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77_विषम परिस्थिति में नवयुग की तैयारी (प्रवचन)

Pages : 5
Tags : परिस्थिति | नवयुग | paristhiti | navayug |
Author Name : पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
Data Source : पूज्यवर की अमृतवाणी भाग - १ 
Publication/Year : अखंड ज्योति संस्थान,मथुरा/2013
Read Also In : HINDI GUJARATI ENGLISH MARATHI
Content From Same Data Source
कल्प-साधना और उसकी तात्विक विवेचना (प्रवचन)
प्रायश्चित क्यों ? कैसे ? (प्रवचन)
जीवन-साधना आवश्यक हीं नहीं, अनिवार्य भी (प्रवचन)
शक्तिपात एवं कुण्डलिनी जागरण का तत्वदर्शन (प्रवचन)
दॄष्टिकोण-परिवर्तन ही वास्तविक कायाकल्प (प्रवचन)
साधना से सिद्धि (प्रवचन)
आध्यात्मिक जीवन में पात्रता की अनिवार्यता (प्रवचन)
शक्ति-भण्डार के साथ जुड़े (प्रवचन)
यह चिनगारी-दावानल बनेगी (प्रवचन)
2_देवत्व विकसित करें, कालेनेमी ना बने (प्रवचन))
3_अपने ब्राह्मण एवं संत को जिंदा कीजिए (प्रवचन)
4_भाव संवेदना का विकास करना ही साधुता है (प्रवचन)
5_आत्मोन्नति के चार आधार (प्रवचन)
6_सूक्ष्मीकरण के बाद का ऐतिहासिक वसंत (प्रवचन)
7_युग निर्माण योजना और उसके भावी कार्यक्रम (प्रवचन)
8_युग मनीषा जागे, तो क्रांति हो (प्रवचन)
9_युगशोधन हेतु मनीषा को आमंत्रण (प्रवचन)
10_गुरुतत्व की गरिमा और महिमा (प्रवचन)
11_सुसंस्कारी बनाए, कैसी हो वह शिक्षा? (प्रवचन)
12_संजीवनी विद्या बनाम जीवन जीने की कला (प्रवचन)
13_देवात्मा हिमालय एवं ऋषि-परंपरा (प्रवचन)
14_हिमालय का अज्ञातवास एवं हमारी तपश्चर्या (प्रवचन)
15_नया इंसान बनाएंगे, नया जमाना लाएंगे (प्रवचन)
16_वासंती हूंक, उमंग और उल्लास आदि आ जाए जीवन में(प्रवचन
17_भारतीय संस्कृति का मूल गायत्री महामंत्र (प्रवचन)
18_गायत्री महामंत्र की सामर्थ्य (प्रवचन)
19_गायत्री महामंत्र की महत्ता (प्रवचन)
20_गायत्री महाशक्ति की महान फलश्रुतियां (प्रवचन)
21_त्रिपदा गायत्री के तीन चरण (प्रवचन)
22_देव संस्कृति का बीज मंत्र गायत्री महामंत्र (प्रवचन)
23_गायत्री उपासना का स्वरूप (प्रवचन)
24_गायत्री उपासना की सफलता के आधारभूत तथ्य (प्रवचन)
25_ब्रह्मवर्चस कैसे जगाती है गायत्री ?(प्रवचन)
26_ब्रह्मतेजस के अभिवर्धन हेतू गायत्री उपासना(प्रवचन)
27_ऋतंभरा प्रज्ञा का अवतरण (प्रवचन)
28_गायत्री की युगांतरीय चेतना (प्रवचन)
29_युग शक्ति का अवतरण (प्रवचन)
30_गायत्री उपासना सफल एवं सार्थक कैसे बने? (प्रवचन)
31_हमारी स्वयं की गायत्री उपासना कैसे फली? (प्रवचन)
32_हमारी यज्ञीय परंपरा (प्रवचन)
33_यज्ञों से सुक्ष्म वातावरण का संशोधन एवं जनमानस का प
34_महायज्ञ का स्वरूप व उद्देश्य(प्रवचन)
35_भारतीय संस्कृति के प्रतीक - शिखा और सूत्र (प्रवचन)
36_नवरात्र - साधना का तत्व दर्शन (प्रवचन)
37_हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन (प्रवचन)
