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रजत जयन्ती वर्ष में 24 गायत्री तीर्थों की स्थापना_AJH1979Mar
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HAS_00127
#गायत्री
#अपनों से अपनी बात
रजत जयन्ती वर्ष में 24 गायत्री तीर्थों की स्थापना_AJH1979Mar Document
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Topic Of Source Title
रजत जयन्ती वर्ष में 24 गायत्री तीर्थों की स्थापना_AJH1979Mar
प्रार्थना जीवन अमृत
सब काल के आधीन ....
नास्तिकता सबसे बड़ा अन्ध विश्वास है!
मनुष्य अपनी मौलिक विशेषताएं लेकर ही आया
असन्तोष का कारण अनुपयुक्त आकाँक्षाऐं
स्थूल प्रकृति भी विलक्षण कौतुकमय
आत्म चेतना का प्रबल आकर्षण बल
निरंकुश भोगवाद अपराधी प्रवृत्तियों को बढ़ाता है।
घटनाओं का स्वरूप घटने से पहले ही बन जाता है।
उसे खोजा होता
जो मौत से लड़े और अन्ततः विजयी हुए
प्रकृति के आँगन में ब्रह्म विद्या के पाठ
जीव-जन्तु मनुष्य से कम सम्वेदनशील नहीं
समस्त विग्रह और क्लेशों का मूल अहंकार
सदाचरण में दीर्घ जीवन की प्राप्ति
पितरों के प्रति कृतज्ञ रहें।
कलि का प्रभाव क्षेत्र
विलुप्त सभ्यता के पुनरोदय की सम्भावना
सर्व सुलभ बेहद सस्ता पौष्टिक भोजन
श्रम स्वेदों की गंगा
अद्भुत इमारतें और रहस्यमय सुरंग
अजीब लोग और उनके विचित्र संकल्प
मनोबल गिराने वाले आक्रमणों से रक्षा!
अपनों से अपनी बात-रजत जयन्ती वर्ष में 24 गायत्री तीर्थों की स्थापना (लेख शृंखला)
अंशदान
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