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मृत्यु भी जिससे हार मान गई
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR0315_14
Source:
देखने में छोटे लगें घाव करें गंभीर भाग ३ (Book)
#मृत्यु
#हार
मृत्यु भी जिससे हार मान गई Document
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Topic Of Source Title
दुर्बुद्धि भस्मासुर इस तरह जल मरा (महान व्यक्तित्व)
नहुष का मनोविकार उसके पतन का कारण बना (महान व्यक्तित्व)
भूल देवताओं के लिए भी क्षम्य नहीं (महान व्यक्तित्व)
बड़ों की दुष्प्रवृतियाँ ही सामाजिक पतन का मूल कारण (महान व्यक्तित्व)
तन ही नहीं मन भी निर्मल हो (महान व्यक्तित्व)
शक्तिशाली पापी भी अंत में मारा ही जाता है (महान व्यक्तित्व)
पुण्य परमार्थ में पाप की अपेक्षा अधिक शक्ति होती है (महान व्यक्तित्व)
इस पंचभौतिक शरीर से आसक्ति क्यों (महान व्यक्तित्व)
निस्वार्थता स्वार्थाधों को भी प्रभावित करती है (महान व्यक्तित्व)
तो फिर आप यहाँ क्या कर रहे हैं (महान व्यक्तित्व)
मनोबल हो तो कुछ भी असंभव नहीं (महान व्यक्तित्व)
मेरी आत्मा की पवित्रता मुझे स्वर्ग ले जाएगी (महान व्यक्तित्व)
निर्धनता में पल भी धन के प्रति आकर्षण नहीं (महान व्यक्तित्व)
मृत्यु भी जिससे हार मान गई (महान व्यक्तित्व)
अभिमान बातों से नहीं क्रियाओं से व्यक्त होता है (महान व्यक्तित्व)
आत्मबल हो तो मौत को भी ललकारा जा सकता है (महान व्यक्तित्व)
शंकर और दधीचि की परम्परा जीवित है (महान व्यक्तित्व)
वफादारी और ईमानदारी तो मनुष्य का धर्म है (महान व्यक्तित्व)
प्रगाढ़ प्रेम जिसमें साहस और संतुलन भी जुड़ा रहा (महान व्यक्तित्व)
बदला तो फिर ऎसा बदला (महान व्यक्तित्व)
श्रम देवता की आराधना ही जीवन की सच्ची साधना है (महान व्यक्तित्व)
प्रगति का मार्ग सबके लिए खुला (महान व्यक्तित्व)
जीवन विध्या के आचार्य (महान व्यक्तित्व)
श्रेष्ठ कार्य के लिए मुहूर्त की क्या आवश्यकता (महान व्यक्तित्व)
वह नहीं जानता कि खुदा ने उसे क्यों पैदा किया (महान व्यक्तित्व)
मरने पर केवल लुकारी ही मिलेगी (महान व्यक्तित्व)
प्रोत्साहन के अनुपम चमत्कार (महान व्यक्तित्व)
हिन्दू समाज की संकीर्णता का ऎसा भयावह दुष्परिणाम (महान व्यक्तित्व)
अंधे तैराकों ने इंगलिश चैनल पार की (महान व्यक्तित्व)
सही अर्थों में ब्राह्मण जीवन (महान व्यक्तित्व)
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