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मानवी काया काँच की नहीं-अष्ट धातु से बनी है।
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AJH1972Mar_5
#मानवी
#काया
#धातु
मानवी काया काँच की नहीं-अष्ट धातु से बनी है। Document
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Topic Of Source Title
गुरुदेव सम्बन्धी कुछ ध्यान रखने योग्य ज्ञातव्य_AJH1972Mar
संकीर्णता के सीमा बन्धन से छुटकारा पायें
ललचा मत-आगे बढ़
क्या मैं शरीर ही हूँ-उससे भिन्न नहीं?
प्रेम में न शिकायत की गुंजाइश है, न असफलता की
मानवी काया काँच की नहीं-अष्ट धातु से बनी है।
युग परिवर्तन को असम्भव न माना जाय
पंचशील
अनास्था हमें प्रेत-पिशाच बना देगी
शारीरिक विद्युत और उसका अद्भुत उपयोग
हरीतिमा और सूर्य किरणों में जीवन तत्व
भूतकालीन प्रतिपादनों के लिए दुराग्रह न करें
समाज का ऋण चुकाना ही श्रेयस्कर
मृतात्माओं का संपर्क सान्निध्य-एक तथ्य
श्रवणशक्ति की दिव्य क्षमता और उसका विकास
अपने दोषों को स्वीकारें और सुधारें
चुम्बकत्व व्यक्ति और विश्व का आधार
हम अन्य प्राणियों को भी बौद्धिक उत्कर्ष में सहयोग प्रदान करें
श्री रामकृष्ण परमहंस की सारगर्भित शिक्षायें
शिक्षा ही नहीं विद्या भी परिष्कृत की जाय
साधुवेश की मर्यादा
हवा में महल और आधी रात में सूर्य
तितिक्षा ही हमें सुदृढ़ बनाती है।
कुण्डलिनी दो शक्तिशाली ध्रुव केन्द्रों की अधिष्ठात्री
अपनों से अपनी बात-गुरुदेव सम्बन्धी कुछ ध्यान रखने योग्य ज्ञातव्य (लेख शृंखला)
उगते सूरज की आवाज (कविता) (कविता)
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