
123_निष्काम भाव से कर्म करते रहिए (चिंतन)
124_अपने को बुराइयों से बचाइए (चिंतन)
125_सत् और असत् का अंतर (चिंतन)
126_आवेश और उद्वेग से बचिए (चिंतन)
127_मानव जीवन की सफलता का प्रधान केंद्र, प्रेम (चिंतन)
128_अमर्यादित इच्छाएं त्याज्य हैं (चिंतन)
129_चित्त-शुद्धि की आवश्यकता (चिंतन)
130_मनुष्य जीवन का उद्देश्य (चिंतन)
131_विचार और कार्य में समन्वय कैसे हो (चिंतन)
132_जीवन और सिद्धांत (चिंतन)
133_अपने आप के साथ सद्व्यवहार करें (चिंतन)
134_लोक-व्यवहार की कुशलता के गुप्त रहस्य (चिंतन)
135_दूसरों के कामों में हस्तक्षेप (चिंतन)
136_आदर्श जीवन का रहस्य (चिंतन)
137_चित्त का संशोधन और परिमार्जन (चिंतन)
138_उद्विग्न मत होइए (चिंतन)
139_कठिनाई का सामना करने को तैयार रहो (चिंतन)
140_अकेले चलना पड़ेगा (चिंतन)
141_व्यावहारिक अध्यात्मवाद (चिंतन)
142_अंतःशुद्धि की आवश्यकता (चिंतन)
143_किसी का बुरा मत सोचिए (चिंतन)
144_धर्मों की मूलभूत एकता (चिंतन)
145_मानव जीवन का तत्त्वज्ञान (चिंतन)
146_मन में सद्भावनाएँ रखें (चिंतन)
147_ईश्वर-शक्ति का आदि स्रोत (चिंतन)
148_ये भयंकर भूलें कदापि न करें (चिंतन)
149_जीवन-यज्ञ (चिंतन)
150_श्रेष्ठतम कार्य करें (चिंतन)
151_आत्मा का आदेश पालन करें (चिंतन)
152_प्रभु की शरण में (चिंतन)
153_पहले अपने को सुधारो (चिंतन)
154_विचारों की प्रचंड शक्ति (चिंतन)
155_अरे! इस आसुरी संस्कृति को रोको (चिंतन)
156_कर्मयोग का रहस्य (चिंतन)
157_घृणा नहीं प्रेम कीजिए (चिंतन)
158_शांत विचारों की शक्ति (चिंतन)
159_विचारों की शक्तिशाली दुनियाँ (चिंतन)
160_प्रतिस्पर्द्धा की भावना से हानि (चिंतन)
161_जीवन का चरम लक्ष्य, ऐसे प्राप्त करो (चिंतन)
162_मानसिक संतुलन आवश्यक (चिंतन)
163_मनुष्य जीवन ऊँचे उद्देश्यों के लिए (चिंतन)
164_बातें नहीं काम कीजिए (चिंतन)
165_संतोषामृत पिया करें (चिंतन)
166_त्याग और शक्ति, भोग और अशक्तता (चिंतन)
167_भारतीय संस्कृति का प्रसार (चिंतन)
168_महात्मा बुद्ध के व्यावहारिक उपदेश (चिंतन)
169_सद्वृत्तियाँ सद्मार्ग की ओर चलती हैं (चिंतन)
170_ईश्वर से नाता जोड़ो (चिंतन)
171_भगवान का अनंत भंडार (चिंतन)
172_आत्मनिरीक्षण आवश्यक है (चिंतन)
173_अपने चित्त को प्रसन्न रखिए (चिंतन)
174_सच्चा धन कहाँ है (चिंतन)
175_आलस्य न करना ही अमृत पद है (चिंतन)
176_त्याग या स्वार्थ (चिंतन)
178_दुर्बलता एक पाप है (चिंतन)
179_असीम संग्रह और उपभोग की तृष्णा (चिंतन)
180_विलासी मनुष्य धर्मात्मा नहीं हो सकता (चिंतन)
181_आचरण और व्यवहार में सत्य का प्रयोग (चिंतन)
