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समय की विषमता और जीवन्तों का उत्तरदायित्व_AJH1980Aug
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HAS_00134
#जीवन्तों
#अपनों से अपनी बात
समय की विषमता और जीवन्तों का उत्तरदायित्व_AJH1980Aug Document
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Topic Of Source Title
समय की विषमता और जीवन्तों का उत्तरदायित्व_AJH1980Aug
देवत्व पर विजय
यात्रा शून्यनगर से भविष्यनगर की
यह अलभ्य अवसर यों हीन चला जाय
कृतज्ञ नहीं, वह मनुष्य नहीं
आत्मिक प्रगति का मूल आधार-श्रद्धा
सारी पृथ्वी साबुन न बन जाये
संकटों के निराकरण में आस्तिकता का योगदान
अविज्ञात सृष्टि के अविज्ञात रहस्य
प्रकृति का गला न घोट दिया जाय
शरीराणि विहाय जीर्णानि अन्यानि संयाति नवानि देही
तात्कालिक नहीं दूरवर्ती हितों को प्रश्रय मिले।
दोष मत दीजिये “कैच” ठीक करिये
ग्रहों के प्रभाव का लाभ उठायें
यंत्र मानवों की गुलामी के लिए तैयार रहें
शिक्षा का आदर्श क्या होना चाहिए?
परम्पराएँ नहीं उनकी प्रासंगिकता महत्वपूर्ण है
भोजन ही नहीं शोधन भी
तीसरे विश्व युद्ध की सर्वनाशी विभीषिका
मृत्यु पर्यन्त चिरयुवा कैसे रहे?
वृद्धावस्था अर्थात अमृत-आनन्द
अपनों से अपनी बात-समय की विषमता और जीवन्तों का उत्तरदायित्व (लेख शृंखला)
गायत्री चरण पीठे ओर नव सृजन की सम्भावनाएँ
स्वर गूँजे निर्माण के (कविता)
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