अंतर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग ३

अंतर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग ३

Author: Dr. Pranav Pandya Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINR0080 13165 Views Out of Stock
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Hindi
ध्येय में मन की एकाग्रता है-धारणा (लेख)
स्वयं का स्वयं के प्रति होश है-ध्यान (लेख)
चित्त का ध्येय में विलय है-समाधि (लेख)
धारणा, ध्यान, समाधि का एकत्व है संयम (लेख)
संयम सिद्धि से होती है बुद्धि प्रकाशित (लेख)
क्रमिक होती है संयम की साधना (लेख)
अनूठी है संयम की विभूति (लेख)
निष्कामता से खुलता है समाधि का द्वार (लेख)
चित्त की चंचलता का रुपान्तरण है समाधि (लेख)
दिव्यता की एक झलक से बदलती है दुनिया (लेख)
अशान्ति का समाधान है एकाग्रता (लेख)
भूत और भविष्य से मुक्त्त आज का आनन्द (लेख)
हर पल परिवर्तन का नाम है-प्रकृति (लेख)
निराकार से एकाकार होने का विज्ञान (लेख)
योग विधियों से घटते हैं चित्त की भूमि में चमत्कार (लेख)
कैसे होता है भूत और भविष्य का ज्ञान (लेख)
भावों पर संयम से होता है सभी भाषाओं का ज्ञान (लेख)
संस्कारों के ज्ञान से होता है जन्म-जन्मान्तरों का बोध (लेख)
संयम से खुलते हैं दूसरों के मन के द्वार (लेख)
समाधि से संभव है दूसरे के चित्त का सम्यक ज्ञान (लेख)
अदृश्य होने का ज्ञान और विज्ञान (लेख)
शब्दों के तिरोहित हो जाने का विज्ञान (लेख)
कर्मों के संयम से मिलता है मृत्यु के क्षण का ज्ञान (लेख)
मैत्री गुण के सधने से सधते हैं सारे गुण (लेख)
संयम के सदुपयोग से होता है असंभव भी संभव (लेख)
योगी की शक्त्ति है प्रज्ञा का प्रकाश (लेख)
सूर्य पर संयम करने से होता है समस्त लोकों का ज्ञान (लेख)
चन्द्रमा पर संयम से मिलती है अमरता (लेख)
ध्रुव तारे पर संयम से होता है नक्षत्रों का ज्ञान (लेख)
नाभि चक्र पर संयम से होता है जीवन का सम्यक्‌ ज्ञान (लेख)
कण्ठ पर संयम से होता है क्षुधा पर नियंत्रण (लेख)
कूर्म नाड़ी पर संयम से मिलता है परम एकत्व (लेख)
ब्रह्मरंध पर संयम से होता है ब्रह्मज्ञानियों का ज्ञान (लेख)
बुद्धि व बोध का समन्वय है प्रतिभा (लेख)
हदय पर संयम से होता है चित्त का ज्ञान (लेख)
स्वार्थ पर संयम से आत्म्पुरुष का ज्ञान (लेख)
जीवन के शीर्षासन से प्राप्त दुर्लभ सिद्धियाँ (लेख)
योगी के लक्ष्य में भटकाव हैं सिद्धियाँ (लेख)
योगी के लिए संभव है परकाया प्रवेश (लेख)
उदान प्राण के संयम से होती है ऊर्ध्व गति (लेख)
जठराग्नि को प्रदीप्त करने की साधना (लेख)
पराभौतिक श्रवणशक्त्ति की प्राप्ति (लेख)
आकाशगमन का योगविज्ञान (लेख)
देहबोध से आत्मबोध का मार्ग-विदेह धारणा (लेख)
भूतजय की सिद्धि (लेख)
अष्टसिद्धियों की प्राप्त्ति का योग पथ (लेख)
भूतजय होने पर मिलती है वज्र समान काया (लेख)
समस्त इंद्रियों पर विजय (लेख)
प्रकृति पर अधिकार करता है योगी (लेख)
भावों व पदार्थों पर अधिकार की योगसाधना (लेख)
वैराग्य का परम शिखर है कैवल्य (लेख)
देव निमन्त्रण से भ्रमित नहीं होता है योग साधक (लेख)
क्षण-क्रम सधे तो होता है विवेक ज्ञान (लेख)
भेदों की सूक्ष्मताओं का बोध कराता है विवेक (लेख)
सबका सब प्रकार से सम्यक्‌ ज्ञान है-विवेकजनित ज्ञान (लेख)
चित्त व पुरुष की सम्यक्‌ शुद्धि का परिणाम है कैवल्य (लेख)
उपसंहार (लेख)
Book Size Regular
Pages 232
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2016
Format 14x22 CM
Weight 0.23
Code H_SA_39

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