38_आत्मबल संपादन ही सर्वोपरि लक्ष्य हो (प्रवचन)
39_ओजस्वी, तेजस्वी एवं मनस्वी व्यक्तियों का निर्माण (प
40_आध्यात्मिक कायाकल्प के मूलभूत सिद्धांत (प्रवचन)
41_कैसे हो आध्यात्मिक कायाकल्प (प्रवचन)
42_अनुग्रह के लिए अंतराल का सुविकसित होना आवश्यक(प्रवच
43_कायाकल्प का मर्म और दर्शन (प्रवचन)
44_कल्प-साधना और उनकी तात्विक विवेचना (प्रवचन)
45_प्रायश्चित क्यों? कैसे? (प्रवचन)
46_तीर्थयात्रा बनाम प्रायश्चित प्रक्रिया (प्रवचन)
47_तीर्थसेवन का महत्व और प्रयोजन (प्रवचन)
48_साधना में श्रद्धा की महत्ता और वातावरण की उपयोगिता (
49_पारस को छूकर सोना बनने का तरीका (प्रवचन)
50_जीवन-साधना अवश्य कि नहीं, अनिवार्य भी (प्रवचन)
51_शक्तिपात एवं कुंडलिनी जागरण का तत्वदर्शन (प्रवचन)
52_आत्मावलोकन का सरल उपाय-एकांतवास (प्रवचन)
53_तपस्वी जीवन और उसके मूलभूत सिद्धांत (प्रवचन)
54_तपकर कुंदन बनने की प्रक्रिया (प्रवचन)
55_दृष्टिकोण-परिवर्तन ही वास्तविक कायाकल्प (प्रवचन)
56_अध्यात्मिक सिद्धांत को आत्मसात करना ही जीवन का लक्ष
57_आंतरिक अमीरी ही वास्तविक संपन्नता है (प्रवचन)
58_उपासना,साधना,आराधना त्रिवेणी संगम(प्रवचन)
59_उपासना फलदाई कैसे बने? (प्रवचन)
60_उपासना की सफलता साधना पर निर्भर (प्रवचन)
61_विद्या को समझें,विधि में ना उलझे (प्रवचन)
62_जप का ज्ञान और विज्ञान (प्रवचन)
63_साधना से सिद्धि (प्रवचन)
64_अनुदान की तीन शर्तें-तीन कसौटियां (प्रवचन)
65_अध्यत्मिक जीवन में पात्रता की अनिवार्यता (प्रवचन)
66_जाग्रत आत्माओं को हमारे अजस्त्र अनुदान (प्रवचन)
67_शक्ति-भंडार के साथ जुड़े (प्रवचन)
68_भगवान के साथ साझेदारी घाटे का सौदा नहीं (प्रवचन)
69_श्रद्धा,सिद्धांतों के प्रति हो (प्रवचन)
70_प्रज्ञायोग की साधना (प्रवचन)
71_पंचकोशो का अनावरण (प्रवचन)
72_ध्यानयोग का व्यवहारिक क्रियापक्ष (प्रवचन)
73_भगवान शिव और उनका तत्वदर्शन (प्रवचन)
74_बहुदेववाद को समझो,भ्रम-जंजाल में ना उलझे (प्रवचन)
75_आपत्तिकाल में मोहग्रस्त बने न रहे(प्रवचन)
76_युग-परिवर्तन की पूर्व वेला एवं संधि काल (प्रवचन)
77_विषम परिस्थिति में नवयुग की तैयारी (प्रवचन)
78_आपत्तिकाल का अध्यात्म (प्रवचन)
79_अंतर की हुक को ही अवतार कहते हैं (प्रवचन)
80_आज के प्रज्ञावतार की,युगदेवता की अपील (प्रवचन)
81_युगसंधि की वेला व हमारे दायित्व (प्रवचन)
82_युग-परिवर्तनकारी महाक्रांति में सहभागी बने (प्रवचन)
83_महाकाल की पुकार सुनें और जीवन को धन्य बनाए (प्रवचन)
84_कैसे होगा समन्वय, विज्ञान और अध्यात्म का? (प्रवचन)
85_यह चिंगारी-दावानल बनेगी (प्रवचन)
86_धर्मतंत्र की गरिमा एवं महत्ता (प्रवचन)
87_परमार्थपरायण बने-दैवी अनुग्रह पाएं (प्रवचन)
88_वातावरण-परिशोधन हेतु युगशिल्पियों का दायित्व(प्रव
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