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माँसाहार मानवता के प्रति अपराध
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AJH1976Jul_18
#माँसाहार
#मानवता
#अपराध
माँसाहार मानवता के प्रति अपराध Document
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Topic Of Source Title
“अन्तःकरण की पुकार अनसुनी न करें”
सुख और संतोष का अन्तर
ईश्वर का मनुहार बनाम आत्म-परिष्कार
स्वस्तिक सार्वभौम संस्कृति का प्रतीक चिन्ह
आत्मा और परमात्मा का अस्तित्व ज्ञान संगत भी और विज्ञान संगत भी
प्रगति भौतिक ही नहीं आत्मिक भी होनी चाहिए
चेतना की प्रगति का महत्व समझा जाय
चमत्कारी सिद्धियाँ न उपयोगी हैं न आवश्यक
कर्म में मनोयोग का समन्वय आवश्यक
स्वास्थ्य रक्षा प्रकृति के अनुसरण से ही सम्भव
सात लोक-सात शरीर
खाद्य मोर्चे पर हम सब मिलकर लड़ें
साधना सिद्धि का मूल आधार श्रद्धा
प्रगति तो हुई पर किस दिशा में
विश्व उपवन में हमारा जीवन पुष्प सा महके
सभ्यता की उपेक्षा करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना
आशा जगाएँ प्रशंसा करें और प्रोत्साहन दें
माँसाहार मानवता के प्रति अपराध
शाकाहारी भोजन ही पूर्ण है
अपनी हथौड़ी से अपने दाँत न तोड़ें
समृद्धि ऐसे चरण चेरी बन गई
अनियंत्रित प्रजनन-सर्वनाश का आह्वान
अपनों से अपनी बात-तीर्थयात्रा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाय (लेख शृंखला)
एकाकी-साधना (कविता)
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