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मनुष्य जीवन एक अनुपम अवसर
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR0360_191
Source:
दिव्य अनुभूतियाँ और दिव्य सन्देश (Book)
#मनुष्य
#जीवन
#अनुपम
#अवसर
मनुष्य जीवन एक अनुपम अवसर Document
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Topic Of Source Title
मानव जीवन की सार्थकता (लेख)
जिसे जीना आता है वह सच्चा कलाकार है (लेख)
जीवन का अर्थ (लेख)
मनुष्य तुच्छता को छोड़ें और महान बनें (लेख)
हम तुच्छ नहीं गौरवास्पद जीवन जियें (लेख)
जीने योग्य जीवन जिओ (लेख)
मानव जीवन का अनुपम सौभाग्य (लेख)
पथिक महान उद्देश्य को मत भूल (लेख)
उठो जागो, आत्मदर्शी बनो (लेख)
जीवन का महता समझें और उसका सदुपयोग करें (लेख)
दूसरों की व्यथा अपनी ही समझें (लेख)
जीवन का स्वरूप और अर्थ (लेख)
जीवन की सार्थकता (लेख)
ईश्वर का महान उपहार व्यर्थ न चला जाये (लेख)
मानव जीवन को सार्थक बनायें (लेख)
मनुष्य जीवन की श्रेष्ठता (लेख)
सत को त्यागकर असत क्यों अपनायें (लेख)
नाव न खेई जाय बिना मल्लाह के (लेख)
परमात्मा का स्वरूप विराट विश्व (लेख)
भगवान को बार-बार याद करो (लेख)
ईश्वर प्राप्ति कठिन नहीं सरल है (लेख)
विश्वात्मा ही परमात्मा (लेख)
अन्त:करण का प्रकाश ही जीवन को ज्योतिर्मय करता है (लेख)
परमात्मा अपने अन्त:करण में है (लेख)
मनुष्य परमात्मा का प्रखर प्रतिनिधि (लेख)
प्रेम और परमेश्वर (लेख)
अपने लिये नहीं ईश्वर के लिये जियें (लेख)
ईश्वरीय आदेश की उपेक्षा न करें (लेख)
परमात्म-प्रेम से सम्पन्न जीवन ही धन्य है (लेख)
परमात्मा का निराकार स्वरूप (लेख)
विश्व मानव के दर्शन कीजिये (लेख)
ईश्वर का सन्देश वाहक हमारा अन्त:करण (लेख)
अपने का पहचानो (लेख)
आत्मा की आवाज सुनो और उसका अनुसरण करो (लेख)
शक्ति स्त्रोत की सच्ची शोध (लेख)
जड़ें गहरी जानी चाहिए (लेख)
आत्मा एक है (लेख)
आन्तरिक सामर्थ्य ही साथ देगी (लेख)
आध्यात्मिकता की मुस्कान (लेख)
जीवन के हर प्रभात का स्वागत करिये (लेख)
प्रकाश की आवश्यकता हमें ही पूरी करनी होगी (लेख)
कर्मो की खेती (लेख)
मूल स्त्रोत का सम्बल (लेख)
प्रेम का अमृत चखो (लेख)
सच्ची व चिरस्थायी प्रगति के दो अवलम्बन (लेख)
मनुष्य अनन्त शक्ति का भाण्डागार है (लेख)
मुक्ति के लिये प्रयत्न (लेख)
ईश्वर की रचना निन्दनीय न ठहरे (लेख)
जीवन का अभिप्राय दिव्यप्रेम (लेख)
पाप की अवहेलना मत करो (लेख)
आत्म विश्वास और सफलता (लेख)
दु:ख की निवृत्ति ज्ञान से ही सम्भव (लेख)
जीवन की त्रिधारा (लेख)
अध्यात्मवाद का सार (लेख)
सच्चा शूरवीर मनुष्य (लेख)
साधना मार्ग के सहायक (लेख)
सच्चा आनन्द प्राप्त करने का मार्ग (लेख)
हमारी साधना का उद्देश्य (लेख)
वेदान्त का अर्थ-अकर्मण्यता नहीं (लेख)
दूषित अहंभाव (लेख)
हम जड़ नहीं गतिशील बनें (लेख)
मनुष्य के अच्छे बुरे कर्म ही उसके साथी (लेख)
निरन्तर देता है वह निर्वाध पाता है (लेख)
सबसे बड़ी सेवा (लेख)
देने से ही मिलता है (लेख)
बलमुपास्व बल की उपासना करो (लेख)
दु:ख निवृति का केवल एक ही मार्ग (लेख)
व्यक्ति-व्यक्ति जीवन सुन्दर बनाने में सहायता करे (लेख)
सत्य के लिए सर्वस्व त्याग (लेख)
तप से ही कल्याण होगा (लेख)
निस्वार्थ प्रेम (लेख)
देने से ही मिलेगा (लेख)