182_पाप की कमाई से सच्चा सुख नहीं मिलता (चिंतन)
183_कमाई में बहुतों का हिस्सा (चिंतन)
184_सच्ची आध्यात्मिकता का मार्ग (चिंतन)
185_मनुष्य स्वयं अपना भाग्य बनाता है (चिंतन)
186_आशावादी व्यक्तियों से मिलें (चिंतन)
187_अपनी क्षमता को पहचानें (चिंतन)
188_समय का औषध रूप (चिंतन)
189_सुझाव देने से पूर्व सोचो (चिंतन)
190_सुख के लिए चित्त-शांति (चिंतन)
191_आध्यात्मिक साधना का मार्ग (चिंतन)
192_सत्य व्यवहार की अपार शक्ति (चिंतन)
193_कर्मवाद और मानवीय प्रगति (चिंतन)
194_मनुष्य देवता बन जाएगा (चिंतन)
195_परम सत्य को जानो (चिंतन)
196_सुख-दुःख का आधार—ज्ञान (चिंतन)
197_आत्मनियंत्रण की शक्ति (चिंतन)
198_नैतिकता का उदय (चिंतन)
199_दानशीलता की भावना (चिंतन)
200_माँ की शरण में दिव्य शक्ति (चिंतन)
201_ज्ञान और कर्म का समन्वय ही मोक्ष-मार्ग (चिंतन)
202_तीर्थ और लोक-कल्याण (चिंतन)
203_मानसिक विकास और आत्मज्ञान (चिंतन)
204_अपने आप को पहचानो (चिंतन)
205_जीवन की सार्थकता (चिंतन)
206_प्रेमी और धनवान बनें (चिंतन)
207_मनुष्य बनकर जिओ (चिंतन)
208_समाज का ऋण चुकाइए (चिंतन)
209_सफलता का रहस्य (चिंतन)
210_हम महानता की ओर क्यों न चलें (चिंतन)
211_इच्छाओं का त्याग कीजिए (चिंतन)
212_जीवन में निर्भीकता आवश्यक है (चिंतन)
213_अनुकरणीय जीवन जिएं (चिंतन)
214_मानव जीवन की महानता एवं उपयोगिता (चिंतन)214_मानव जीवन
215_अपनी इच्छाशक्ति को बढ़ाइए (चिंतन)215_अपनी इच्छाशक्ति
216_स्वार्थ-भाव को मिटाने का व्यावहारिक उपाय (चिंतन)
217_गृहस्थी में रहकर ही मुक्ति प्राप्त कीजिए (चिंतन)
218_संतान के लिए विरासत क्या छोड़ें (चिंतन)
219_मानव देह का सदुपयोग (चिंतन)
220_मनुष्यो! पूर्ण मनुष्य बनो (चिंतन)
221_दृढ़ इच्छाशक्ति के चमत्कार (चिंतन)
222_प्रतिकूल परिस्थिति में विचलित न हों (चिंतन)
223_मनोबल द्वारा रोग का निवारण (चिंतन)
224_आंतरिक शत्रुओं से सावधान (चिंतन)
225_अपने आप को पहचानिए (चिंतन)
226_न मद, न दीनता (चिंतन)
227_वास्तविक प्रार्थना का सच्चा स्वरूप (चिंतन)
228_सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन है (चिंतन)
229_सुख-शांति का सच्चा मार्ग (चिंतन)
230_क्या स्वर्ग और नरक इसी संसार में मौजूद है (चिंतन)
231_जीवन का लक्ष्य एक हो (चिंतन)
232_संसार की सर्वश्रेष्ठ वस्तु प्राप्त करें (चिंतन)
233_अपने गुरु स्वयं बनिए (चिंतन)
234_आत्मनिरीक्षण कर कमजोरियाँ दूर करें (चिंतन)
235_विरासत में बच्चों के लिए धन न छोड़ें (चिंतन)
236_भोजन और भजन का संबंध (चिंतन)
