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चल तू चलता रह एकाकी
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AJH1975Jan_1
#चल
#एकाकी
#
चल तू चलता रह एकाकी Document
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Topic Of Source Title
नये वर्ष का नये प्रयास के लिए आमन्रण_AJH1975Jan
चल तू चलता रह एकाकी
शरीर का ही नहीं आत्मा का भी ध्यान रखें
प्रेम के अभाव ने ही हमें प्रेत पिशाच बनाया है
जीवन जड़ तत्त्वों का उत्पादन नहीं है
विज्ञान का उपनयन संस्कार कराया जाय
शरीर और मन का संचालन करने वाली जीवसत्ता
भ्रमजाल से छूटें-माया मुक्त हों
यहाँ सब कुछ चल रहा है अचल कुछ भी नहीं
चला-चली की दुनियाँ में अविचल की प्राप्ति करें
जिन्दगी को कलात्मक दृष्टि से जिया जाय
सदुद्देश्य के साथ सतर्कता भी आवश्यक है
मृतात्मा की सत्ता और क्षमता
अपनी पृथ्वी तक के बारे में हम कितना कुछ जानते हैं
सफलता प्राप्त करने के लिये अभीष्ट योग्यता सम्पादित करें
निरीक्षण और नियंत्रण आदतों का भी करें
प्रगति के जोश में हम विकृति के गर्त में न डूब मरें
परिवार संस्था को टूटने से बचाया जाय
स्वस्थ और दीर्घ जीवी रहना अति सरल है यदि………..
शक्ति का उपार्जन ही नहीं सदुपयोग भी
सुख की अपेक्षा आनन्द पाना श्रेष्ठ भी है और सरल भी
भाग्यवाद अहितकर भी और अवास्तविक भी
सूक्ष्म शक्ति की साक्षी-होम्योपैथी
आधि-व्याधियों के आक्रमण और उसका बचाव
अपनों से अपनी बात-नये वर्ष का नये प्रयास के लिए आमंत्रण (लेख शृंखला)
मैं आश्रित तुम आश्रयदाता-गीत
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