प्रेरणाप्रद कथा गाथाएँ | Preranaprad Katha Kathaen Book in Hindi

प्रेरणाप्रद कथा गाथाएँ | Preranaprad Katha Kathaen Book in Hindi

Product Code: HIN0423H_KP_07
Author Name : Pt. Shriram Sharma Acharya
Publication : Yug Nirman Yojana, Mathura
Totap Pages : 168 Pages_Regular Size Book
Download : 580
Availability: 8

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Table Of Content
1.  मनुष्य की अपूर्णता 51.  अपने लिए कम 101.  विवेक ही बड़ा है 151.  दस अक्षरों ने महाभारत रचाया
2.  अनासक्त कर्म ही सच्चा योग 52.  आत्मज्ञान आवश्यक 102.  जो सिर काटे आपना 152.  धूल पर धूल
3.  आत्माभिमुख बनो 53.  दया यज्ञ 103.  मोक्ष के सम्मुख राज्य तुच्छ 153.  सच्चा प्रजापालन
4.  पंचाग्नि विध्या 54.  कंजूसी किस काम की ? 104.  ईश्वर प्राप्ति का अधिकार 154.  जीवन का रहस्य
5.  देवता भी नहीं कर सक्ते 55.  मेरा भाई-बंधु और कोई नहीं 105.  आत्मज्ञान की प्राप्ति 155.  अभ्यास से सब कुछ संभव
6.  पंडित और मूर्ख 56.  सज्जन की खोज 106.  सिद्धि से पहले 156.  अँधेरा और उजाल
7.  धर्मपत्नी का सहयोग 57.  इन्हें पता नहीं कि.....रहे हैं ? 107.  क्रोध को जीतो 157.  जैसा खाया अन्न वैसा बना मन
8.  बासा मन ताजा करो 58.  न्याय रक्षा 108.  एक विचार..... टिकने न दो 158.  शिक्षा देने से पहले
9.  संयम की शक्ति 59.  छोटी भूल का बड़ा दुष्परिणाम 109.  आरोग्य रक्षा का रहस्य 159.  परोपकारी वकील
10.  सच्चा आग्रह 60.  कर्तव्यनिष्ठा का पुरस्कार 110.  बुरी संगति से दुर्गति 160.  धोखा नहीं दूँगा
11.  आत्मवत़् सर्वभूतेषु 61.  विश्वासघात 111.  वासना का अभिशाप 161.  अनीति का दंड
12.  वैध्य की आवश्यकता 62.  विरोधी को प्रवेश नहीं 112.  दक्षिणा 162.  स्वर्ग औए नरक का अस्तित्व
13.  कृतज्ञता प्रकाश 63.  ईर्ष्या साँपिनि को न शतावा 113.  चावलों में कंकड 163.  ध्यान का महत्व
14.  सच्चा गीतार्थ 64.  मान्यता अपनी-अपनी 114.  बिना विचारे जो करे 164.  वीणा का मर्म
15.  तलाश 65.  जन्मना जायते शूद्र: 115.  समय के पंख 165.  आत्म-भाव का चमत्कार
16.  नशा एक बला 66.  स्वप्न पर मत रीझो 116.  मिथ्या-प्रेम 166.  सत्य की प्रतिष्ठा
17.  परोपकारी को कहीं भी भय नहीं 67.  अपना बल क्षीण न करो 117.  अनुकरण अच्छा, अंधानुकरण नहीं 167.  साधु का चरित्र अत्यंत निर्मल रहे
18.  अपरोपकारी.....चला जाता है 68.  शुभचिंतक की पहचान 118.  कर्म करो तभी मिलेगा 168.  धन का गर्व तुच्छ है
19.  समदर्शी भगवान के जात नहीं 69.  सुजाता की खीर 119.  साधक की कसौटी 169.  संघर्ष से बड़ी शक्ति नहीं
20.  अब तू मेरी सच्ची बेटी है 70.  प्रमादी की पहचान 120.  औषधि रुपए.......संसार 170.  किम़् आश्चर्यम़्
21.  कुछ तो कर यों ही मत मर 71.  प्रगति के अवरोध 121.  ग्राहकता 171.  अधूरी भक्ति
22.  परमात्मा का पल्ला मत छोड़ो 72.  भाव की भूख 122.  सती का तेज 172.  पराया धन धूलि समान
23.  आत्म-विजय 73.  स्वर्ग और नरक भावनाओं में 123.  अमानत की वापसी 173.  श्रद्धा से विध्या मिलती है
