मीमांसा दर्शन | Mimansa Darshan Book in Hindi

मीमांसा दर्शन | Mimansa Darshan Book in Hindi

Product Code: HIN0062H_AG_14
Author Name : Pt. Shriram Sharma Acharya & Mata Bhagavati Devi Sharma
Publication : Yug Nirman Yojana, Mathura
Totap Pages : 752 Pages_Big Size Book
Download : 1088
Availability: 3

मीमांसा दर्शन pdf book free download

Rs.300/-
-+

Ask a question about this product

Table Of Content
1.  भुमिका पृष्ठ: 5-16
2.  प्रथम अध्याय
3.     प्रथम  पृष्ठ: 17-27
4.     द्वितीय पृष्ठ: 28-48
5.     तृतीय पृष्ठ: 49-63
6.     चतुर्थ पृष्ठ: 64-76
7.  द्वितीय अध्याय
8.     प्रथम  पृष्ठ: 77-93
9.     द्वितीय पृष्ठ: 94-107
10.     तृतीय पृष्ठ: 108-119
11.     चतुर्थ पृष्ठ: 120-132
12.  तृतीय अध्याय
13.     प्रथम  पृष्ठ: 133-142
14.     द्वितीय पृष्ठ: 143-160
15.     तृतीय पृष्ठ: 161-178
16.     चतुर्थ पृष्ठ: 179-197
17.     पंचम पृष्ठ: 198-214
18.     षष्ठ पृष्ठ: 215-230
19.     सप्तम पृष्ठ: 231-246
20.     अष्टम पृष्ठ: 247-262
21.  चतुर्थ अध्याय
22.     प्रथम  पृष्ठ: 263-278
23.     द्वितीय पृष्ठ: 279-288
24.     तृतीय पृष्ठ: 289-300
25.     चतुर्थ पृष्ठ: 301-312
26.  पंचम अध्याय
27.     प्रथम  पृष्ठ: 313-323
28.     द्वितीय पृष्ठ: 324-331
29.     तृतीय पृष्ठ: 332-344
30.     चतुर्थ पृष्ठ: 345-352
31.  षष्ठ अध्याय
32.     प्रथम  पृष्ठ: 353-363
33.     द्वितीय पृष्ठ: 364-370
34.     तृतीय पृष्ठ: 371-378
35.     चतुर्थ पृष्ठ: 379-387
36.     पंचम पृष्ठ: 388-398
37.     षष्ठ पृष्ठ: 399-407
38.     सप्तम पृष्ठ: 408-415
39.     अष्टम पृष्ठ: 416-424
40.  सप्तम अध्याय 
41.     प्रथम  पृष्ठ: 425-429
42.     द्वितीय पृष्ठ: 430-434
43.     तृतीय पृष्ठ: 435-441
44.     चतुर्थ पृष्ठ: 442-446
45.  अष्टम अध्याय
46.     प्रथम  पृष्ठ: 447-454
47.     द्वितीय पृष्ठ: 455-460
48.     तृतीय पृष्ठ: 461-468
49.     चतुर्थ पृष्ठ: 469-474
50.  नवम अध्याय 
51.     प्रथम  पृष्ठ: 475-488
52.     द्वितीय पृष्ठ: 489-501
53.     तृतीय पृष्ठ: 502-512
54.     चतुर्थ पृष्ठ: 513-526
55.  दशम अध्याय
56.     प्रथम  पृष्ठ: 527-536
57.     द्वितीय पृष्ठ: 537-550
58.     तृतीय पृष्ठ: 551-567
59.     चतुर्थ पृष्ठ: 568-580
60.     पंचम पृष्ठ: 581-597
61.     षष्ठ पृष्ठ: 598-613
62.     सप्तम पृष्ठ: 614-627
63.     अष्टम पृष्ठ: 628-642
64.  एकादश अध्याय
65.     प्रथम  पृष्ठ: 643-657
66.     द्वितीय पृष्ठ: 658-670
67.     तृतीय पृष्ठ: 671-682
68.     चतुर्थ पृष्ठ: 683-694
69.  द्वादश अध्याय 
70.     प्रथम  पृष्ठ: 695-703
71.     द्वितीय पृष्ठ: 704-711
72.     तृतीय पृष्ठ: 712-719
73.     चतुर्थ पृष्ठ: 720-728
74.  परिशिष्ट-   
75.  सूत्रानुक्रमणिका पृष्ठ: 729-751

