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233_प्रगति तो हो, पर उत्कृष्टता की दिशा में (चिंतन)

Pages : 1
Tags : (चिंतन) |
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Data Source : ऋषि चिंतन के सान्निध्य में भाग - २
Publication/Year : युग निर्माण योजना, गायत्री तपोभूमि-मथुरा/2013
Read Also In : HINDI GUJARATI ENGLISH MARATHI
Content From Same Data Source
आत्मिक प्रगति सद्ज्ञान पर निर्भर
प्रेम का अमरत्व और उसकी व्यापकता
1_आध्यात्मिक लाभ ही सर्वोपरि लाभ है (चिंतन)
2_मानसिक शक्ति नष्ट न होने दीजिए (चिंतन)
3_इच्छाशक्ति के चमत्कार (चिंतन)
4_युग निर्माण आंदोलन और उसका प्रयोजन (चिंतन)
5_युग निर्माण आंदोलन का प्रयोजन (चिंतन)
6_प्रतिकूलताओं की चुनौती स्वीकार कीजिए (चिंतन)
7_प्रगति-पथ के तीन प्रमुख अवरोध (चिंतन)
8_मानव जीवन का अनुपम सौभाग्य (चिंतन)
9_जिन खोजा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ (चिंतन)
10_क्या हमारे लिए यही उचित है? (चिंतन)
11_अडिग निष्ठा के साथ कार्यक्षेत्र में उतरें (चिंतन)
12_संसार का नवीन धर्म—अध्यात्म (चिंतन)
13_ईश्वर-भक्ति और जीवन-विकास (चिंतन)
14_परमात्मा को जानने के लिए अपने आप को जानो (चिंतन)
15_जीवन सुंदरतापूर्वक जिएँ (चिंतन)
16_विचारशक्ति का जीवन पर प्रभाव (चिंतन)
17_विपत्तियों को कैसे जीता जाए? (चिंतन)
18_आज की सबसे बड़ी बुद्धिमत्ता और लोकसेवा (चिंतन)
19_हम मनस्वी और आत्मबलसंपन्न बनें (चिंतन)
20_प्रकाश का दायित्व हमें ही पूरा करना होगा (चिंतन)
21_इस विषम वेला में हमारा महान उत्तरदायित्व (चिंतन)
22_हम तुच्छ नहीं, गौरवास्पद जीवन जिएँ (चिंतन)
23_आचरण में श्रेष्ठता का समावेश (चिंतन)
24_श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती है (चिंतन)
25_सर्वोत्कृष्ट परमार्थ—ज्ञानयज्ञ (चिंतन)
26_स्वार्थ ही न सोचते रहें, परमार्थ का भी ध्यान रखें (चि
27_आत्मा को देखें, खोजें और समझें (चिंतन)
28_सच्ची व चिरस्थायी प्रगति के दो अवलंबन (चिंतन)
29_महान अवलंबन का परित्याग न करें (चिंतन)
30_व्यष्टि का समष्टि में विसर्जन (चिंतन)
30_मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है (चिंतन)
31_ईश्वर हमारा सच्चा जीवन सहचर है (चिंतन)
32_कामनाओं को नियंत्रित और मर्यादित रखें (चिंतन)
33_परमात्मसत्ता से संबद्ध होने का माध्यम (चिंतन)
34_आत्मिक प्रगति सद्ज्ञान पर निर्भर (चिंतन)
35_मनुष्य, अनंत शक्ति का भंडार है (चिंतन)
36_अनंत आनंद का स्रोत—आध्यात्मिक जीवन (चिंतन)
37_प्रसन्न यों रहा जा सकता है (चिंतन)
38_परहित सरिस धर्म नहिं भाई (चिंतन)
39_ज्ञान और श्रम का संयोग आवश्यक (चिंतन)
40_जीवन की महत्ता समझें और उसका सदुपयोग करें (चिंतन)
41_समस्त शक्तियों का भंडार—एकाग्र मन (चिंतन)
42_आत्मत्याग ही सर्वोच्च धर्म (चिंतन)