237_अपने दृष्टिकोण को परिमार्जित कीजिए (चिंतन)
238_आत्मनिरीक्षण का स्वभाव बनाइए (चिंतन)
239_विश्वासयुक्त प्रार्थना का प्रभाव (चिंतन)
240_मानव जीवन की सफलता का मार्ग (चिंतन)
241_विश्व-प्रेम ही ईश्वर-प्रेम है (चिंतन)
242_मनःशक्तियों का सदुपयोग (चिंतन)
243_धर्मबुद्धि की अवहेलना से मानसिक क्लेश (चिंतन)
244_जीवन यात्रा का महान पथ (चिंतन)
245_हम पहले अपने को ही क्यों न सुधारें! (चिंतन)
246_पराश्रित होना पाप है (चिंतन)
247_आत्मसुधार से ही सच्ची शांति संभव है (चिंतन)
248_प्रगति के पथ पर बढ़ते ही जाइए (चिंतन)
249_दोषों में भी गुण ढूंढ़ निकालिए (चिंतन)
250_भाग्य बनाना अपने हाथ की बात है (चिंतन)
251_संतोषी सर्वदा सुखी (चिंतन)
252_ईर्ष्या की आग में मत जलिए (चिंतन)
253_हम कितनी ही सेवा क्यों न करें (चिंतन)
254_बाधाओं का स्वागत कीजिए (चिंतन)
255_मन को साधो, सुधारो (चिंतन)
256_कठिन समस्याओं के सरल समाधान (चिंतन)
257_हर काम ईमानदारी और रुचि से करें (चिंतन)
258_जीवन एक समझौता है (चिंतन)
259_भले ही थोड़ा पर उत्कृष्ट (चिंतन)
260_आत्मनिर्माण ही साधना है (चिंतन)
261_अशांत रहने से क्या लाभ (चिंतन)
262_जीवनोद्देश्य का निर्धारण (चिंतन)
263_सधा हुआ मन, वर देने वाला देवता (चिंतन)
264_आत्मनिरीक्षण की प्रवृत्ति (चिंतन)
265_मनोबल की न्यूनता (चिंतन)
266_संकल्प-शक्ति की दुर्बलता (चिंतन)
267_आत्मा पर से मल-आवरण भी तो हटें (चिंतन)
268_सामयिक चेतावनी (चिंतन)
269_प्रतिकूल परिस्थिति में भी हम अधीर न हों (चिंतन)
270_सफलता का गुप्त स्रोत, दृढ़ इच्छाशक्ति (चिंतन)
271_आंतरिक दुर्बलताओं से लड़ें (चिंतन)
272_ज्ञान से ही बंधन टूटते हैं (चिंतन)
273_कुविचारों का प्रतिरोध सद्विचारों से (चिंतन)
274_पाप की अवहेलना मत करो (चिंतन)
275_मनोविकार शारीरिक विकारों से ज्यादा पीड़ादायक (चिं
276_अपनी गुत्थी आप सुलझाएं (चिंतन)
277_उत्तेजना और आवेश की विभीषिका (चिंतन)277
278_भलाई की शक्ति मर नहीं सकती (चिंतन)
279_परमार्थ में ही स्वार्थ सन्निहित (चिंतन)
280_मानवता के आदर्शों पर आस्था (चिंतन)
281_सद्गुणों के विकास से ही समस्याओं का हल (चिंतन)
282_स्वाध्याय और सत्संग (चिंतन)
283_समय के अनुरूप अपनी मनोभूमि ठीक रखें (चिंतन)
284_गुत्थियों का हल अपने भीतर है (चिंतन)
285_समय का सदुपयोग (चिंतन)
286_मानवीय सदाशयता का लाभ आज ही मिलता है (चिंतन)
287_मन ही शत्रु, मन ही मित्र (चिंतन)
288_इस संसार की श्रेष्ठतम विभूति—ज्ञान (चिंतन)
289_स्वच्छ मन से सभ्य समाज (चिंतन)
