क्रांति घोष

क्रांति घोष

Author: Mangal Vijay Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINR0713 15852 Views In Stock (2)
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Hindi
आज ऐसी कृपा आप कर दीजिए (गीत)
जवानी उम्र की चेरी नहीं हैं राजरानी है (गीत)
नहीं ध्वंस ने रचे सृजन ने बड़े बड़े इतिहास (गीत)
बदलो अपनी चाल नया युग आने वाला है (गीत)
जब तक जाग नहीं जाती है प्राणों की तरुणाई (गीत)
जागो दीप शिखाओ (गीत)
जो महाप्राण के अंशधर बन गए (गीत)
चरम सीमा पर पापाचार समय है होने का तैयार (गीत)
ऐसा कुछ आया है परिवर्तन दशों दिशाएँ डोलने लगी (गीत)
शिव संकल्पो के सबल चरण जिस वक्त उठाए जाते है (गीत)
क्यों मोह है उन्हीं से जिनने हमें मिटाया (गीत)
आता हर वर्ष दशहरा (गीत)
संस्कृति का परिचय देती है संस्कारित तरुणाई (गीत)
साधना संघर्ष है आओ लड़ें (गीत)
शिक्षित और अशिक्षित में क्यों भेद किया जाता है (गीत)
स्वस्थ हों तन,मन हमारे,स्वस्थ हो पर्यावरण (गीत)
व्यक्ति हो परिवार हो गया या राष्ट्र हो (गीत)
गुटखा जो खा रहा है वह विष गुटका रहा है (गीत)
मिटा व्यक्ति को रही है दुष्प्रवृतियाँ (गीत)
चीत्कार कर उठी मनुजता नर के दंभ विकार से (गीत)
खा गया है बहुत से इतिहास पृष्ठों को अहं (गीत)
जनमत पका रहा श्रम साधन द्वारा प्रजातंत्र की रोटी (गीत)
प्रतिभाओं से ही संभव है गौरवमय इतिहास (गीत)
पैसों के पीछे दीवाने लक्ष्मी को पहिचान न पाए (गीत)
राष्ट्र के शरीर को बलिष्ठ प्राण चाहिए (गीत)
विगत दिनों युग के चेहेरे को (गीत)
बाढ़ आ रही सद्‌गुरुओं की (गीत)
कर न सकें जो गौ संवर्धन (गीत)
प्राण फूँकती निष्प्राणों में गीता ऐसा ज्ञान है (गीत)
आदमी तोबहुत हैं मगर आदमीयत मिलती नहीं (गीत)
जी सको जिन्दगी यूँ जिओ मुस्कराते हुए जी सको (गीत)
तरुणाई ने ली अँगडाइ विपदाओं की शामत आई (गीत)
फ़िज़ाओ अब न इतराओ शरारत बहुत खलती है (गीत)
जब-जब भी साहस के अर्जुन करते शर संधान (गीत)
हैं समस्याएँ सघन लेकिन न रोने का समय है (गीत)
मूर्तिमान हिन्दुत्व हुआ है मानव मूल्यों की माटी से (गीत)
चल पड़ी महाकाल की चाल (गीत)
प्राण झरनों के जैसा मचलते रहो (गीत)
शांतिकुंज है एक छावनी सैनिक ढाले जाते हैं (गीत)
बढ़ो सैनिक सृजन के अब करो निर्माण नवयुग का (गीत)
डट रहे हैं आप सीमा पर अकेले ही महीं (गीत)
आज युग पुकारता, जाग नौजवान रे (गीत)
अब भी रोक नहीं पाएँ हम यदि खर्चीली शादियाँ (गीत)
सोचे बिना कुरीति अपनाते चले गए (गीत)
चलो अश्लील चित्रों की हमें होली जलाना है (गीत)
जाग गई नारियाँ सावधान सावधान (गीत)
शान्तिकुंज से उठी क्रान्तियाँ (गीत)
हम अंधे-धृतराष्ट्र हुए तो, सब कुछ ही कम पड़ जाएगा (गीत)
संघर्ष जिन्दगी है लड़ना इसे पड़ेगा (गीत)
जिन्हें थामने युग पुरुष कर बढ़ाएँ (गीत)
जो करता है खून खराबा किसी धर्म से बहुत दूर है (गीत)
सुर संस्कृति विकृत करने का नित हो रहा प्रयास है (गीत)
परम पिता ने दिया स्वस्थ तन हमने क्या कर डाला (गीत)
कठिन समस्या बना दिया है जिसने कन्यादान को (गीत)
आग लगती है तो अंगारे सुलगते हैं (गीत)
परिवर्तन प्रक्रिया चल रही महाकाल की गति से (गीत)
संस्कृति अगर बचाना शालीनता बचाएँ (गीत)
देवियाँ देश की जाग जाएँ अगर (गीत)
तुम करो शील सौंदर्य की साधना (गीत)
जब-जब जाग उठी तरुणाई (गीत)
महाकाल की चाल कर रही परिवर्तन द्रुतगति से (गीत)
महाकाल की तरुणाई ने तरुणों को आहवान किया (गीत)