43_सबसे बड़ी सेवा (चिंतन)
44_दृष्टिकोण के अनुरूप संसार का स्वरूप (चिंतन)
45_हम देवत्व की ओर बढ़ें असुरता की ओर नहीं (चिंतन)
46_पुरुषार्थी ही पुरस्कारों के अधिकारी (चिंतन)
47_मन को दुर्बल न बनने दें (चिंतन)
48_प्रार्थना ही नहीं पवित्रता भी (चिंतन)
49_मन को जीतना—सबसे बड़ी विजय (चिंतन)
50_मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं (चिंतन)
51_सद्विचार अपनाए बिना कल्याण नहीं (चिंतन)
52_विचार ही चरित्र निर्माण करते हैं (चिंतन)
53_हमारी महत्त्वाकांक्षाएँ निकृष्ट न हों (चिंतन)
54_निराशा का अभिशाप—परिताप (चिंतन)
55_कर्म ही ईश्वर-उपासना (चिंतन)
56_हमारे अधिक विरोधी क्यों बनते हैं (चिंतन)
57_निकृष्टता नहीं, उत्कृष्टता ही हमें प्रभावित करे (चि
58_सार्वभौमिक उपासना (चिंतन)
59_आलस त्यागें—सुसंपन्न बनें (चिंतन)
60_ढलती आयु का उपयोग इस तरह करें (चिंतन)
61_आध्यात्मिक जीवन इस तरह जिएँ (चिंतन)
62_मनोविकार हमारे सबसे बड़े शत्रु (चिंतन)
63_प्रार्थना आत्मा का संबल (चिंतन)
64_शरीर का ही नहीं, आत्मा का भी ध्यान रखें (चिंतन)
65_धर्म एक महासागर (चिंतन)
66_मस्तिष्क उद्वेगग्रस्त न होने दें (चिंतन)
67_जीवन का अभिप्राय—दिव्य प्रेम (चिंतन)
68_अपने सौभाग्य को सराहते रहें (चिंतन)
69_जीवन का अर्थ (चिंतन)
70_आत्मविश्वास की महती शक्ति-सामर्थ्य (चिंतन)
71_भक्ति, ज्ञान और विज्ञान की साधना त्रिवेणी (चिंतन)
72_जिसे जीना आता है, वह सच्चा कलाकार है (चिंतन)
73_विद्या ही तो सफलता का मूल आधार है (चिंतन)
74_हमारी इच्छाशक्ति प्रबल एवं प्रखर हो (चिंतन)
75_कर्मों की खेती (चिंतन)
76_अहंकार के सर्प दंश से सदा बचे रहिए (चिंतन)
77_दुःख की निवृत्ति ज्ञान से ही संभव (चिंतन)
78_हम आसुरी वृत्तियों को नहीं दैवी वृत्तियों को अपनाएँ
79_‘बलमुपास्व’—बल की उपासना करो (चिंतन)
80_क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परंतप (च
81_जमाने के साथ बदलिए (चिंतन)
82_जो निरंतर देता है, वह निर्बाध पाता है (चिंतन)
83_भगवान को बार-बार याद करो (चिंतन)
84_हम निकृष्ट स्तर का जीवन न जिएँ (चिंतन)
85_सच्चे सौंदर्य की खोज और साक्षात्कार (चिंतन)
86_मैं और मेरा नहीं, हम और हमारा (चिंतन)
87_जीवन का कुछ उद्देश्य भी तो हो (चिंतन)
88_मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है (चिंतन)
89_उत्तम ज्ञान जाग्रत देवता (चिंतन)
90_परमात्मा को भूलो मत (चिंतन)
91_आत्मपरिष्कार से परब्रह्म की प्राप्ति (चिंतन)
92_महाशून्य की यात्रा (चिंतन)
93_बनाने की सोचिए, बिगाड़ने की नहीं (चिंतन)
94_प्रेम का अमरत्व और उसकी व्यापकता (चिंतन)
95_हमारी प्रार्थना कैसी हो (चिंतन)
96_आत्मिक प्रगति का आधार संवेदना, सहानुभूति (चिंतन)
97_संकीर्णता के सीमा बंधन से छुटकारा पाएँ (चिंतन)
98_अपने दोषों को स्वीकारें और सुधारें (चिंतन)
