ब्रह्मकमल

ब्रह्मकमल

Author: Brahmavarchas Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINB0022 21311 Views Out of Stock
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Hindi
ब्रह्मकमल-सम्पादकीय
हमारी वसीयत और विरासत
जिनका जीवन ब्रह्मकमल-(कविता)
हम हैं संतानें युगऋषि की-(कविता)
ऋषिसत्ता का अवतरण और उनका बचपन
बाल्यकाल में ही प्रस्फुटित हुए साधना के बीजांकुर
देवरहा बाबा के दुर्लभ अनुभव
हिमालयवासी गुरुसत्ता से साक्षात्कार
वेदमूर्ति पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एक अक्षयवट-स्वामी सत्यमित्रानंद
सूक्ष्म शरीरधारी हमारे आदि संरक्षक
समर्पित साधक की सहज साधना
गायत्री के सिद्ध साधक परमपूज्य गुरुदेव
साधना सूत्रों का युगानुरुप सरल स्वरुप प्रस्तुत करने वाली ऋषिसत्ता
आत्मदेवता के साधक,सावित्री के सिद्ध उपासक
नई गायत्री बना दी है-उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना
गायत्री के सिद्ध उपासक-युग के विश्वामित्र
गायत्री तपोभूमि की स्थापना की प्रेरक झलकियाँ
चिंतन जिनका अतिशय पावन-(कविता)
स्वतंत्रता संग्राम के मतवाले-श्रीराम मत्त
सैनिक पत्र में सतत छपता रहा मत्त प्रलाप-(कविताएँ)
सैनिक एवं संन्यासी की उभयपक्षीय विशेषताएँ थीं उनमें
अंग अवयवों से अपेक्षा-(कविता)
लेखनी का पैनापन प्रारंभ से ही रहा-(कहानी)
पूज्य गुरुदेव के बालसखा पं. बेनीराम शर्मा की डायरी के पन्ने(संस्मरण)
पाती जो सबके पास नियमित पहुँचती रही
गायत्री महाशक्ति की उपासना से मिले सात लाभ
लोचन अनंत उघारया,अनंत किया उपकार
महात्मा आनंद स्वामी जी के अनुभव
ब्रह्मास्त्र अनुष्ठान और क्रांतिकारी उद़्घोष
गुरुदेव की हिमालय यात्रा
आचार्य जी का ऋषित्व
आदर्शो के नए मानदंड गढ़ती युगऋषि की पत्रकारिता
मैं प्रकाश की खातिर पूरी रात चलूँगा-(कविता)
युग के वाल्मीकि जिनकी लेखनी से झलकती है भाव संवेदना
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद जिया और दिया
नींव के पत्थरों का अभिनंदन-(कविता)
नींव के पत्थरों का निवेदन-(कविता)
ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान जहां वैज्ञानिक अध्यात्मवाद ने पहना अमली जामा
उज्ज्वल भविष्य के प्रवक्ता-महाकाल के अंशघर
विश्वराष्ट्र की कुण्डलिनी का जागरण
युगद्रष्टा एवं युगस्त्रष्टा की भूमिका में परमपूज्य गुरुदेव
ब्राह्मणत्व का आदर्श निभाने वे धरती पर आये
गुरुदेव ने दिए सफलता के नए प्रेरक आयाम-(संस्मरण)
रहस्य और रोमांच भरी साधना
उज्ज्वल भविष्य को गढ़ने वाली दैवीय सत्ता
गागर में सागर की तरह उनकी हर पुस्तक
युगऋषि की दिव्यदृष्टि-इक्कीसवीं सदी,उज्ज्वल भविष्य
जीवन की सभी समस्याओं का समाधान युगऋषि के साहित्य में
कैसा होगा नवयुग
२४ कला के अवतार के २४ चमत्कार
माताजी की कहानी-उन्हीं की जुबानी
दो व्यक्तित्व-कहियत भिन्न न भिन्न
काया में तुम बँधे नहीं-(कविता)
अपने आराध्य के प्रति परम वन्दनीया माताजी
साधना से सिद्धावस्था तक साक्षी रहीं परम वन्दनीया माताजी
ऋषिसत्ता के अभियान का संक्षिप्त परिचय
स्मृति पटल पर कौंधते वे क्षण-(संस्मरण)
आचार्यजी की ब्रहमवर्चस साधना-स्वामी चिन्मयानंद
आचार्यजी मेरी दृष्टि में- महामहिम डॉ शंकर दयाल शर्मा
