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प्रत्यक्षवादी मान्यताएँ भी सर्वथा सत्य कहाँ है?
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Author:
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AJH1973Jan_21
#प्रत्यक्ष
#मान्यता
#सर्वथा
प्रत्यक्षवादी मान्यताएँ भी सर्वथा सत्य कहाँ है? Document
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Topic Of Source Title
बसन्त पर्व अपने परिवार का सबसे बड़ा त्यौहार_AJH1973Jan
प्राज्ञा प्रत्यावर्तन का उद्देश्य और स्वरुप_AJH1973Feb
युग निर्माता की भूमिका हमें ही निभानी है_AJH1973Mar
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युगनिर्माण का शुभारम्भ आत्मनिर्माण से_AJH1973Oct
युगनिर्माण का दूसरा चरण परिवार निर्माण_AJH1973Nov
’समाज_निर्माण’ अपने कर्तव्य का तीसरा चरण_AJH1973Dec
अनुशासन सीखिये
भावनाएँ भक्तिमार्ग में नियोजित की जायें
उच्चस्तरीय अध्यात्म साधना के तीन चरण
अपनी आत्मा सर्वत्र बिखरी पड़ी हैं।
मनुष्य की तेजस्विता का अंतर्निहित स्रोत भंडार
मूर्ति पूजा का औचित्य
मनुष्य में अलौकिक क्षमतायें भरी पड़ी हैं।
समाज सेवा में परमार्थ ही नहीं स्वार्थ भी सन्निहित है।
महानता के साथ अवरोध भी जुड़े हुए हैं
आनुवांशिकी प्रगति में आत्मबल का प्रयोग करना होगा
भीड़ का नहीं- न्याय का राज्य चले
संगठन और सहयोग पर सृष्टि-व्यवस्था टिकी है।
हम आत्म गरिमा का अनुभव करे और किसी से न डरें
क्या हम जीवित है? क्या हम जीवितों जैसे काम करते है?
जिन्दगी जीनी हो तो इस तरह जिये
संगीत शब्द ब्रह्म की स्वर साधना
दीर्घायु और सरस जीवन की पगडंडी
वाणी सोच समझकर और विचार पूर्वक बोलें
स्वाध्याय और मनन मानसिक परिष्कार के दो साधन
कानून न्याय की आत्मा का हनन न करने पाये
प्रत्यक्षवादी मान्यताएँ भी सर्वथा सत्य कहाँ है?
धर्म को दिमागी बीमारी बताने वाली भ्रान्त मनोवृत्ति
मंत्रों की सफलता वाक् पर निर्भर है।
अपनों से अपनी बात-बसन्त पर्व अपने परिवार का सबसे बड़ा त्यौहार (लेख शृंखला)
तैरने वाले कहाँ हैं? (कविता)
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