99_कर्मकांड से ईश्वर को न फुसलाएँ (चिंतन)
100_सत्य, तप और वैराग्य का समन्वय (चिंतन)
101_‘उपासना’ की सफलता ‘साधना’ पर निर्भर है (चिंतन)
102_अपने को पहचानें—आत्मबल संपादित करें (चिंतन)
103_जीवन की मूल प्रेरणा—कर्त्तव्यपालन (चिंतन)
104_समस्त सफलताओं का हेतु—मन (चिंतन)
105_हम अपने को प्यार करें ताकि ईश्वर का प्यार पा सकें (चि
106_ईश्वर की प्राप्ति सरलतम भी, कठिनतम भी (चिंतन)
107_गुरु से काम नहीं चलेगा सद्गुरु की शरण में जाएँ (चिंत
108_न किसी को कैद करें और न कैदी बनें (चिंतन)
109_उसे अवश्य पा लोगे (चिंतन)
110_आत्मविश्वासी पर, दूसरे भी विश्वास करते हैं (चिंतन)
111_अंतःकरण में ईश्वर का दर्शन (चिंतन)
112_हम ईश्वर के होकर रहें—उसी के लिए जिएँ (चिंतन)
113_ईश्वर के अनुग्रह का सदुपयोग किया जाए (चिंतन)
114_आत्मदेव की उपासना (चिंतन)
115_जीवन का अर्थ (चिंतन)
116_दुर्बुद्धि और दुष्प्रवृत्तियों से छूटना ही मुक्ति
117_जिंदगी जीनी हो तो इस तरह जिएँ (चिंतन)
118_हम सज्जनता अपनाएँ—सहृदय बनें (चिंतन)
119_कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग की साधना (चिंतन)
120_पात्रता प्रमाणित करें, विभूतियों का वरदान पाएँ (चिं
121_विवेकयुक्त दूरदर्शी बुद्धिमत्ता ही श्रेयस्कर है (
122_न तो हिम्मत हारें और न हार स्वीकार करें (चिंतन)
123_बाहरी संपदा आंतरिक समृद्धि की छाया मात्र है (चिंतन)
124_चतुराई नहीं सज्जनता और सरलता अपनाएं (चिंतन)
125_परिष्कृत दृष्टिकोण का नाम ही स्वर्ग है (चिंतन)
126_सत्य का आश्रय ईश्वर का आश्रय है (चिंतन)
127_विधेयात्मक चिंतन से मानसिक संतुलन ठीक रखें (चिंतन)
128_जीवन का मूल्य समझें और उसे सार्थक बनाएँ (चिंतन)
129_व्रतशील जीवन की गरिमा (चिंतन)
130_जो ईश्वर से डरेगा उसे और किसी से नहीं डरना है (चिंतन)
131_गलोगे, तो ही उगोगे (चिंतन)
132_ईश्वर अपने बताए नियमों-मर्यादाओं में बँधा है (चिंतन
133_यथार्थवादी बनें, संकल्पबल प्रखर करें (चिंतन)
134_निरंकुश बुद्धिवाद हमारा सर्वनाश करके ही छोड़ेगा (च
135_ध्यानयोग—चरम आत्मोत्कर्ष की साधना (चिंतन)
136_उपलब्धियों का सदुपयोग करना सीखें (चिंतन)
137_सौभाग्य भरे क्षणों को तिरस्कृत न करें (चिंतन)
138_भीतर का खोखलापन और सड़ी जड़ें (चिंतन)
139_यथार्थता को समझें—आग्रह न थोपें (चिंतन)
140_विभूतिरहित संपदा निरर्थक है (चिंतन)
141_वैभव खोकर भी सत्यनिष्ठ बने रहें (चिंतन)
142_आत्मविश्वास ईश्वर का अजस्र वरदान (चिंतन)
143_अंतर का परिष्कार, सफल जीवन का आधार (चिंतन)
144_देने वाला घाटे में नहीं रहता (चिंतन)
145_हम सब परस्पर एकता के सूत्र में जुड़े हैं (चिंतन)
146_दुर्बलताओं को खोजें और उखाड़ फेंकें (चिंतन)
147_ईश्वर की समीपता और दूरी की परख (चिंतन)
148_अंधकार का निराकरण आदर्शवादी व्यक्तित्व ही करेंगे (
149_भगवान का पुत्र—क्रूसारोही मानव (चिंतन)
