वेदांत दर्शन | Vedant Darshan Book in Hindi

वेदांत दर्शन | Vedant Darshan Book in Hindi

Product Code: HIN0063H_AG_29
Author Name : Pt. Shriram Sharma Acharya & Mata Bhagavati Devi Sharma
Publication : Yug Nirman Yojana, Mathura
Totap Pages : 264 Pages_Big Size Book
Download : 398
Availability: 3

वेदांत दर्शन pdf book free download

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Table Of Content
1.  भुमिका पृष्ठ: 5-16
2.  अध्याय-१
3.     प्रथम पाद पृष्ठ: 17-30
4.     द्वितीय पाद पृष्ठ: 31-44
5.     तृतीय पाद पृष्ठ: 45-64
6.     चतुर्थ पाद पृष्ठ: 65-80
7.  अध्याय-२
8.     प्रथम पाद पृष्ठ: 81-94
9.     द्वितीय पाद पृष्ठ: 95-112
10.     तृतीय पाद पृष्ठ: 113-131
11.     चतुर्थ पाद पृष्ठ: 132-138
12.  अध्याय-३
13.     प्रथम पाद पृष्ठ: 139-150
14.     द्वितीय पाद पृष्ठ: 151-168
15.     तृतीय पाद पृष्ठ: 169-197
16.     चतुर्थ पाद पृष्ठ: 198-219
17.  अध्याय-४
18.     प्रथम पाद पृष्ठ: 220-226
19.     द्वितीय पाद पृष्ठ: 227-234
20.     तृतीय पाद पृष्ठ: 235-241
21.     चतुर्थ पाद पृष्ठ: 242-250
22.  परिशिष्ट-   
23.  शब्दानुक्रमणिका पृष्ठ: 251-258
24.  सूत्रानुक्रमणिका पृष्ठ: 259-263


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भारतीय चिन्तन धारा में जिन दर्शनों की परिगणना विद्यमान है, उनमें शीर्ष स्थानीय दर्शन कौन सा है ? ऐसी जिज्ञासा होने पर एक ही नाम उभरता है, वह है - वेदान्त । यह भारतीय दर्शन के मंदिर का जगमगाता स्वर्ण कलश है- दर्शनाका देदीप्यमान सूर्य है । वेदान्त की विषय वस्तु, इसके उद्देश्य, साहित्य और आचार्य परम्परा आदिपर गहन चिन्तन करें, इससे पूर्व आइये, वेदान्त शब्द का अर्थ समझें | 

वेदान्त का अर्थ- वेदान्त का अर्थ है- वेद का अन्त या सिद्धान्त । तात्पर्य यह है - वह शास्त्र जिसके लिए उपनिषद् ही प्रमाण है । वेदान्तमें जितनी बातों का उल्लेख है, उन सब का मूल उपनिषद् है । इसलिए वेदान्त शास्त्र के वे ही सिद्धान्त माननीय हैं, जिनके साधक उपनिषद् के वाक्य हैं । इन्हीं उपनिषदों को आधार बनाकर बादरायण मुनि ने ब्रह्मसूत्रों की रचना की ।

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