Write a review

Note: HTML is not translated!
    Bad           Good

किसी वस्तु के स्वरूप का यथार्थ निर्णय करने की विधि को मीमांसा कहते हैं । भारतीय धर्म का मूल ग्रन्थ वेद है । वेद के दो भाग हैं-एकको कर्मकाण्ड, दूसरे को ज्ञानकाण्ड कहते हैं । कर्मकाण्ड में याज्ञिक क्रियाओं एवं अनुष्ठान की विधियों का वर्णन किया गया है ज्ञानकाण्ड में ईश्वर, जीव एवं प्रकृतिगत पदार्थों के स्वरूप और सम्बन्ध का निरूपण किया गया है । एक परिभाषाके अनुसार इष्ट की प्राप्ति एवं अनिष्ट-परिहार के अलौकिक उपाय बतलाने वाले ग्रन्थ को वेद कहा जाता है । इष्ट की प्राप्ति एवं अनिष्ट का परिहार धर्माचरण से ही हो सकता है । हमें जो करना चाहिए और जैसा होना चाहिए जैसे प्रश्नों का समाधान धर्मशास्त्र या वेद ही कर सकते हैं, मीमांसादर्शन की उत्पत्ति इन्हीं प्रश्नों की वास्तविक जानकारी के लिए हुई है । कर्मकाण्ड एवं ज्ञान के निरूपण में दिखाई पड़ने वाले आपातत: विरोधोंको दूर करने का लक्ष्य लेकर मीमांसा दर्शन की प्रवृत्ति होती है । इसे कर्म मीमांसा भी कहते हैं,क्योंकि इसमें कर्मकाण्ड की मीमांसा की गई है; परन्तु सामान्य तौर पर इसे मीमांसा नाम से ही अभिहित किया गया है । ज्ञानकाण्ड का यथार्थ निरूपण करने वाले दर्शन को ज्ञान मीमांसा कहते हैं, जिसे सामान्यतया वेदान्त कहते हैं । वेद का पूर्व खण्ड कर्मकाण्ड तथा उत्तरखण्ड ज्ञानकाण्ड होने के कारण मीमांसा को पूर्व मीमांसा तथा वेदान्त को उत्तर मीमांसा कहते हैं । मीमांसा दर्शन में वैदिक कर्मकाण्डों की समस्याओं और शंकाओं का समाधान किया गया है, इसी कारण दूसरे सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए भी इसकी उपादेयता बढ़ जाती है; परन्तु दूसरा पक्ष इसीलिए इसे दर्शन मानने से इनकार भी करता है । उसका कहना है कि इसके मूल सूत्र ग्रन्ध में प्रमाणों के अतिरिक्त और किसी भी दार्शनिक तत्त्व का समावेश नहीं है ।

Disclaimer :

The content in this website in form of books and/or literature is strictly for self, Society and Nation development as well as educational and informational purpose only to spread ‘Thought Revolution Movement’ Pt. Shriram Sharma Acharya (Founder of All World Gayatri Pariwar www.awgp.org). Anyone who wishes to apply concepts and ideas contained in this website takes full responsibilities for their actions. Contents in this website is not intended to spread rumors or offend or hurt the sentiments of any religion, communities or individuals, or to bring disrepute to any person (living or dead). Articles, Books or any contents in this website must not be used for any commercial purpose without prior written permission of original owner “Vedmata Gayatri Trust, Shantikunj-Haridwar” www.awgp.org 

Powered By Infonix Solutions
Vicharkranti Pustkalay © 2018

Contact Us

Lorem ipsum dolor sit amet, adipis mauris accumsan.

Our Location

Gayatri Pariwar, Beside Gharadi Mataji Temple,
Thana-faliya, Dindoligam, Surat, Gujarat, India – 394210

+91 76008 01200