150_सद्ज्ञान की उपलब्धि मनुष्य का श्रेष्ठतम सौभाग्य (च
151_अनंत संभावनाओं से युक्त मानवी सत्ता (चिंतन)
152_क्रिया का स्वरूप नहीं उद्देश्य देखा जाए (चिंतन)
153_भ्रमजाल से छूटें—मायामुक्त हों (चिंतन)
154_सफलता प्राप्त करने के लिए अभीष्ट योग्यता संपादित क
155_निरीक्षण और नियंत्रण आदतों का भी करें (चिंतन)
156_दुःख और सुख मिल-बाँटकर हलके करें (चिंतन)
157_हम निष्ठावान बनें, स्वर्ग का सृजन करें (चिंतन)
158_अपने पर भरोसा करें कि आप समर्थ हैं (चिंतन)
159_असफलता हमें हताश न कर पाए (चिंतन)
160_दृष्टिकोण बदलें, सब कुछ बदलेगा (चिंतन)
161_सफल जीवन की सरल रीति-नीति (चिंतन)
162_सत्य को ही अपनाएँ—असत्य को नहीं (चिंतन)
163_प्रबल पुरुषार्थ से प्रतिकूलता भी अनुकूलता बनती है (
164_ईश्वर का अस्तित्व असिद्ध नहीं है (चिंतन)
165_हम सुसंस्कृत बनें, संस्कारवान बनें (चिंतन)
166_दूसरों के गुण और अपने दोष देखें (चिंतन)
167_व्यक्तिवाद नहीं, समाजवाद हमारा लक्ष्य हो (चिंतन)
168_दृढ़ इच्छाशक्ति एक चमत्कारी उपलब्धि (चिंतन)
169_आत्मतत्त्व की अखंडता (चिंतन)
170_जीवन-संपदा का सदुपयोग सीखा जाए (चिंतन)
171_संघर्ष ही जीवन है (चिंतन)
172_अपने को अधिकाधिक सुविस्तृत बनाते चलें (चिंतन)
173_व्यक्ति का समाज के प्रति दायित्व (चिंतन)
174_कर्म का प्रतिफल अकाट्य है (चिंतन)
175_ईश्वर का द्वार सबके लिए खुला है (चिंतन)
176_श्रम देवता की साधना (चिंतन)
177_उदार जीवन यात्रा (चिंतन)
178_विचारों की प्रचंड शक्ति और प्रतिक्रिया (चिंतन)
179_अपने को पहचानें और विकसित करें (चिंतन)
180_दुःख और सुख सहोदर-सहचर (चिंतन)
181_आत्मीयता का विस्तार (चिंतन)
182_आत्मजागरण के लिए ध्यानयोग की आवश्यकता (चिंतन)
183_ध्यानयोग से एकाग्रता की दिव्यशक्ति का उद्भव (चिंतन)
184_साधना से सिद्धि की प्राप्ति (चिंतन)
185_सौंदर्य और शक्ति का स्रोत अंतस् में (चिंतन)
186_आत्मनिर्भर बनें—अपने आप उठें (चिंतन)
187_संपत्ति ही नहीं, सदाशयता भी (चिंतन)
188_धर्म के बिना हमारा काम नहीं चलेगा (चिंतन)
189_विश्व उपवन में हमारा जीवन पुष्प सा महँके (चिंतन)
190_अपनी भूलों को समझें और उन्हें सुधारें (चिंतन)
191_यथार्थता और एकता में पूर्वाग्रह ही प्रधान बाधा (चिं
192_कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं (चिंतन)
193_हम चिंतन की दृष्टि से भी प्रौढ़ बनें (चिंतन)
194_क्षुद्रता अपनाने से मात्र हानि ही हानि है (चिंतन)
195_अंतर की गहराई में उतरें (चिंतन)
196_अभीष्ट की उपलब्धि भीतर से ही होगी (चिंतन)
197_प्राणशक्ति एक जीवंत ऊर्जा (चिंतन)
198_सर्वतोमुखी प्रगति के दो आधार—अध्यात्म और विज्ञान (
199_वर्चस की साधना आत्मबल उभारने के लिए (चिंतन)
199_वर्चस की साधना आत्मबल उभारने के लिए (चिंतन)
200_साधना पथ और अनंत ऐश्वर्य (चिंतन)
