भक्तिगाथा | Bhaktigatha Book in Hindi

भक्तिगाथा | Bhaktigatha Book in Hindi

Product Code: HIN0444H_KP_30
Author Name : Dr. Pranav Pandya
Publication : Shantikunj, Haridwar
Totap Pages : 328 Pages_Regular Size Book
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Table Of Content Table Of Content
1.  देवर्षि नारद का आह्वान 51.  भक्त स्वयं तरता है और औरों को भी तारता है
2.  वासनाओं के भावनाओं में रुपांतरण की कथा 52.  अनिर्वचनीय है प्रेम
3.  पराम्बा के प्रति परमप्रेमरुपा है भक्ति 53.  गूंगे का गुड़ है भक्ति
4.  भक्ति से व्यक्तित्व बन जाता है अमृत का निर्झर 54.  एक शून्य निवेदन है भक्ति
5.  असंभव को संभव करती है भक्ति 55.  कामनाएँ,अपेक्षाएँ हों तो वहाँ प्रेम नहीं
6.  जिसे भक्ति मिल जाए, वो और क्या चाहे ? 56.  प्रेम से होती है प्रभु की पहचान
7.  प्याली में सागर समाने जैसा है भक्ति का भाव 57.  तीनों गुणों को पार कर जाती है ’पराभक्ति’
8.  भक्ति से होती है भावों की निर्मलता 58.  भक्ति की श्रेष्ठतम अवस्था
9.  विकारों से मुक्त, भक्तों के आदर्श शुकदेव 59.  श्रेष्ठ ही नहीं,सुलभ भी है भक्ति
10.  अनन्यता के पथ पर बढ़ चलें हम 60.  भक्ति को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं
11.  अन्य आश्रयों का त्याग ही है अनन्यता 61.  शान्ति और परमानन्द का रुप है भक्ति
12.  मर्यादाओं का रक्षक है भक्त 62.  भक्ति को लोकहानि की कैसी चिन्ता
13.  शिवभक्त, परम बलिदानी दधीचि 63.  लोकव्यवहार की मर्यादाओं से जुड़ी है भक्ति
14.  भक्त के लिए अनिवार्य हैं मर्यादाएँ और संयम 64.  भक्ति का आचारशास्त्र
15.  भक्त का जीवन निर्द्धद्ध व सहज होता है 65.  भक्त के लिए जरुरी है दंभ का त्याग
16.  भक्ति एक, लक्षण अनेक 66.  दोषों को भी प्रभु को अर्पित करता है भक्त
17.  भगवान में अनुराग का नाम है भक्ति 67.  जिन प्रेम कियो तिनहिं प्रभु पायो
18.  हरिकथ का श्रवण भी है भक्ति का ही रुप 68.  अनन्य भक्ति ही श्रेष्ठतम है
19.  अविनाशी चैतन्य के प्रति समर्पण है भक्ति 69.  अनन्य भक्तों से पवित्र होती है पृथ्वी
20.  माँ-ये एक अक्षर ही है भक्ति का परम मंत्र 70.  विलक्षण है अनन्य भक्तों की महिमा
21.  प्रभु स्मरण,प्रभु समर्पण और प्रभु अर्पण का नाम है भक्ति 71.  तन्मयता, तल्लीनता का नाम है भक्ति
22.  भक्तों के वेश में रहते हैं भगवान 72.  बड़ा व्यापक है भक्ति का प्रभाव
23.  अद़्भुत थी ब्रज गोपिकाओं की भक्ति 73.  भक्ति न जाती देखती है न कुल
24.  गोपियों के कृष्ण प्रेम का मर्म 74.  तुम भक्न के भक्त तुम्हारे
25.  भक्ति वही, जिसमें सारी चाहतें मिट जाएँ 75.  बुद्धि से विशाल है भक्ति का आकाश
26.  कर्म, ज्ञान और योग से भी श्रेष्ठ है भक्ति 76.  वरेप्य है भक्ति, वंदनीय है भक्ति
27.  समस्त साधनाओं का सुफल है भक्ति 77.  भक्तिशास्त्रों का मनन-भक्त की अनूठी साधना
28.  अभिमानी से दूर हैं ईश्वर 78.  जो खोता है वही तो पाता है
29.  ज्ञान ही है भक्ति का साधन 79.  भगवान के योग्य बनने की गाथा है भक्ति
30.  भक्ति और ज्ञान में विरोध कैसा ? 80.  भगवान पर सम्पूर्ण विश्वास है भक्ति
31.  भगवान को भावनाएँ अर्पित करने वाला कहलाता है भकत 81.  हदय में जब उठती है तड़प, तब होता है कीर्तन
32.  भक्तश्रेष्ठ अम्बरीश की गाथा 82.  तीनों कालों में भक्ति ही श्रेष्ठ है
33.  महातृप्ति के समान है भक्ति का अनुभव 83.  जब मैं था तब हरि नहीं,जब हरि है तब मैं नहीं
34.  जहाँ भक्ति है, वहाँ भगवान हैं 84.  परमात्मा से परम प्रेम है-भक्ति
35.  महारास की रसमयता से प्रकट हुआ है भक्तिशास्त्र 85.  भक्तिसूत्रों का सूत्रपात 
36.  भक्तवत्सल भगवान के प्रिय भीष्म
  
37.  प्रभु के भजन का, स्मरण का क्रम अखण्ड बना रहे   
38.  भक्ति के अपूर्व सोपान हैं-श्रवण और कीर्तन   
39.  भगवत्कृपा के स्त्रोत हैं-भक्ति और भक्त  
40.  दुर्लभ है महापुरुषों का संग  
41.  प्रभुकृपा से ही मिलता है महापुरुषों का संग  
42.  भगवान और भक्त में भेद कैसा ?   
43.  भक्तों का संग है सर्वोच्च साधना  
44.  सर्वथा त्याज्य है दु:संग   
45.  उबारत है सत्संग   
46.  कुसंग की तरंग बन जाती है महासमुद्र   
47.  नारायण नाम का चमत्कार   
48.  योग-क्षेम का त्यागी कहलाता है भक्त   
49.  कर्मों का त्याग ही है सच्चा भक्ति  
50.  भगवत्प्रेमी ही है सच्चा भक्त

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