पूज्य गुरुदेव विशिष्ट संतो की दृष्टि में
गुरुसत्ता का आदर्श दाम्पत्य जीवन-(संस्मरण)
अपने अंग अवयवों से
अपना परिवार-उध्य आत्माओं का भण्डागार
आचार्य श्री की समय साधना-(संस्मरण)
विभूतियों का भाव भरा आह्वान
नई डगर-नया सफर
गुरुदेव का सृजन सैनिक -एल्बर्ट डेविड
युग निर्माण योजना एक दृष्टि में
युग निर्माण का शत सूत्रीय कार्यक्रम
सादगी ऐसी कि जो कायल कर दे-(संस्मरण)
प्राण प्रत्यावर्तन सत्र-एक विलक्षण प्रयोग
गाँधी बनने की ललक
हमेशा याद रहेंगे वे दिन-(संस्मरण)
साधना सत्रों की दिव्य अनुभूतियाँ
गुरुजी का अलौकिक स्वरुप-(संस्मरण)
जीवन को लिखेंगे नई परिभाषा-(कविता)
विशाल संगठन की सुनियोजित शुरुआत
अपना काम स्वयं करो-(संस्मरण)
श्री गुरुदेव,न भूतो न भविष्यति
संगठन का महत्व एवं स्वरुप-गुरुदेव के शब्दों मे
पाठक अपने आराध्य से यही सीख लें-(संस्मरण)
आध्यात्मिक चिकित्सा के पंचशील
एक पुनरावृत्ति-(कविता)
प्रज्ञापुरुष का आध्यात्मिक मानवतावाद
प्राण संचार करते ये पत्र
उन अनजान जड़ो को शत-शत नमन-(कविता)
अगर परम पूज्य गुरुदेव का अवतरण न होता, तो क्या होता
गुरुवर आप महान हैं-(कविता)
युगऋषि का आध्यात्मिक समाजवाद
साक्षात्कार में उभरतें अलौकिक लीला प्रसंग
महिला जागृति के प्रणेता इक्कीसवीं सदी-नारी सदी के उद़्घोषक
सृजन शक्ति सन्धान यज्ञ में-(कविता)
इक्केसवीं सदी-नारी सदी-के प्रवकता व द्रष्टा
नारी समाज के प्रति असीम करुणा
उन्होनें हरिद्धार को नई पहचान दी
बलि प्रथा के प्रबल विरोधी पूज्य गुरुदेव-(संस्मरण)
मानव को देवात्मा हिमालय का संदेश-(कहानी)
सृजन क्रांति का केन्द्र होगा भारत
प्रखर जीवन साधना के सजल सूत्र
पूज्य गुरुदेव के रहस्यमय क्षण-(संस्मरण)
बच्चों में स्नेह-वात्सल्य लुटाते पूज्यवर-(संस्मरण)
सृजन सेनानियों से गुरुदेव की अपेक्षा
आध्यात्मिक समाजवाद का मॉडल शांतिकुंज
सफल संचालिका परम वंदनीया माताजी
सतत सूक्ष्म संरक्षण देती हमारी गुरुसत्ता-(संस्मरण)
गुरुदेव के सपनों का विश्वविध्यालय
निजी खर्च के प्रति सजग एवं कठोर -(संस्मरण)
मितव्ययता उनके जीवन में कूट-कूटकर भरी थी-(संस्मरण)
करुणा की जीवंत मूर्ति हमारी गुरुदेव-(संस्मरण)
शिक्षक धर्म-ब्राह्मण धर्म
शिष्यत्व को धन्य बनाने वाली शिष्य संजीवनी
भारतीय संस्कृति के सजीव दर्पण-आचार्य प्रवर
शांतिकुंज की संस्कारित भूमि
गायत्री परिवार के प्रति मूर्धन्यों के मत
श्रीराम शर्मा आचार्य के व्यक्तित्व पर सम्पन्न शोध कार्य
ब्रह्मकमल के ब्रह्मबीजों का विस्तार-सप्तद्धीपा वसुधरा तक
महाप्रयाण की तैयारी
हीरक जयंती पर उभरे ऋषियुग्म के उद़्गार-(विशेष प्रवचन)
भावी महाभारत की तैयारी
परमपूज्य गुरुदेव का अंतिम संदेश
परम वंदनीया माताजी का अंतिम संदेश
ब्रह्मकमल का उद़्घोष-(कविता)
Pt. Shriram Sharma Acharya A Brief Bio-sketch
Feelings of an American Sadhak during one year stay at Shantikunj
Sprinkling of the seeds of Brahmakamall in the entire World
18 Point pledge for creating a new world order of peace and prosperity
Book Size Big
Pages 376
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2011
Format 21x27 CM
Weight 0.91
Code H_SJ_27

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