201_जीवन और उसकी परिभाषा (चिंतन)
202_विचारों में क्रम-व्यवस्था एवं एकाग्रता बनाए रहें (च
203_दिशा निर्धारण मनुष्य का अपना निर्णय (चिंतन)
204_तनाव और उससे छुटकारा (चिंतन)
205_उपार्जन का सदुपयोग भी (चिंतन)
206_आनंद अपनी ही मुट्ठी में भरा पड़ा है (चिंतन)
207_जीवन, ईश्वर का स्वरूप एवं वरदान (चिंतन)
208_सादगी अपनाएँ शालीनता बरतें! (चिंतन)
209_वरदानी शक्ति का देवता सुदृढ़ संकल्प (चिंतन)
210_देवता कौन हैं (चिंतन)
211_मनोनिग्रह के लिए उपासना की आवश्यकता (चिंतन)
212_संकल्प और आत्मबल एक ही तथ्य के दो पक्ष हैं (चिंतन)
213_मित्रता और उसका निर्वाह (चिंतन)
214_पवित्रता, महानता और संयमशीलता (चिंतन)
215_आस्था ही आस्तिकता (चिंतन)
216_साधना और सिद्धि का सिद्धांत (चिंतन)
217_पैरों को तोड़ें नहीं प्रगति की सहज यात्रा पर बढ़ने द
218_मुस्कान सुसंस्कृत व्यक्तित्व की निशानी (चिंतन)
219_आत्मदेव की साधना और सिद्धि (चिंतन)
220_जीवन के स्वरूप और उद्देश्य को समझो (चिंतन)
221_अपना मूल्यांकन वास्तविकता से अधिक न करें (चिंतन)
222_दृश्य नहीं, दर्शक बनें (चिंतन)
223_परमात्मा का अस्तित्व और अनुग्रह (चिंतन)
224_संपदाएँ नहीं विभूतियाँ (चिंतन)
225_स्रोत अंदर है, बाहर नहीं (चिंतन)
226_जीवनलक्ष्य की प्राप्ति में तीन प्रमुख व्यवधान (चिं
227_प्रार्थना अर्थात विनम्र पुरुषार्थ (चिंतन)
228_दूरदर्शिता का दोहरा लाभ (चिंतन)
229_कर्म ही सर्वोपरि (चिंतन)
230_आज मिल पाया नहीं, तो कल मिलेगा (चिंतन)
232_परिवर्तन में प्रगति और जीवन (चिंतन)
233_प्रगति तो हो, पर उत्कृष्टता की दिशा में (चिंतन)
234_अक्लमंदी नहीं, बुद्धिमत्ता अपनाएँ (चिंतन)
235_सत् को समझें, सत् को पकड़ें (चिंतन)
236_तीन असाधारण सौभाग्य (चिंतन)
237_सफलता का मूलभूत आधार—उत्कट आकांक्षा (चिंतन)
238_परिष्कृत जीवन प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष (चिंतन)
239_साधना से सिद्धि और मार्ग के अवरोध (चिंतन)
240_कठिनाइयों का स्वागत कीजिए (चिंतन)
241_लक्ष्य की दिशा में अनवरत यात्रा (चिंतन)
242_उत्तरदायित्वों को निभाएँ, महान बनें (चिंतन)
243_अशुभ चिंतन छोड़िए—भयमुक्त होइए (चिंतन)
244_बुद्धि की प्रखरता ही नहीं, भावनाओं की उदात्तता भी (च
245_करुणा में भगवान (चिंतन)
246_आदर्शवादी महत्त्वाकांक्षाओं के फलितार्थ (चिंतन)
247_संस्कृति और सभ्यता (चिंतन)
248_उत्थान-पतन का आधार, आकांक्षाओं का परिष्कार (चिंतन)
249_नर-पशु का नारायण में प्रत्यावर्तन, आत्मिकी का अवलंब
250_उपलब्ध संपदा का सदुपयोग हो (चिंतन)
251_अध्यात्म का लक्ष्य मात्र आत्मकल्याण (चिंतन)
252_उठो, जागो और विकास करो (चिंतन)
253_ज्ञान की महत्ता कर्म के साथ ही (चिंतन)
254_अनेकता से एकता की ओर महायात्रा (चिंतन)
255_जानना तो अपने को भी चाहिए (चिंतन)
256_सृजन चेतना की समर्थता और गरिमा (चिंतन)