भगवान की कृपा या अकृपा (लेख)
अध्यात्म और प्रेम (लेख)
महात्मा महान आत्मा वाला पुरुष (लेख)
प्रार्थना आत्मा का सम्बल (लेख)
निकृष्टता नहीं उत्कृष्टता ही हमें प्रभावित कर सके (लेख)
आदर्शो की रक्षा (लेख)
सार्वभौमिक उपासना (लेख)
प्रेम और कृतज्ञता का सौन्दर्य (लेख)
हम पुरूष से पुरूषोत्तम बनें (लेख)
शान्ति तो अन्दर ही खोजनी पड़ती है (लेख)
सेवा करना इनसे सीखो (लेख)
शान्ति का सच्चा उपाय-परोपकार (लेख)
सेवा और प्रार्थना (लेख)
धर्म और धार्मिकता की कसौटी (लेख)
प्रार्थना ही नहीं पवित्रता भी (लेख)
आनन्द को कैद से निकालो (लेख)
धर्म प्रसार का प्रमुख आधार (लेख)
धर्म एक महासागर (लेख)
धर्म न तो अवैज्ञानिक है और न अनुपयोगी (लेख)
असत्य आचरण से विनाश ही होगा (लेख)
स्वर्ग प्राप्ति के लिए ऊँचा सोचें अच्छा करें (लेख)
आत्मविश्वास ही अटूट शक्ति (लेख)
पाने के लिये त्याग आवश्यक (लेख)
नीव अच्छी होनी चाहिए (लेख)
निर्माण और निर्वाण की जोड़ी (लेख)
हम वास्तविक बुद्धिमता अपनायें (लेख)
मानव अभ्युदय का सच्चा अर्थ (लेख)
ईश्वर की नहीं अपनी फिक्र करो (लेख)
कर्तव्य पालन का अविरल आनन्द (लेख)
क्या हमारे लिये यही उचित है (लेख)
अन्त:करण का परिष्कार करें (लेख)
आत्म त्याग ही सर्वोच्च धर्म (लेख)
जमाने के साथ बदलिये (लेख)
मनुष्य को मनुष्य बनाने वाला धर्म (लेख)
भिक्षुक का पश्चाताप (लेख)
विचारों का अवतार (लेख)
सच्ची आध्यात्मिकता (लेख)
सबसे पहले अध्यात्मवाद की शिक्षा प्राप्त कीजिए (लेख)
आत्मनिर्माण सबसे बड़ा पुण्य परमार्थ (लेख)
सत्य की अकूत शक्ति पर विश्वास कीजिए (लेख)
त्याग का अखंड नियम (लेख)
आचार और विचार की शुद्धि साधना (लेख)
साहित्य से बढ़कर मधुर और कुछ नहीं (लेख)
स्थिर स्वास्थ्य के लिये आत्म-नियंत्रण (लेख)
रोगों से पीछा कैसे छूटे (लेख)
दोषों को छिपाया न जाय (लेख)
प्रतिभा को बखेरिये मत (लेख)
साधको सावधान रहो (लेख)
प्रकाश की साधना (लेख)
विध्या की भूख और भावना (लेख)
सबसे बड़ी योग्यता और क्षमता (लेख)
साक्षात प्रेम स्वरूप (लेख)
आनन्दमय संसार (लेख)
सांसारिक लोगों की प्रकृति (लेख)
प्रार्थना जीवन का ध्रुवतारा है (लेख)
अपनी दुनियाँ आप बनावें (लेख)
प्रेम से कल्याण (लेख)
अपनी उलझनें आप सुलझावें (लेख)
प्रसन्नता साथ न छोड़े (लेख)
सुधार का श्रीगणेश (लेख)
दुष्ट और सज्जन की पहचान (लेख)
अधिकारों का दुरूपयोग न हो (लेख)
अभ्युदय सब का होना चाहिए (लेख)
साहसिकता का परिवर्तित रूप (लेख)
तिरस्कार किसी का न करें (लेख)
धन का सदुपयोग होता रहे (लेख)
माँगो मत पैदा करो (लेख)
सब के सुख में अपना सुख (लेख)
काँटे धन्यवाद (लेख)
विजय तुम्हारी ही होगी (लेख)
निकृष्ट और निर्जीव जिन्दगी भी क्या (लेख)
संघर्ष से श्रेष्ठता की उपलब्धि (लेख)
मनुष्य का भाग्य (लेख)
मनुष्य और शैतान (लेख)
अपना भाग्य आप बनायें (लेख)
सर्वतोन्मुखी विकास (लेख)
संकल्प कीजिये सफल हूजिये (लेख)
कर्मवीर का मार्ग कौन रोक सका है (लेख)
कहो कम करो ज्यादा (लेख)
कार्य कुशलता मनुष्य का गौरव (लेख)
केवल अपने लिये ही नहीं (लेख)
अभिमान का विषधर सर्प (लेख)
अन्धे होकर चलना ठीक नहीं (लेख)
कर्म-कर्म-कर्म (लेख)
हम सह्रदय बनें (लेख)
सामाजिक कर्तव्यों का पालन (लेख)
आत्म प्रेरणा की उपेक्षा न करें (लेख)
विचारों को कार्यान्वित कीजिए (लेख)
