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समय दान की श्रद्धाज्जलियाँ ’प्रव्रज्या’ के लिए_AJH1978Oct
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HAS_00123
#श्रद्धाज्जलियाँ
#अपनों से अपनी बात
समय दान की श्रद्धाज्जलियाँ ’प्रव्रज्या’ के लिए_AJH1978Oct Document
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Topic Of Source Title
समय दान की श्रद्धाज्जलियाँ ’प्रव्रज्या’ के लिए_AJH1978Oct
वैभव की जड़ें अन्तरंग की गहराई में धँसी होती हैं।
आत्म ज्ञान से कल्याण
भगवान बुद्ध-उनका मार्ग और व्यक्तित्व
मानवी सामर्थ्य और प्रकृति से भी बृहत्तर शक्ति!
आत्म-परिष्कार की तीन सरल किन्तु महान साधनाएँ
विषया शक्ति के मायावी घेरे
विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय सन्निकट
विस्तार को नहीं स्तर को महत्व दिया जाय।
इस संसार में रहस्य कुछ नहीं,सर्वत्र नियम और व्यवस्था ही है।
प्रेम मानव जीवन की सर्वोपरि सम्पदा
समर्थक सहयोगी का पातक
स्मरण शक्ति प्रयत्न पूर्वक बढ़ाई भी जा सकती है।
समय और साधनों की अस्त-व्यस्तता पर भी ध्यान दें।
दान की महिमा और भिक्षा की गरिमा
कर्मफल का प्रारब्ध में भुगतान
अनुत्तरित प्रश्न सटीक समाधान
विलुप्त जीव ही नहीं, मनुष्य भी होगा
अवांछनीयता को अस्वीकार कर दें
विग्रहों का कुचक्र और उसका निराकरण
प्रभावी प्रशिक्षण के लिये उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता
संयम बनाम समर्थता बनाम सुनिश्चित जीवन
अपनों से अपनी बात-समय दान की श्रद्धाज्जलियाँ ’प्रव्रज्या’ के लिए (लेख शृंखला)
मौन-भंग (कविता) (कविता)
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