257_वैभव ही नहीं, विवेक भी (चिंतन)
258_विचार—एक अद्भुत प्रचंड शक्ति-स्रोत (चिंतन)
259_शाश्वत जीवन को सुसंपन्न बनाना श्रेयस्कर है (चिंतन)
260_हम अ260_हम अपनी ही प्रतिध्वनि सुनते और प्रतिच्छाया दे
261_व्यवहार में औचित्य का समावेश (चिंतन)
262_कठिनाइयाँ आवश्यक भी हैं, लाभदायक भी (चिंतन)
263_निंदा से विचलित न हों, उसे महत्त्व न दें (चिंतन)
264_परिवर्तन प्रगति की पहली सीढ़ी (चिंतन)
265_अध्यात्म क्षेत्र की सफलता का सुनिश्चित मार्ग (चिंत
266_समष्टि की साधना का तत्त्वदर्शन (चिंतन)
267_परिशोधन प्रगति का प्रथम चरण (चिंतन)
268_जीवन बहुमूल्य है, इसे व्यर्थ न गँवाएँ (चिंतन)
269_दृश्य से परे विचारों की विलक्षण दुनिया (चिंतन)
270_विस्मृति की मूर्च्छना (चिंतन)
271_मन को सुधारा-सधाया जा सकता है (चिंतन)
272_बुद्धिमत्ता सर्वोपरि संपदा (चिंतन)
273_परमात्मा की आनंदमयी सत्ता (चिंतन)
274_संपदा को रोकें नहीं (चिंतन)
275_भक्त के लिए ईश्वर का उपहार (चिंतन)
276_याचना नहीं, प्रार्थना (चिंतन)
277_खाली हूजिए, आप लबालब भर जाएँगे (चिंतन)
278_आत्मा और परमात्मा की एकता (चिंतन)
279_दूरदर्शिता—एक बहुत बड़ा सौभाग्य (चिंतन)
280_विधाता के बहुमूल्य उपहार (चिंतन)
281_मानवी क्षमता का कोई पारावार नहीं (चिंतन)
282_आत्मा की आवाज (चिंतन)
283_वैभव की कमी नहीं, पर आवश्यकता जितना ही समेंटें (चिंत
284_प्रतिभा—जागरूकता और तत्परता की परिणति (चिंतन)
285_आँगन में विद्यमान कल्पवृक्ष (चिंतन)
286_विचारणा की पारसमणि (चिंतन)
287_मन को कुसंस्कारी न रहने दिया जाए (चिंतन)
288_तत्त्वज्ञान और सेवा साधन (चिंतन)
289_जो दीपक की तरह जलने को तैयार हों (चिंतन)
290_जीवन कलाकार हाथों से सँजोया जाय (चिंतन)
291_बड़प्पन की सही कसौटी (चिंतन)
292_समग्र श्रेष्ठता विकसित करें (चिंतन)
294_सर्वश्रेष्ठ कलाकारिता (चिंतन)
295_‘‘मन्युरसि मन्युमयि देहि’’ (चिंतन)
296_आत्मविजेता ही विश्वविजेता (चिंतन)
297_अंधकार को दीपक की चुनौती (चिंतन)
298_गहरे उतरें, विभूतियाँ हस्तगत करें (चिंतन)
299_सुरदुर्लभ मनुष्य जन्म की सार्थकता (चिंतन)
300_मानव जीवन की विशिष्टता एवं सार्थकता (चिंतन)
301_समर्थता का सदुपयोग (चिंतन)
302_आत्मैवेदं सर्वम् (चिंतन)
303_ईश्वर का दर्शन—पवित्र अंतःकरण में (चिंतन)
304_वर्तमान का सदुपयोग—उज्ज्वल भविष्य का निर्माण (चिं
305_संपत्ति बनाम सदाशयता (चिंतन)
306_सच्चा मानवोचित पुरुषार्थ (चिंतन)
307_समर्थ का आश्रय लें (चिंतन)
308_अनंतपारा दुष्पूरा तृष्णा दोष—शता-वहा (चिंतन)
309_विचारणा का उच्चस्तरीय प्रवाह (चिंतन)
310_उत्कर्ष का राजमार्ग (चिंतन)310_उत्कर्ष का राजमार्ग (च
311_विचारों की असाधारण सामर्थ्य और परिणति (चिंतन)
312_प्रतिकूलताएँ कभी बाधक नहीं बनतीं! (चिंतन)
313_का वा विमुक्तिर्विषये विरक्तिः (चिंतन)
