अंतर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग ४

अंतर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग ४

Author: Dr. Pranav Pandya Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINR0081 7463 Views Out of Stock
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Hindi
पाँच प्रकार की होती है सिद्धियाँ (लेख)
चित्त में परिवर्तन से बदलते है घटनाक्रम (लेख)
प्रकृति स्वंय पूरा करती है अपना लक्ष्य (लेख)
निर्माण चित्त से सम्भव है अनेक देह (लेख)
अनेक चित्त का निर्माण व नियंत्रण कर सकता है-योगी (लेख)
ध्यान से होती है सम्पूर्ण चित्त शुद्धि (लेख)
कर्मों की गति से पार है योगी (लेख)
गहरे हैं कर्म के रहस्य (लेख)
संस्कारों के अनुरुप घटता है-कर्मफल भोग (लेख)
अनादि है वासनाएँ (लेख)
जानें वासना के कारणों को (लेख)
वासना कभी नष्ट नहीं होती (लेख)
पल-पल रुप बदलती है वासनाएँ (लेख)
वासना से उत्पन्न होती है अनन्त अनुभूतियाँ (लेख)
चित्त परिवर्तन से बदलती है अनुभूतियाँ (लेख)
प्रकृति से भिन्न है चित्त का अस्तित्त्व (लेख)
चित्त में समाहित मनोविज्ञान (लेख)
चित्त का स्वामी व ज्ञाता है पुरुष (लेख)
स्वप्रकाशित नहीं है चित्त (लेख)
एक समय में एक ही ज्ञान प्रकट होता है चित्त में (लेख)
सम्भव है चित्त से चित्त का ज्ञान (लेख)
चित्त नहीं चेतन पुरुष है हमारा स्वरुप (लेख)
जीवन के सब अर्थ समाये हैं चित्त में (लेख)
असंख्य वासनाओं का घर है चित्त (लेख)
आत्मभावना द्वार है अध्यात्म का (लेख)
विवेकज्ञान के उदय से प्राप्त होता है कैवल्य (लेख)
निर्लिप्त होता है योगी का जीवन (लेख)
विवेकज्ञान से सम्भव है संस्कारों का विनाश (लेख)
विवेक-वैराग्य का शिखर है-धर्ममेघ समाधि (लेख)
क्लेश-कर्म से रहित होता है-जीवनमुक्त्त योगी (लेख)
आवरण के हटते ही होता है-असीम ज्ञान (लेख)
कृतार्थ हो जाता है योगी का जीवन (लेख)
कैवल्य में थम जाता है-नये जीवन का क्रम (लेख)
स्वयं के स्वरुप में प्रतिष्ठित हो जाना है-कैवल्य (लेख)
उपसंहार (लेख)
Book Size Regular
Pages 144
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2016
Format 14x22 CM
Weight 0.155
Code H_SA_40

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