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स्वार्थ ही न सोचते रहें- परमार्थ का भी ध्यान रखें।
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AJH1968Feb_12
#स्वार्थ
#परमार्थ
#ध्यान
स्वार्थ ही न सोचते रहें- परमार्थ का भी ध्यान रखें। Document
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Topic Of Source Title
यह बसन्तोत्सव ४० दिन तक जारी रखा जाय_AJH1968Feb
हम तुच्छ नहीं, गौरवास्पद जीवन जियें
उपासना- अर्थात परमात्मा की समीपता
प्रेम- संसार का सर्वोपरि आकर्षण
आत्मा की पुकार सुनें और उसे सार्थक करें
सहानुभूति- आत्मा का प्रबल प्यास
श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती है।
केवल अपने लिये ही न जियें
समय जरा भी बर्बाद न कीजिए।
सुसंस्कृत परिवार का निर्माण कैसे हो?
सर्वोत्कृष्ट परमार्थ- ज्ञान-यज्ञ
मनोरंजन-मानव जीवन की महती आवश्यकता
स्वार्थ ही न सोचते रहें- परमार्थ का भी ध्यान रखें।
अगले दुर्दिन और सम्भावित विभीषिकाऎं
अपनों से अपनी बात-यह बसन्तोत्सव ४० दिन तक जारी रखा जाय (लेख शृंखला)
प्रभात की प्रार्थना (कविता)
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