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स्वार्थपरता व्यक्ति और समाज के लिए भयंकर विपत्ति है
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AJH1969FEB_12
#स्वार्थ
#समाज
#विपत्ति
स्वार्थपरता व्यक्ति और समाज के लिए भयंकर विपत्ति है Document
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Topic Of Source Title
विदाई की घड़ियां और हमारी व्यथा_वेदना_AJH1969Feb
सेवा और प्रार्थना
आत्म-बल जीवन की महानतम सम्पदा
“बिन्दु में सिन्धु समाया”
नास्तिक दर्शन पर वैज्ञानिक आक्रमण
हमारी आध्यात्मिक जिज्ञासा और आकांक्षा
आत्मा का अस्तित्व-सत्य और तथ्य
सद्विचारों की समग्र साधना
आत्म-तेजो बलम्-बलम्
ब्रह्मचर्य द्वारा आत्म बल का संचय
आत्मा के अस्तित्व का प्रमाण-भूत
पुरुषार्थी ही पुरस्कारों के अधिकारी
स्वार्थपरता व्यक्ति और समाज के लिए भयंकर विपत्ति है
परलोक और पृथ्वी-कितने दूर कितने पास
जीव-कोषों के मन और मानसोपचार
मन को दुर्बल न बनने दें
स्वप्न और मनुष्य जीवन की गहराई
माँसाहार मानवता का अपमान
कोलाहल से दूर शान्त एकान्त की ओर
जीव जन्तुओं का आध्यात्मिक चेतना
गायत्री साधना-गायत्री उपासना की रहस्यमयी प्रतिक्रिया
अपनों से अपनी बात-विदाई की घड़ियां और हमारी व्यथा-वेदना (लेख शृंखला)
सच्चा-जीवन (कविता)
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