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भारतीय मस्तिष्क के गौरव सर जगदीशचन्द्र वसु
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AJH1966Mar_9
#भारतीय
#मस्तिष्क
#गौरव
भारतीय मस्तिष्क के गौरव सर जगदीशचन्द्र वसु Document
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Topic Of Source Title
आत्म-विश्वास ही अटूट शक्ति
“मामेकं शरणं व्रज”
आत्म-साक्षात्कार के लिए सच्चरित्रता अनिवार्य
अपने जीवन में प्रकृति को प्रवेश होने दीजिये।
सुख और दुःख दृष्टिकोण मात्र हैं।
निराशा से बचने का उपाय-कम कामनाएं
परंपराएं बदली भी जा सकती हैं।
जन-जागरण के अमर साधक-गुरु रामदास
भारतीय मस्तिष्क के गौरव सर जगदीशचन्द्र वसु
श्रम ही नहीं- अविराम श्रम चाहिये।
भोजन भगवान को समर्पित कर लिया करें।
नारी का सुयोग्य होना आवश्यक है।
धन को सम्मानित न किया जाय।
आदर्शवादिता की प्रतिमूर्ति-श्री लाल बहादुर शास्त्री
ममता और करुणा की मूर्ति-कुमारी डायना बालेमी?
बच्चों को भीरु नहीं वीर बनाइये
विवाह संस्कार को कौतुक न बनाया जाय।
गन्दगी एक सामाजिक अपराध
युग-निर्माण आन्दोलन की प्रगति-जीवन का काया-कल्प करने वाला एक वर्षीय प्रशिक्षण
एक वर्षीय प्रशिक्षण योजना
इन अनुरोधों की उपेक्षा न की जाय।
युग निर्माताओं से (कविता)
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