भक्तिगाथा (नारद भक्त्तिसूत्र का कथा भाष्य)

भक्तिगाथा (नारद भक्त्तिसूत्र का कथा भाष्य)

Author: Dr. Pranav Pandya Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINR0228 13875 Views In Stock (2)
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Hindi
देवर्षि नारद का आह्वान (लेख)
वासनाओं के भावनाओं में रुपांतरण की कथा (लेख)
पराम्बा के प्रति परमप्रेमरुपा है भक्ति (लेख)
भक्ति से व्यक्तित्व बन जाता है अमृत का निर्झर (लेख)
असंभव को संभव करती है भक्ति (लेख)
जिसे भक्ति मिल जाए, वो और क्या चाहे (लेख)
प्याली में सागर समाने जैसा है भक्ति का भाव (लेख)
भक्ति से होती है भावों की निर्मलता (लेख)
विकारों से मुक्त, भक्तों के आदर्श शुकदेव (लेख)
अनन्यता के पथ पर बढ़ चलें हम (लेख)
अन्य आश्रयों का त्याग ही है अनन्यता (लेख)
मर्यादाओं का रक्षक है भक्त (लेख)
शिवभक्त, परम बलिदानी दधीचि (लेख)
भक्त के लिए अनिवार्य हैं मर्यादाएँ और संयम (लेख)
भक्त का जीवन निर्द्धद्ध व सहज होता है (लेख)
भक्ति एक, लक्षण अनेक (लेख)
भगवान में अनुराग का नाम है भक्ति (लेख)
हरिकथ का श्रवण भी है भक्ति का ही रुप (लेख)
अविनाशी चैतन्य के प्रति समर्पण है भक्ति (लेख)
माँ-ये एक अक्षर ही है भक्ति का परम मंत्र (लेख)
प्रभु स्मरण,प्रभु समर्पण और प्रभु अर्पण का नाम है भक्ति (लेख)
भक्तों के वेश में रहते हैं भगवान (लेख)
अद़्भुत थी ब्रज गोपिकाओं की भक्ति (लेख)
गोपियों के कृष्ण प्रेम का मर्म (लेख)
भक्ति वही, जिसमें सारी चाहतें मिट जाएँ (लेख)
कर्म, ज्ञान और योग से भी श्रेष्ठ है भक्ति (लेख)
समस्त साधनाओं का सुफल है भक्ति (लेख)
अभिमानी से दूर हैं ईश्वर (लेख)
ज्ञान ही है भक्ति का साधन (लेख)
भक्ति और ज्ञान में विरोध कैसा (लेख)
भगवान को भावनाएँ अर्पित करने वाला कहलाता है भकत (लेख)
भक्तश्रेष्ठ अम्बरीश की गाथा (लेख)
महातृप्ति के समान है भक्ति का अनुभव (लेख)
जहाँ भक्ति है, वहाँ भगवान हैं (लेख)
महारास की रसमयता से प्रकट हुआ है भक्तिशास्त्र (लेख)
भक्तवत्सल भगवान के प्रिय भीष्म (लेख)
प्रभु के भजन का, स्मरण का क्रम अखण्ड बना रहे (लेख)
भक्ति के अपूर्व सोपान हैं-श्रवण और कीर्तन (लेख)
भगवत्कृपा के स्त्रोत हैं-भक्ति और भक्त (लेख)
दुर्लभ है महापुरुषों का संग (लेख)
प्रभुकृपा से ही मिलता है महापुरुषों का संग (लेख)
भगवान और भक्त में भेद कैसा (लेख)
भक्तों का संग है सर्वोच्च साधना (लेख)
सर्वथा त्याज्य है दुसंग (लेख)
उबारत है सत्संग (लेख)
कुसंग की तरंग बन जाती है महासमुद्र (लेख)
नारायण नाम का चमत्कार (लेख)
योग-क्षेम का त्यागी कहलाता है भक्त (लेख)
कर्मों का त्याग ही है सच्चा भक्ति (लेख)
भगवत्प्रेमी ही है सच्चा भक्त (लेख)
भक्त स्वयं तरता है और औरों को भी तारता है (लेख)
अनिर्वचनीय है प्रेम (लेख)
गूंगे का गुड़ है भक्ति (लेख)
एक शून्य निवेदन है भक्ति (लेख)
कामनाएँ,अपेक्षाएँ हों तो वहाँ प्रेम नहीं (लेख)
प्रेम से होती है प्रभु की पहचान (लेख)
तीनों गुणों को पार कर जाती है पराभक्ति (लेख)
भक्ति की श्रेष्ठतम अवस्था (लेख)
श्रेष्ठ ही नहीं,सुलभ भी है भक्ति (लेख)
भक्ति को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं (लेख)
शान्ति और परमानन्द का रुप है भक्ति (लेख)
भक्ति को लोकहानि की कैसी चिन्ता (लेख)
लोकव्यवहार की मर्यादाओं से जुड़ी है भक्ति (लेख)
भक्ति का आचारशास्त्र (लेख)
भक्त के लिए जरुरी है दंभ का त्याग (लेख)
दोषों को भी प्रभु को अर्पित करता है भक्त (लेख)
जिन प्रेम कियो तिनहिं प्रभु पायो (लेख)
अनन्य भक्ति ही श्रेष्ठतम है (लेख)
अनन्य भक्तों से पवित्र होती है पृथ्वी (लेख)
विलक्षण है अनन्य भक्तों की महिमा (लेख)
तन्मयता, तल्लीनता का नाम है भक्ति (लेख)
बड़ा व्यापक है भक्ति का प्रभाव (लेख)
भक्ति न जाती देखती है न कुल (लेख)
तुम भक्न के भक्त तुम्हारे (लेख)
बुद्धि से विशाल है भक्ति का आकाश (लेख)
वरेप्य है भक्ति, वंदनीय है भक्ति (लेख)
भक्तिशास्त्रों का मनन-भक्त की अनूठी साधना (लेख)
जो खोता है वही तो पाता है (लेख)
भगवान के योग्य बनने की गाथा है भक्ति (लेख)
भगवान पर सम्पूर्ण विश्वास है भक्ति (लेख)
हदय में जब उठती है तड़प, तब होता है कीर्तन (लेख)
तीनों कालों में भक्ति ही श्रेष्ठ है (लेख)
जब मैं था तब हरि नहीं,जब हरि है तब मैं नहीं (लेख)
परमात्मा से परम प्रेम है-भक्ति (लेख)
भक्तिसूत्रों का सूत्रपात (लेख)
Book Size Regular
Pages 328
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2015
Format 14x21.5 CM
Weight 0.32
Code H_KP_30

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