अन्तर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग ३ | Anjarjagat Ki Yatra Ka Gyan Vigyan Bhag 3 Book in Hindi

अन्तर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग ३ | Anjarjagat Ki Yatra Ka Gyan Vigyan Bhag 3 Book in Hindi

Product Code: HIN1173H_SA_39
Author Name : Dr. Pranav Pandya
Publication : Shantikunj, Haridwar
Totap Pages : 232 Pages_Regular Size Book
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Table Of Content

1.  ध्येय में मन की एकाग्रता है- धारणा 51.  वैराग्य का परम शिखर है कैवल्य
2.  स्वयं का स्वयं के प्रति होश है- ध्यान 52.  देव निमन्त्रण से भ्रमित नहीं होता है योग साधक
3.  चित्त का ध्येय में विलय है- समाधि 53.  क्षण-क्रम सधे तो होता है विवेक ज्ञान
4.  धारणा, ध्यान, समाधि का एकत्व है संयम 54.  भेदों की सूक्ष्मताओं का बोध कराता है विवेक
5.  संयम सिद्धि से होती है बुद्धि प्रकाशित 55.  सबका सब प्रकार से सम्यक्‌ ज्ञान है-विवेकजनित ज्ञान
6.  क्रमिक होती है संयम की साधना 56.  चित्त व पुरुष की सम्यक्‌ शुद्धि का परिणाम है कैवल्य
7.  अनूठी है संयम की विभूति 57.  उपसंहार
8.  निष्कामता से खुलता है समाधि का द्वार

9.  चित्त की चंचलता का रुपान्तरण है समाधि  
10.  दिव्यता की एक झलक से बदलती है दुनिया

11.  अशान्ति का समाधान है एकाग्रता   
12.  भूत और भविष्य से मुक्त्त आज का आनन्द

13.  हर पल परिवर्तन का नाम है - प्रकृति  
14.  निराकार से एकाकार होने का विज्ञान

15.  योग विधियों से घटते हैं चित्त की भूमि में चमत्कार

16.  कैसे होता है भूत और भविष्य का ज्ञान    
17.  भावों पर संयम से होता है सभी भाषाओं का ज्ञान  
18.  संस्कारों के ज्ञान से होता है जन्म-जन्मान्तरों का बोध
 
19.  संयम से खुलते हैं दूसरों के मन के द्वार
20.  समाधि से संभव है दूसरे के चित्त का सम्यक ज्ञान 

21.  अदृश्य होने का ज्ञान और विज्ञान

22.  शब्दों के तिरोहित हो जाने का विज्ञान
  
23.  कर्मों के संयम से मिलता है मृत्यु के क्षण का ज्ञान

24.  मैत्री गुण के सधने से सधते हैं सारे गुण
25.  संयम के सदुपयोग से होता है असंभव भी संभव

26.  योगी की शक्त्ति है प्रज्ञा का प्रकाश
27.  सूर्य पर संयम करने से होता है समस्त लोकों का ज्ञान  
28.  चन्द्रमा पर संयम से मिलती है अमरता  
29.  ध्रुव तारे पर संयम से होता है नक्षत्रों का ज्ञान   
30.  नाभि चक्र पर संयम से होता है जीवन का सम्यक्‌ ज्ञान  
31.  कण्ठ पर संयम से होता है क्षुधा पर नियंत्रण
32.  कूर्म नाड़ी पर संयम से मिलता है परम एकत्व  
33.  ब्रह्मरंध पर संयम से होता है ब्रह्मज्ञानियों का ज्ञान   
34.  बुद्धि व बोध का समन्वय है प्रतिभा  
35.  हदय पर संयम से होता है चित्त का ज्ञान

36.  स्वार्थ पर संयम से आत्म्पुरुष का ज्ञान   
37.  जीवन के शीर्षासन से प्राप्त दुर्लभ सिद्धियाँ

38.  योगी के लक्ष्य में भटकाव हैं सिद्धियाँ  
39.  योगी के लिए संभव है परकाया प्रवेश  
40.  उदान प्राण के संयम से होती है ऊर्ध्व गति   
41.  जठराग्नि को प्रदीप्त करने की साधना
42.  पराभौतिक श्रवणशक्त्ति की प्राप्ति  
43.  आकाशगमन का योगविज्ञान   
44.  देहबोध से आत्मबोध का मार्ग-विदेह धारणा

45.  भूतजय की सिद्धि

46.  अष्टसिद्धियों की प्राप्त्ति का योग पथ  
47.  भूतजय होने पर मिलती है वज्र समान काया   
48.  समस्त इंद्रियों पर विजय
49.  प्रकृति पर अधिकार करता है योगी
50.  भावों व पदार्थों पर अधिकार की योगसाधना   

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