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वसुधैव कुटुंबकम्_हमारी गतिविधियों का मूल प्रयोजन_AJH1969Jun
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HAS_00023
#वसुधैव
#अपनों से अपनी बात
वसुधैव कुटुंबकम्_हमारी गतिविधियों का मूल प्रयोजन_AJH1969Jun Document
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Topic Of Source Title
वसुधैव कुटुंबकम्_हमारी गतिविधियों का मूल प्रयोजन_AJH1969Jun
विश्वात्मा ही परमात्मा
अहंकार की पराजय
ईश-प्रेम से परिपूर्ण और मधुर कुछ नहीं
वेदान्त की अपूर्व महनीयता- ‘एकोब्रह्म द्वितीयोनास्ति’
रोगों की जड़ शरीर, नहीं मन में
धार्मिक परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की सीमितता
महान् मानव जीवन का सदुपयोग
मनुष्य के अन्दर का रेडियो टेलीविजन
पूर्व ज्ञान केवल आत्म-चेतना के लिये सम्भव
हम आत्म-विश्वासी बनें-अपना भरोसा करें
मनुष्य ‘अमीबा’ से नहीं ईश्वर की इच्छा से बना है
भौतिक ही नहीं, आध्यात्मिक प्रगति भी आवश्यक हैं
मनुष्य मरने के बाद भी जिन्दा रहता है
हमारी महत्वाकाँक्षायें-निकृष्ट न हो
चन्द्रमा देवता-कुल ६९ मील दूर
क्रूरता-मानवता पर महान् कलंक
ग्रह नक्षत्रों की गतिविधियाँ हमें प्रभावित करती हैं
निराशा का अभिशाप-परिताप
एटम बमों की मार से हमें यज्ञ बचाते हैं
अहंकार अपने ही विनाश का एक कारण
कथा:- पूजा का मर्म
अपनों से अपनी बात-वसुधैव कुटुंबकम्- हमारी गतिविधियों का मूल प्रयोजन (लेख शृंखला)
यज्ञ-कुराड जागो आहुति लो (कविता)
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