भक्तिपथ की जीवन ज्योति | Bhaktipath Ki Jivan Jyoti Book in Hindi

भक्तिपथ की जीवन ज्योति | Bhaktipath Ki Jivan Jyoti Book in Hindi

Product Code: HIN0012H_AA_12
Author Name : Pt. Shriram Sharma Acharya
Publication : Yug Nirman Yojana, Mathura
Totap Pages : 56 Pages_Regular Size Book
Download : 477
Availability: 4

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Table Of Content

1.  भावनात्मक उत्कर्ष ही व्यक्तित्व विकास का आधार पृष्ठ: 3
2.  भाव के भूखे है भगवान् पृष्ठ: 15
3.  आत्मविकास के लिये भक्ति योग की साधना पृष्ठ: 37
4.  भक्ति पथ की जीवन नीति पृष्ठ: 51


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भावनाओं को श्रेष्ठ आदर्श में नियोजित करने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व उसी आदर्श के अनुरूप विस्तृत विराट हो जाता है ।। वह सीमित- संकीर्ण या एकाकी- असहाय नहीं रह जाता ।। भले ही बाहरी तौर पर वह "एकला चलो रे" की नीति अनुसरण का करता- एकाकी बढ़ता दिखे, किंतु, उसे आंतरिक अकेलेपन का अनुभव कभी भी नहीं होता ।। उसका जीवन आदर्श सदा ही उसका साथी, संबल एवं सहायक बना रहता है ।। उसी संबल से वह बड़ी- बड़ी बाधाओं को सहने तथा बड़े- बड़े कार्य करते चलने में समर्थ होता है, अन्यथा अकेले की क्या शक्ति ? 

एकाकी व्यक्ति की अपनी थोड़ी- सी सीमा मर्यादा है, अपने बलबूते पर भी कुछ कार्य तो हो ही सकता है, पर वह होगा नगण्य ही ।। बड़ी प्रगति- बड़ी संभावना तो सम्मिलित शक्ति के द्वारा ही मूर्तिमान होती है ।। एक- एक सैनिक अलग- अलग फिरे, तो उनके छुट - पुट कार्य एक सुगठित सैन्य टोली जैसे नहीं हो सकते ।। 

कई तरह की योग्यताएँ मिल- जुलकर अपूर्णता को पूर्ण करती हैं ।। परिवार को ही लें उसमें कई स्तर के कई विशेषताओं के मनुष्य मिल- जुलकर रहते हैं तो एक अनोखे आनंद का सृजन करते हैं ।। पति- पत्नी की योग्यताएँ भिन्न- भिन्न प्रकार की होती हैं, जब वे मिलकर एक हो जाते है तो दोनों को ही लाभ होता है, दोनों ही अपने अभावों की पूर्ति करते है ।। वृद्धों का अनुभव, बालकों का विनोद, उपार्जनकर्त्ताओं का धन आदि मिलकर एक ऐसा संतुलन बनता है जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का हित, साधन होता है ।।

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