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सन्तानों की संख्या बढ़ाना व्यक्ति और समाज के लिये घातक है।
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AJH1967Jan_14
#सन्तान
#व्यक्ति
#समाज
सन्तानों की संख्या बढ़ाना व्यक्ति और समाज के लिये घातक है। Document
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Topic Of Source Title
पाँच वर्ष तक हमें सहचर बनकर रहना है।_AJH1967Jan
मानव अभ्युदय का सच्चा अर्थ
आध्यात्मिक लाभ ही सर्वोपरि लाभ है।
मानव-जीवन और उसका महान प्रयोजन
सफलता का ही नहीं साधनों का भी ध्यान रखें।
मस्तिष्क को पक्षपात से दूर रखिये
जो कुछ करिये पहले उस पर विचार कीजिये।
व्यक्ति का मूल्याँकन करने में उतावली न करें।
आवश्यकताएँ बढ़ाकर दुःख-दारिद्र्य में न फँसें
आश्रम,धर्म और सन्तान सीमाबद्ध
हमारे साँस्कृतिक कार्यक्रम का स्वरूप क्या हो
भारत को ईसाई बनाने का षड़यन्त्र
भावनाशील व्यक्ति लोक निर्माण के लिए आगे आयें
विवाह का स्वरूप एक धार्मिक कृत्य जैसा रहे
सन्तानों की संख्या बढ़ाना व्यक्ति और समाज के लिये घातक है।
गायत्री महामंत्र के परम सामर्थ्य वान २४ अक्षर
अपनों से अपनी बात-पाँच वर्ष तक हमें सहचर बनकर रहना है।
आत्म कल्याण के लिए विचार ही नहीं कार्य भी आवश्यक हैं
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