314_मनुष्य अपना भविष्य अपने हाथ (चिंतन)
315_दृष्टिकोण का सम्यक परिष्कार (चिंतन)
316_समर्थ और प्रसन्न जीवन की कुंजी (चिंतन)
317_सद्बुद्धि की अवधारणा (चिंतन)
318_निष्ठा आत्मशक्ति की निर्झरिणी (चिंतन)
319_स्वच्छता एवं सुसंस्कारिता (चिंतन)
320_प्रतिकूलताओं में हड़बड़ाएँ नहीं (चिंतन)
321_ज्ञान सबसे बड़ा देवता (चिंतन)
321_ज्ञान सबसे बड़ा देवता (चिंतन)
322_मनुष्य एक भटका हुआ देवता (चिंतन)
323_चिरस्थायी संपदा—चरित्रनिष्ठा (चिंतन)
324_सिद्धि का केंद्र अपना ही अंतराल (चिंतन)
325_मेरा यहाँ कुछ नहीं, सब कुछ तेरा है! (चिंतन)
326_भाग्य का निर्णय मनुष्य स्वयं करता है (चिंतन)
327_जीवन साधना के कुछ सुनिश्चित सूत्र (चिंतन)
328_जड़ें गहरी और मजबूत हों (चिंतन)
329_पगडंडियों में न भटकें (चिंतन)
330_कामनाओं की नहीं संकल्पों की पूर्ति (चिंतन)
331_है स्वर्ग यहीं, अपवर्ग यहीं! (चिंतन)
332_ईश्वर उपासना से जुड़ी श्रेष्ठ भावनाएँ (चिंतन)
333_उद्दंडता का उपचार विपत्ति के रूप में (चिंतन)
334_समर्पण का आनंद और उसकी अनुभूति (चिंतन)
335_शक्ति का संचय भी अनिवार्य (चिंतन)
336_कर्मों की फलती-फूलती खेती (चिंतन)
337_प्रतिभा के बीजांकुर हर किसी में विद्यमान (चिंतन)
338_प्रतिभा-संवर्द्धन की दो महानतम उपलब्धियाँ (चिंतन)
339_ईश्वर का दर्शन और संभाषण (चिंतन)
340_चिंतन की दृष्टि से हम प्रौढ़ बनें! (चिंतन)
341_प्रार्थना जीवन का अविच्छिन्न अंग बने (चिंतन)
342_प्रतिकूलताएँ निखारती हैं, व्यक्तित्व को (चिंतन)
343_प्रतिभाएँ यह तथ्य समझें—समझाएँ (चिंतन)
344_प्रसन्नता—एक सुलझी हुई मनःस्थिति (चिंतन)
345_चिंतन की अनगढ़ता ही दरिद्रता है! (चिंतन)
346_क्षुद्रता अपनाने से हानि ही हानि (चिंतन)
347_आत्मविश्वास—एक जीवन मूरि (चिंतन)
348_अपनी परिधि का विस्तार करें! (चिंतन)
349_जीवन देवता को कैसे साधें (चिंतन)
349_जीवन देवता को कैसे साधें? (चिंतन)
350_इस दिव्य अनुदान को व्यर्थ न जाने दें (चिंतन)
351_मात्र वर्तमान का ही विचार करें! (चिंतन)
352_हम में से कोई सचमुच ही बुद्धिमान है क्या (चिंतन)
353_आत्मविस्तार ही सर्वोच्च धर्म (चिंतन)
354_विचारधारा का प्रगतिशील परिष्कार (चिंतन)
355_क्या सुंदर, क्या असुंदर (चिंतन)
356_संग्रह से कलह और विग्रह ही हाथ लगेगा (चिंतन)
357_मनस्वी—तेजस्वी (चिंतन)
358_बुद्धि नहीं, भावना प्रधान (चिंतन)
359_स्वर्ग और नरक अपने ही हाथ में (चिंतन)
360_अंतःकरण की पुकार अनसुनी न करें (चिंतन)
361_सद्ज्ञान वह जो सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे (चिंत
362_उपलब्धियों का सदुपयोग ही सफलताओं का मूल (चिंतन)
363_अतिवाद न बरता जाए (चिंतन)
364_परिष्कृत दृष्टिकोण ही स्वर्ग है (चिंतन)
365_अहिंसा के नूतन आयाम (चिंतन)
366_धर्म का वास्तविक तात्पर्य (चिंतन)
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