DATA Listing

40_उदान प्राण के संयम से होती है ऊर्ध्व गति (लेख)

Pages : 4
Tags : ऊर्ध्व | गति |
Author Name : डॉं.प्रणव पण्डया
Data Source : अन्तर्जगत की यात्रा का ज्ञान-विज्ञान भाग-३
Publication/Year : श्री वेदमाता गायत्री ट्रस्ट/2016
Read Also In : HINDI GUJARATI ENGLISH MARATHI
Content From Same Data Source
1_ध्येय में मन की एकाग्रता है- धारणा (लेख)
2_स्वयं का स्वयं के प्रति होश है- ध्यान (लेख)
3_चित्त का ध्येय में विलय है- समाधि (लेख)
4_धारणा, ध्यान, समाधि का एकत्व है संयम (लेख)
5_संयम सिद्धि से होती है बुद्धि प्रकाशित (लेख)
7_अनूठी है संयम की विभूति (लेख)
8_निष्कामता से खुलता है समाधि का द्वार (लेख)
9_चित्त की चंचलता का रुपान्तरण है समाधि (लेख)
10_दिव्यता की एक झलक से बदलती है दुनिया (लेख)
11_अशान्ति का समाधान है एकाग्रता (लेख)
12_भूत और भविष्य से मुक्त्त आज का आनन्द (लेख)
13_हर पल परिवर्तन का नाम है - प्रकृति (लेख)
14_निराकार से एकाकार होने का विज्ञान (लेख)
15_योग विधियों से घटते हैं चित्त की भूमि में चमत्कार (ले
16_कैसे होता है भूत और भविष्य का ज्ञान (लेख)
17_भावों पर संयम से होता है सभी भाषाओं का ज्ञान (लेख)
18_संस्कारों के ज्ञान से होता है जन्म-जन्मान्तरों का ब
19_संयम से खुलते हैं दूसरों के मन के द्वार (लेख)
20_समाधि से संभव है दूसरे के चित्त का सम्यक ज्ञान (लेख)
21_अदृश्य होने का ज्ञान और विज्ञान (लेख)
22_शब्दों के तिरोहित हो जाने का विज्ञान (लेख)
23_कर्मों के संयम से मिलता है मृत्यु के क्षण का ज्ञान (ल
24_मैत्री गुण के सधने से सधते हैं सारे गुण (लेख)
25_संयम के सदुपयोग से होता है असंभव भी संभव (लेख)
26_योगी की शक्त्ति है प्रज्ञा का प्रकाश (लेख)
27_सूर्य पर संयम करने से होता है समस्त लोकों का ज्ञान (ल
28_चन्द्रमा पर संयम से मिलती है अमरता (लेख)
29_ध्रुव तारे पर संयम से होता है नक्षत्रों का ज्ञान (ले
30_नाभि चक्र पर संयम से होता है जीवन का सम्यक्‌ ज्ञान (ल
31_कण्ठ पर संयम से होता है क्षुधा पर नियंत्रण (लेख)
32_कर्म नाड़ी पर संयम से मिलता है परम एकत्व (लेख)
33_ब्रह्मरंध पर संयम से होता है ब्रह्मज्ञानियों का ज्ञ
34_बुद्धि व बोध का समन्वय है प्रतिभा (लेख)
35_हदय पर संयम से होता है चित्त का ज्ञान (लेख)
36_स्वार्थ पर संयम से आत्म्पुरुष का ज्ञान (लेख)
37_जीवन के शीर्षासन से प्राप्त दुर्लभ सिद्धियाँ (लेख)
38_योगी के लक्ष्य में भटकाव हैं सिद्धियाँ (लेख)
39_योगी के लिए संभव है परकाया प्रवेश (लेख)
40_उदान प्राण के संयम से होती है ऊर्ध्व गति (लेख)
41_जठराग्नि को प्रदीप्त करने की साधना (लेख)
42_पराभौतिक श्रवणशक्त्ति की प्राप्ति (लेख)
43_आकाशगमन का योगविज्ञान (लेख)
44_देहबोध से आत्मबोध का मार्ग-विदेह धारणा (लेख)
45_भूतजय की सिद्धि (लेख)
46_अष्टसिद्धियों की प्राप्त्ति का योग पथ (लेख)
47_भूतजय होने पर मिलती है वज्र समान काया (लेख)
48_समस्त इंद्रियों पर विजय (लेख)
49_प्रकृति पर अधिकार करता है योगी (लेख)
50_भावों व पदार्थों पर अधिकार की योगसाधना (लेख)
51_वैराग्य का परम शिखर है कैवल्य (लेख)
52_देव निमन्त्रण से भ्रमित नहीं होता है योग साधक (लेख)
53_क्षण-क्रम सधे तो होता है विवेक ज्ञान (लेख)
54_भेदों की सूक्ष्मताओं का बोध कराता है विवेक (लेख)
55_सबका सब प्रकार से सम्यक्‌ ज्ञान है-विवेकजनित ज्ञान (
56_चित्त व पुरुष की सम्यक्‌ शुद्धि का परिणाम है कैवल्य (
57_उपसंहार (लेख)
Disclaimer : The content in this website in form of books and/or literature is strictly for self, Society and Nation development as well as educational and informational purpose only to spread ‘Thought Revolution Movement’ Pt. Shriram Sharma Acharya (Founder of All World Gayatri Pariwar). Anyone who wishes to apply concepts and ideas contained in this website takes full responsibilities for their actions. Contents in this website is not intended to spread rumours or offend or hurt the sentiments of any religion, communities or individuals, or to bring disrepute to any person (living or dead). Articles, Books or any contents in this website must not be used for any commercial purpose without prior written permission of original owner “Vedmata Gayatri Trust, Shantikunj-Haridwar” www.awgp.org