24.  भगवान का क्या दोष 74.  बुद्धिहीन वैज्ञानिक 124.  तुम एक दिन भी सहन न कर सके 174.  सत्य भावना पर निर्भर
25.  निर्भीकता 75.  निराश न लौटाओ 125.  घात नहीं करते 175.  मंकी सर्वप्रिय बना
26.  पात्रता की परीक्षा 76.  साधुओं के लिए संदेश 126.  शुभ कार्य तत्काल करो 176.  अपकार का बदला उपकार
27.  शबरी की महत्ता 77.  नारी का आभूषण 127.  मेरी का उपहार 177.  आत्मकल्याण की साधना
28.  पक्षिंयों की रक्षा 78.  आयु कुल चार वर्ष 128.  सच्चा प्रजासेवक 178.  तप की सामर्थ्य
29.  भगवान का प्यार 79.  सुलस का हदय-परिवर्तन 129.  मंदबुद्धि वरदराज 179.  मर्यादा का पालन
30.  एक निश्चय-एक अमल 80.  गुरु निष्ठा 130.  फूट विनाश का कारण 180.  मरने से डरना क्या ?
31.  ऐसी उदारता भी बुरी 81.  ’द’ के तीन अर्थ 131.  अमरत्व से श्रेष्ठ सदाचार 181.  विद्रुध का सेवा धर्म
32.  सधन्यवाद वापस 82.  योग्यता की परख 132.  अतिथि देवो भव 182.  निन्यानवे का फेर
33.  निष्ठा की भूख 83.  भगवान सबको देखता है 133.  शक्ति का स्त्रोत पतिव्रत 183.  भगवान के दर्शन
34.  आत्मीयता-अभिन्नता 84.  बहुमत का सत्य 134.  अंधविश्वास की जड़ 184.  वेश्या बनाम पतिव्रता
35.  सत्य को मजबूती से पकडो 85.  सत्य के लिए क्रूरता का सामना 135.  तैमूरलंग की कीमत 185.  निष्क्रिय श्रद्धा
36.  पश्चाताप 86.  संगठन-शक्ति 136.  धन्य है इस न्यायप्रियता को 186.  हीरे बनाम पत्थर
37.  रुपया रुपए को खींचता है 87.  श्रम का अमृत 137.  विवेक की विजय 187.  राजा की भूल
38.  गधो का सत्कार 88.  अधिक भोले भी न बनो 138.  शांति-सुख और प्रसन्नता 188.  विवेक सबसे बड़ा धर्म
39.  नासमझ को समझ दो, वरदान नहीं 89.  दार्शनिक की विजय 139.  सच्ची शांति कैसे प्राप्त हो 189.  बहुत वाचालत भी अच्छी नहीं
40.  पुरुषार्थ की विजय 90.  पंचरत्न 140.  नरमेध 190.  लक्ष्मी-निवास
41.  सार्थक श्रद्धा 91.  सादगी सच्चा आभूषण 141.  लोभ का फल 191.  खाँड़ के खिलौने
42.  निर्विकल्प समाधि 92.  जैसा ध्यान-वैसा निर्माण 142.  श्रद्धाभाव से सब कुछ प्राप्ति 192.  नकल अच्छी नहीं
43.  पूर्णता का अहंकार 93.  सत्संकल्प अधूरे नहीं रहते 143.  विनाश के कारण......आकर्षण 193.  चित्र-विचित्र
44.  तेजस्वी ब्राह्मण 94.  धन यहाँ न सहीं कहीं और सही 144.  परोपकार के लिए आत्म-बलिदान 194.  भगवान अच्छा ही करता है
45.  अन्नपूर्णा रोटियाँ 95.  स्वर्ग क्या है नरक क्या है ? 145.  विध्या से विनय 195.  बोनीफेस झरना
46.  भीष्म की पितृभक्ति 96.  बीमारियों का निवास 146.  आज के पुण्य कल की प्राप्ति 196.  धन्य सुकन्या
47.  पढ़ने के साथ गुनो भी 97.  मन नहीं लगता 147.  सच्चा ज्ञान 197.  मेंढ़क का मेंढ़क
48.  ईमानदार गरीब 98.  दीपक जलाओ, प्रकाश फैलाओ 148.  पहले पात्रता तब दीक्षा 198.  धर्म का सौदा
49.  माँ की सेवाएँ वेदज्ञान 99.  संकल्प की सुगंध 149.  सफलता का श्रेय 199.  कर्तव्य की कसौटी
50.  मैं-मैं ले डूबा 100.  आसक्ति ही बंधन 150.  एक सेव का मूल्य 200.  

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