वाणी की नम्रता बोली में मिठास (लेख)
हम कठोर परिश्रम के आदी बनें (लेख)
बलिष्ठता बाहरी नहीं भीतरी (लेख)
संघर्ष आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है (लेख)
परिश्रम ही सच्चा देवता (लेख)
वीर दूसरों के लिये मरते हैं (लेख)
स्वार्थ का दुरूपयोग ही निन्दनीय (लेख)
विश्वास रखो और आगे बढ़ो (लेख)
जिन्दगी करीने के साथ जियें (लेख)
आत्मविश्वास पुरूषार्थ और सज्जनता (लेख)
मिलना ही सत्य है (लेख)
सफलता का राजमार्ग (लेख)
परिस्थितियों पर ही निर्भर न रहें (लेख)
तीन बड़े सत्य (लेख)
काम को टालिए मत (लेख)
विचारों की शक्ति (लेख)
शरीर को निष्क्रिय न बनावें (लेख)
संकल्प से सफलता (लेख)
बीज की तरह उगे सड़े नहीं (लेख)
सदाचरण सबसे बड़ा धन (लेख)
बढ़ो आगे बढ़ो (लेख)
तुम उठो तो सही (लेख)
जीवन की सफलता (लेख)
काम करो इसी में सुख है (लेख)
कायर का निस्तार नहीं (लेख)
आत्मविश्वास का अपार बल (लेख)
जीवन का आरम्भ और अन्त (लेख)
वीर बनो कायर नहीं (लेख)
भावनायें आपकी शत्रु है (लेख)
वासना उसका क्या करेगी (लेख)
मनुष्य जीवन एक अनुपम अवसर (लेख)
मनुष्य अपना निर्माण स्वयं करता है (लेख)
वास्तविक स्वावलम्बन की महता (लेख)
सदुश्द्देय के लिए अनवरत श्रम (लेख)
निरूत्साह एक अभिशाप (लेख)
मधुर वाणी बोलिए (लेख)
समस्यायें अनेक मत रखिए (लेख)
वाचलता की व्यर्थता (लेख)
साहसी का पराभव नहीं (लेख)
संकट के समय मानसिक सन्तुलन न खोये (लेख)
प्रेम का संसारव्यापी साम्राज्य (लेख)
मानसिक व्यभिचार से बचो (लेख)
आपका सहायक (लेख)
व्यक्तित्व की महिमा समझिए (लेख)
व्यक्तित्व को विकसित करें (लेख)
सफलता का राजमार्ग (लेख)
भौतिक पदार्थो की लालसा पतन करा देगी (लेख)
भाग्यवादी कायरता (लेख)
वह परम मंगल है (लेख)
ठहरना पर आराम के लिए नहीं (लेख)
अकर्मण्यता ही मृत्यु है (लेख)
उत्साह ही अनन्त शक्ति (लेख)
बढ़े चलो बढ़े चलो (लेख)
अकेलो चलो अकेले चलो (लेख)
उन्नति का मूल मन्त्र (लेख)
अन्ध परम्परायें नहीं चाहिए (लेख)
भूत को भूलिए-वर्तमान को देखिए (लेख)
हम अतिवादी न बनें (लेख)
जीवन उत्साही का (लेख)
सद्गुणों से ही यश श्री (लेख)
नरक में भी पुस्तकालय (लेख)
निराशा एक सामाजिक पाप (लेख)
निन्दा से डरिए मत (लेख)
मिथ्याचार और उसके दुष्परिणाम (लेख)
सज्जनता स्वाभाविक होनी चाहिए (लेख)
न अपमान करें न अत्याचार (लेख)
सामाजिक सुव्यवस्था का आधार (लेख)
धर्म की जय होती है (लेख)
निकम्मे साहित्य से दूर रहें (लेख)
सच्ची महानता की परख (लेख)
समन्वयात्मक दृष्टिकोण (लेख)
अक्षुण्ण बड़प्पन का आधार (लेख)
सुखी जीवन का मूल साधन धर्म (लेख)
वीरता ही उन्नति का मूलभूत कारण (लेख)
ईमानदारी संसार की सर्वोपरि विभूति (लेख)
मेल मिलाप की शक्ति (लेख)
उन्नति का मूल मन्त्र-काम (लेख)
उठो महान कार्य में लग जाओ (लेख)
विपति की आशका से घबराइए नहीं (लेख)
अपनी योग्यताओं का प्रमाण दीजिए (लेख)
आत्म विश्वास से महानता प्राप्त होती है (लेख)
बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए (लेख)
अपने दोष और दुर्गुणों को निकाल डालिये (लेख)
सुखी और समृद्ध बनने का मार्ग-परिश्रम (लेख)
मन में से भय की भावना निकाल फेंकिए (लेख)
पहले अपनी सेवा और सहायता करो (लेख)
समय का सदुपयोग कीजिए (लेख)
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