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फिर अपने गावों को हम
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Author:
NA
Code:
HINR1656_14
Source:
युग शिल्पी संगीत (Book)
#फिर
#गाव
फिर अपने गावों को हम Document
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Topic Of Source Title
एक मासीय ढपली कोर्स (गीत)
ऐसा कोई सुमन नहीं है जो ना खिला इस धरती पर (गीत)
उठो सुनो प्राची से उगते सूरज की आवाज (गीत)
चलना सिखा दिया है जलना है जलना सिखा दिया है (गीत)
युग की यही पुकार बसन्ती चोला रंग डालो (गीत)
ज्योति से ज्योति जगाओ (गीत)
मनुज देवता बने (गीत)
हे गायत्री माता तेरी (गीत)
माँ तेरे चरणों में हम (गीत)
हमने आंगन नहीं बुहारा (गीत)
हमको अपनी भारत की मिट्टी (गीत)
फिर से संस्कार परिपाटी (गीत)
घर घर अलख जगायेंगे (गीत)
फिर अपने गावों को हम (गीत)
होता है सारे विश्व का कल्याण (गीत)
शुभ ज्योति के पुंज (गीत)
यज्ञ रुप प्रभो हमारे (गीत)
नर से नारायण बन जायें (गीत)
जय अम्बे जय जगदम्बे (गीत)
जीवन बड़ा महान भाइयो जीवन बड़ा महान् (गीत)
एक तुम्ही आधार सद्गुरु (गीत)
स्वयं भगवान हमारे गुरु (गीत)
माँ जैसे भी हैं हम पर पूत तुम्हारे हैं (गीत)
नटवर नागर नन्दा भजो रे मन गोविन्दा (गीत)
चन्दन सी इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है (गीत)
तुम्हे जन्म दिन की बधाई बधाई (गीत)
सावधान हो जाओ नवयुग आता है (गीत)
घर घर में निराली ज्योत जले (गीत)
दुनियाँ आगे बढ़ती जाये रहे क्यों पीछे नारी रे (गीत)
इस दहेज ने ही फैलाया भारी अत्याचार है (गीत)
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