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अपनों से अपनी बात-समय की चुनौती हमें स्वीकार करनी ही होगी
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AJH1974Dec_25
#समय
#चुनौती
#स्वीकार
अपनों से अपनी बात-समय की चुनौती हमें स्वीकार करनी ही होगी Document
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Topic Of Source Title
समय की चुनौती हमें स्वीकार करनी ही होगी_AJH1974Dec
अनन्त संभावनाओं से युक्त मानवी सत्ता
प्रगति पथ पर हमारे चरण रुकें क्यों?
मनुष्य जीवन का प्रयोजन और आनन्द
संकट ग्रस्त भविष्य और उसका समाधान
मानवी विद्युत शक्ति की गरिमा और उपयोगिता
एकता के साथ लक्ष्मी का गठबन्धन
व्यक्तित्व की जड़ सींचने के लिए योग एवं तप की आवश्यकता
काश,हमारा व्यक्तित्व भी समुद्र जैसा गरिमायुक्त होता
जिसने अकेले ही नाव खेकर समुद्र पार किया
शरीर के साथ मृतात्मा का सम्बन्ध
अन्धविश्वास का फतवा देने में उतावली न की जाय
अकाल मृत्यु के मुँह में हमीं घुस पड़ते हैं
प्रत्युपकार की आशा से उपकार न करें
लिप्सा और लालसाओं को सीमित्त,संयमित रखाजाय
बहुपत्नी और बहुपति प्रथा के समर्थन में अजीब तर्क
क्रिया का स्वरूप नहीं उद्देश्य देखा जाय
इस विषपान से बचने में ही भलाई है
संकल्प और पुरुषार्थ का समन्वय असम्भव को सम्भव बनाता है
विवशता का सदाचरण रेती का महल
सन्तुलित आहार किस स्तर का हो?
रोग के साथ रोगी को भी मार डालना उचित न होगा
संघर्ष ही जीवन है और प्रमाद ही मरण
इस उच्छृंखलता के कान कल परसों पकड़े ही जाने वाले हैं
दीर्घ जीवन की रहस्यमय कुँजी
अपनों से अपनी बात-समय की चुनौती हमें स्वीकार करनी ही होगी (लेख शृंखला)
अखण्ड-ज्योति सदस्यों को अति आवश्यक सूचनाएँ
हार गीत
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