290_उत्कृष्ट भावनाओं का महत्त्व (चिंतन)
291_श्रेय और प्रेय दोनों मार्ग खुले हैं (चिंतन)
292_आत्मनिर्माण का साधन—स्वाध्याय और सत्संग (चिंतन)
293_उत्कृष्टता से श्रेष्ठता का जन्म (चिंतन)
294_दिव्य विभूति की दिव्य अनुभूति (चिंतन)
295_जीवन का सच्चा सहचर—ईश्वर (चिंतन)
296_कर्म पर भावना का प्रभाव (चिंतन)
297_सद्भाव रखें, शांति प्राप्त करें (चिंतन)
298_अहंकार, एक सत्यानाशी दुर्गुण (चिंतन)
299_मानव-जीवन और ईश्वर-विश्वास (चिंतन)
300_आत्मसंतोष और आत्मसम्मान (चिंतन)
301_हमें मानसिक चिंताएं क्यों घेरती हैं (चिंतन)
302_विचारों की उत्कृष्टता का महत्त्व (चिंतन)
303_हमारा दृष्टिकोण भी तो सुधरे (चिंतन)
304_उत्कृष्ट जीवन की आवश्यकता (चिंतन)
305_आत्मसुधार का सरल पथ, सेवा (चिंतन)
306_आध्यात्मिक विचारधारा से स्वर्गीय जीवन (चिंतन)
307_बाहर नहीं, भीतर भी देखें (चिंतन)
308_तप से ही कल्याण होगा (चिंतन)
309_कठिनाइयों का भी स्वागत करें (चिंतन)
310_देने से ही मिलेगा (चिंतन)
311_श्रद्धाबल से ही महान कार्य संभव (चिंतन)
312_आत्मशोधन अध्यात्म का श्रीगणेश (चिंतन)
313_जिंदगी कैसे जिएँ (चिंतन)
314_अपने स्वभाव पर विजय प्राप्त करें (चिंतन)
315_कठिनाइयाँ आपकी सहायक भी तो हैं (चिंतन)
316_प्रेम और परमेश्वर (चिंतन)
317_सफलता आत्मविश्वासी को मिलती है (चिंतन)
318_अपने लिए नहीं, ईश्वर के लिए जिएँ (चिंतन)
319_हमारा जीवनलक्ष्य—आत्मदर्शन (चिंतन)
320_प्रेम और कृतज्ञता का सौंदर्य (चिंतन)
321_आत्मविश्वास की शक्ति (चिंतन)
322_सच्ची सफलता का एकमात्र साधन (चिंतन)
323_शांति तो अंदर ही खोजनी पड़ती है (चिंतन)
324_अपने स्वामी आप बनिए (चिंतन)
325_हम पुरुष से पुरुषोत्तम बनें (चिंतन)
326_हमारा आत्मविश्वास जाग्रत हो (चिंतन)
327_ईश्वरप्राप्ति कठिन नहीं, सरल है (चिंतन)
328_आत्मनिरीक्षण और उसकी महत्ता (चिंतन)
329_आध्यात्मिकता की मुस्कान (चिंतन)
330_महत्त्वाकांक्षाएँ अनियंत्रित न होने पाएँ (चिंतन)
331_जीवन-संग्राम में पुरुषार्थ की आवश्यकता (चिंतन)
332_मन को अस्वस्थ न रहने दिया जाए (चिंतन)
333_उतना बोलिए जितना आवश्यक हो (चिंतन)
334_मनुष्य जीवन का उद्देश्य भी समझें (चिंतन)
335_अपना भाग्य अपने हाथों बनाइए (चिंतन)335_अपना भाग्य अपन
336_अंतःकरण की आवाज सुनो और उसका अनुकरण करो (चिंतन)
337_जीवन एक वरदान है, इसे वरदान की तरह जिएँ (चिंतन)
338_प्रतिशोध की भावना छोड़िए (चिंतन)
339_मानव-जीवन को सार्थक बनाएँ (चिंतन)
340_आत्मविकास की विचार-साधना (चिंतन)
341_अमर हो तुम, अमरत्व को पहचानो (चिंतन)