जूझने को अशिव से साहस जुटाना चाहिए (गीत)
नवयुग की किरणें फूट रहीं लालिमा क्षितिज पर छाई है (गीत)
क्रान्ति की जब घोषणाएँ हो गई हैं (गीत)
नवयुग के पदचाप सुनो अब बात न केवल परिवर्तन की (गीत)
त्यागेंगे भिख मंगापन अब त्यागेंगे (गीत)
अवमूल्यन हो चूका बहुत अब मानवीय आचार का (गीत)
टूट रही हैं मर्यादाएँ व्यक्ति और परिवार की (गीत)
अपना रुप निहारों री बहनो (गीत)
अमाँ उबरने लगी तिमिर से (गीत)
धरा अभावों ग्रसित गगन की (गीत)
कितना भी गहरा अधंकार हो जीवन में (गीत)
जब-जब भी प्रबुद्ध जन मानस बुद्धि भ्रष्ट होता है (गीत)
चोट संस्कृति पर निरन्तर हो रही है (गीत)
हो रहा है संस्कृति सीता हरण (गीत)
विभीषिकाएँ खड़ी हुई हैं अपना मुंह फैलाए (गीत)
संस्कृति सीता शोकाकुल हो तब बजरंगों का चुप रहना (गीत)
धर्मतंत्र में राजतंत्र में जब हो नैतिक ह्रास (गीत)
कवि तुम गाने लगे लोरियाँ कौन भैरवी राग सुनाए (गीत)
जिस समाज की क्षमताओं का आधा अंग शिथिल हो (गीत)
परिवर्तन के बिना न होता विभीषिका का नाश (गीत)
धक्का मुक्की करते सब ही अपने अपने दाँव में (गीत)
सबसे खून पसीना देकर सीचा जो उधान (गीत)
क्या हुआ तुम्हें अमृत वितरण करने वालो (गीत)
ध्वंस इन दिनों जुटा हुआ है अस्त्र शस्त्र निर्माण में (गीत)
देव संस्कृति विकल हुई फिर मानवता की पीर से (गीत)
जनसंख्या का भूत राष्ट्र के सिर पर चढ़ता जाता है (गीत)
संस्कृति पर आक्रमण चारों तरफ से हो रहा है (गीत)
सुरक्षा सैनिक खड़े सीमा सँभाले (गीत)
जन प्रतिनिधियो प्रजातंत्र को मत बदनाम करो (गीत)
अहंकार के पर्वत में है आग लगी विखराव की (गीत)
जो न होना चाहिए वह हो रहा है (गीत)
क्रान्तियों का दौर है बस क्रान्ति होनी चाहिए (गीत)
क्रान्ति होगी व्यक्ति जब तैयार होंगे (गीत)
जाग राष्ट्र की शक्ति स्वरुपा नारी शक्ति भवानी (गीत)
आँधी अब तूफान बन गई सावधान हो जाओ (गीत)
कालचक्र बढ़ता जाता है महाकाल की चाल से (गीत)
ध्वंस लीला ध्वंस ने अब तक रची है (गीत)
गूँगा बना दिया संस्कृति को पीड़ा व्यक्त न कर पाती है (गीत)
जागो भारत विश्व राष्ट्र की करना है अगवानी (गीत)
जो दिए वरदान हमको, आधुनिक-विज्ञान ने (गीत)
जब-जब भी प्रतिभा जागी है (गीत)
रुका नहीं तूफान साथियों रुका नहीं तूफान (गीत)
तुमुल घोष कर रही है सप्तक्रान्तियाँ (गीत)
जवानो निरर्थक जवानी नहीं है (गीत)
महाकाल के अब तो दोनों हाथ हुए तैयार (गीत)
नारी युग के लिए आधुनिक नारी में संतुलन (गीत)
महाकाल की महाक्रान्ति के भागीदार बनो (गीत)
वसंत आया जो केवल फूल कलियों में (गीत)
महाप्राण के अंशज होकर क्यों निष्प्राण कहाएँ (गीत)
हवा चल पड़ी युग निर्माणी (गीत)
उषा जैसा मुस्काती हैं बालाए इस देश की (गीत)
नादान सिंधु की धाराओं मत उछलो बाहार आने को (गीत)
युवाओ भार कंधों पर तुम्हें ही तो उठाना है (गीत)
महाक्रान्ति की हवा चल रही गीत जागरण गाती (गीत)
जब धधकते-प्रश्न, सन्मुख ही लगाए हो लड़ी (गीत)
साक्षरता अभियान नहीं है अंधकार से रण है (गीत)
पर्वो की गरिमा पहिचानो पर्वो से मत करो ठिठौली (गीत)
आक्रामक हुई हैं असुर शक्तियाँ (गीत)
दमक रहा दिनमान साथियो दमक रहा दिनमान (गीत)
असंभव को संभव महाकाल करता (गीत)
तूफानों से लोहा लेने प्राणों को उछाला जाता है (गीत)
Book Size Regular
Pages 152
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2007
Format 14x21 CM
Weight 0.18
Code H_GS_20

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