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जो अनुचित है उससे सहमत न हों
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR0866_34
Source:
नैतिक शिक्षा भाग ३ (Book)
#अनुचित
#सहमत
जो अनुचित है उससे सहमत न हों Document
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Topic Of Source Title
आस्तिकता एवं उपासना का प्रयोजनो प्रतिफल (लेख)
देववाद और पूजा उर्चा का महत्व (लेख)
जीवन का लक्ष्य समझें और उसे प्राप्त करने का प्रयत्न करें (लेख)
स्वर्ग और मुक्ति का आनन्द इसी जीवन में संभव है (लेख)
कर्मफल आज नहीं तो कल भोगना ही पड़ेगा (लेख)
दुष्कर्मो के दण्ड से प्रायश्चित ही छुडा सकेगा (लेख)
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ज्ञानयोग,कर्मयोग,भक्तियोग की महान् साधना (लेख)
आध्यात्मिक जीवन के पाँच कदम (लेख)
हर दिन को एक नया जन्म मानो (लेख)
स्वाध्याय दैनिक जीवन की अनिवार्यता आवश्यकता (लेख)
अपना महत्व समझें और अपने को सुधारें (लेख)
कर्तव्य परायणता मानव जीवन की आधार शिला (लेख)
असत्य व्यवहार सद्भाव एवं सामाजिकता पर आघात (लेख)
बेईमानी का नहीं ईमानदारी का मार्ग अपनायें (लेख)
हँसती हँसाती जिन्दगी ही सार्थक है (लेख)
अपना ही नहीं कुछ समाज का भी हित साधन करें (लेख)
सज्जनता व मधुर व्यवहार मनुष्यता की पहली शर्त (लेख)
साहस जुटायें औचित्य अपनायें (लेख)
आलस्य त्यागें सुसम्पन्न बनें (लेख)
समय का सदुपयोग सफलता के लिए अमोघ साधन है (लेख)
अवरोध हमें अधीर न बनाने पाये (लेख)
आवेशग्रस्त न हों शानि और विवेक से काम लें (लेख)
विचार शक्ति का महत्व समझें और सदुपयोग करें (लेख)
आरोग्य रक्षा के लिए श्रम संतुलन आवश्यक है (लेख)
स्वास्थ्य रक्षा के लिए प्रकृति का अनुसरण आवश्यक है (लेख)
आहार और विहार का असंयम न बरतें (लेख)
संयम बरतें सुखी रहें (लेख)
हम अस्वच्छ न रहें धृणित न बने (लेख)
ढलती आयु का उपयोग इस तरह करें (लेख)
अनीति से सतर्क रहें अन्याय को रोकें (लेख)
जो अनुचित है उससे सहमत न हों (लेख)
औचित्य की प्रशंसा और अनौचित्य की भर्त्सना की जाय (लेख)
सुव्यवस्था ही परिवारों को सुविकसित करेगी (लेख)
दाम्पत्य जीवन एक आध्यात्मिक योग साधना (लेख)
पतिव्रत ही नहीं पत्नीव्रत भी निभाया जाय (लेख)
संयुक्त परिवार प्रणाली एक श्रेयस्कर परम्परा (लेख)
संतान कितनी व क्यों पैदा करें (लेख)
सुसंस्कृत संतान के लिए पूर्व तैयारी आवश्यकता (लेख)
बालकों को जन्म ही न दें उनका निर्माण भी करें (लेख)
संतान को स्वावलम्बी भर बनाना ही पर्याप्त है (लेख)
पर्दा प्रथा नारी के साथ बरती जाने वाली नृशंस अनीति (लेख)
अपव्यय और फैशन परस्ती एक ओछापन (लेख)
धन का उपार्जन ही नहीं सदुपयोग का भी ध्यान रहे (लेख)
अपव्यय एक पाई का भी न करें (लेख)
जेवरों का भौंडा फैशन हर दृष्टि से हानिकारक (लेख)
मांस मनुष्यता को त्याग कर ही खाया जा सकता है (लेख)
तमाखू का दुर्व्यसन छोड़ा ही जाना चाहिए (लेख)
देश भक्त नव निर्माण के कार्य में जुट जाये (लेख)
सच्चे नागरिक बनें और समाज में स्वस्थ परंपरा डालें (लेख)
व्यक्तिगत स्वार्थ भी सामाजिक सुव्यवस्था पर निर्भर है (लेख)
प्रौंढ़ शिक्षा युग की अनुपेक्षणीय मांग (लेख)
स्वास्थ्य शिक्षा समाज की एक महती आवश्यकता (लेख)
अध्यापक अपने महान पद का उत्तरदायित्व निबाहें (लेख)
छात्र अपने भविष्य का निर्माण आप करें (लेख)
नवयुवक सज्जनता और शालीनता सीखें (लेख)
उदार सहकारिता से हमारी उलझनें सुलझेंगी (लेख)
प्रगति के लिए श्रम सम्मान एवं गृह उधोगों की आवश्यकता (लेख)
अन्न संकट की चुनौती का सामना कैसे करें (लेख)
शाक हमारी खाद्य समस्या का हल करेंगे (लेख)
वृक्षारोपण और संवर्धन एक अति आवश्यक कार्य (लेख)
तुलसी हमारे हर घर में शोभायमान रहे (लेख)
गौ संरक्षण हमारी एक महती आवश्यकता (लेख)
अधिकार गौण और कर्तव्य प्रधान माना जाय (लेख)
वोटरों की सतर्कता पर प्रजातंत्र का भविष्य निर्भर है (लेख)
प्रबुद्ध नारी महिला जागरण की कमान संभालें (लेख)
नारी उत्कर्ष के लिए विशेष प्रयत्न किये जायें (लेख)
उँच नीच की मान्यता अन्यामूलक है (लेख)
अश्लीलता की बाढ़ हमें पतित क्यों बना रही है (लेख)
भिक्षा वृति का व्यवसाय न रहने दें (लेख)
मृतक भोज भी अविवेक पूर्ण न हों (लेख)
भूत पलीत और उद्भिज देवी देवताओं का जंजाल (लेख)
पशुबलि भारतीय धर्म पर एक कलंक (लेख)
प्राणियों के प्रति निर्मम और निष्ठुर न बनें (लेख)
विवाहों के आदर्श उँचे रखे जायें (लेख)
बाल विवाह एक अति घातक कुप्रथा (लेख)
खर्चीली शादियाँ हमें बेईमान और दरिद्र बनाती है (लेख)
बेटे वाले व्यर्थ ही घाटा और बदनामी न उठायें (लेख)
उच्च शिक्षित कन्या की विवाह समस्या का समाधान (लेख)
विधुर तथा विधवायें समान न्याय के अधिकारी (लेख)
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साधु ब्राह्मण अपना कर्तव्य और दायित्व समझें (लेख)
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