342_संस्कृति का गौरव फिर से उज्ज्वल करें (चिंतन)
343_धैर्य की उपयोगिता (चिंतन)
344_विचारों की शक्ति अपरिमित है (चिंतन)
345_खिन्न नहीं, प्रफुल्लित रहा कीजिए (चिंतन)
346_निराश मत होइए अन्यथा सब कुछ खो बैठेंगे (चिंतन)
347_मनुष्य परमात्मा का प्रखर प्रतिनिधि (चिंतन)
348_लक्ष्यसिद्धि के लिए धैर्य आवश्यक है (चिंतन)
349_मन को सुधारिए—वह सुधर जाएगा (चिंतन)
350_ज्ञान-दान की परंपरा चलती रहे (चिंतन)
351_आत्मविश्वास की अटूट शक्ति (चिंतन)
352_दुष्कर्मों का प्रतिफल भोगना पड़ता है (चिंतन)
353_निर्मल और निर्विकार जीवन (चिंतन)
354_स्वर्ग प्राप्ति के लिए ऊँचा सोचें, अच्छा करें (चिंत
355_परमात्मा का दर्शन कैसे मिले (चिंतन)
356_श्रद्धा से बुद्धि का नियमन कीजिए (चिंतन)
357_जीवन कलात्मक ढंग से जिएँ (चिंतन)
358_विचार ही नहीं कार्य भी कीजिए (चिंतन)
359_चरित्र अनमोल रत्न है (चिंतन)
360_दुःख से डरिए मत (चिंतन)
361_शिष्ट एवं सभ्य व्यवहार जरूरी है (चिंतन)
362_जीवन को उलझन से बचाइए (चिंतन)
363_परदोष दर्शन की कुत्सा त्यागिए (चिंतन)
364_सत्य को खोजें और उसे ही प्राप्त करें (चिंतन)
365_सच्ची लोकप्रियता इस तरह मिलती है (चिंतन)
366_समय के सदुपयोग की महत्ता समझिए (चिंतन)

पाप की कमाई घर में आती हुई तो मालूम होती है, पर जाने के लिए भी उसके हजारों पैर लग जाते हैं। उसको उपभोग करने वाले इतने ऐयाश और फिजूलखर्च बन जाते हैं कि उनकी जरूरतें कभी पूरी ही नहीं होतीं। आप कमाते-कमाते थक जाते हैं, पर संतान खर्च करते-करते नहीं थकती।

पाप की कमाई करने वाले आराम से नहीं रहते। किसी-किसी को तो उनमें से भी रोटी नसीब नहीं होती और सारी उमर तंगी में गुजरती है। उन लोगों की बाहरी टीमटाम इतनी बढ़ जाती है कि पास में कुछ भी नहीं बचता। जब कोई शादी-ब्याह का खर्च आ पड़ता है तो ऐसे लोगों को कर्ज लेकर ही काम चलाना पड़ता है। और कर्ज भी थोड़ा नहीं , क्योंकि अपनी झूठी शान को बनाये रखने के लिए उनको हजारों रुपये चाहिएं। इस तरह कर्जदार हो जाने से सारी उम्र परेशानी में ही गुजरती है। इसके विपरीत पाप की कमाई से बचने वाले बहुसंख्यक लोग अच्छी हालत में मिलेंगे। इस प्रकार विचार करने से यही नतीजा निकलता है कि न तो पाप से अधिक कमाई करने वाले सब सुखी हैं, और न नेक कमाई पर संतोष करने वाले सब दुखी ही हैं। सुखी और दुखी दीखने वाले दोनों में एक बराबर हैं। पर आत्मसुख जिसे शाँति कहते हैं पाप की कमाई करने वालों में किसी को नसीब नहीं है यह बात डंके की चोट पर कही जा सकती है।

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