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परिवर्तन विश्व का होना है
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR1098_32
Source:
ऋषियुग्म का उद्बोधन (Book)
#परिवर्तन
परिवर्तन विश्व का होना है Document
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Topic Of Source Title
गुण-कर्म-स्वभाव में सामंजस्य हो (लेख)
आस्तिकतापूर्ण अध्यात्मवाद से ही सुख-शांति संभव (लेख)
प्रेम ही सर्वस्व है (लेख)
पूज्य गुरुदेव के महान कर्तव्यों को पूरा करें (लेख)
यज्ञीय जीवन अपनाया जाय (लेख)
विचार क्रांति के लिए भागीरथ प्रयत्न अपेक्षित है (लेख)
हम नहीं, हमारा मिशन ही सर्वोपरि है (लेख)
विचार क्रांति नव निर्माण का अनिवार्य कदम है (लेख)
पुराने परिजन अब तो जागें (लेख)
स्वतंत्र विवेक के आधार पर आत्म निर्माण करें (लेख)
आत्मा की उत्कृष्टता ही सबसे बड़ी सिद्धि है (लेख)
उत्कृष्टता और आदर्शवादिता को अपनाएँ (लेख)
अपना स्तर ऊँचा उठाएँ (लेख)
ज्ञान यज्ञ नवयुग का मंगलाचरण है (लेख)
सुअवसर को हाथ से न जाने दें (लेख)
ज्ञान यज्ञ की चिनगारियाँ विश्व को प्रज्ज्वलित करेंगी (लेख)
ज्ञान यज्ञ का प्रथम चरण प्रचार और दूसरा परिवर्तन है (लेख)
जीवन बहुमूल्य है, उसे व्यर्थ न गँवाएँ (लेख)
लेखन-प्रवचन हमारा व्यवसाय नहीं (लेख)
आध्यात्मिकता एवं तप की शक्ति (लेख)
अपने तौर-तरीके बदलें (लेख)
युग परिवर्तन के लिए चाहिए आंतरिक प्रखरता (लेख)
अध्यात्म विज्ञान की कसौटी पर (लेख)
जागरुक आत्माओं का विशेष कर्तव्य (लेख)
आत्मनिर्माण से होगा युग निर्माण (लेख)
प्रतिभा की पुकार (लेख)
नवयुग का अवतरण सुनिश्चित (लेख)
आत्मशक्ति का उद़्भव (लेख)
आत्मदेव ही महादेव (लेख)
प्रतिकूलता देखकर संतुलन न खोएँ (लेख)
सफल-समुन्नत जीवन का सूत्र (लेख)
परिवर्तन विश्व का होना है (लेख)
चूकिए मत, ऐतिहासिक भूमिका निभाइए (लेख)
मनस्वी और तपस्वी लोकनायक आगे आएँ (लेख)
भावना जगाएँ, गुरुदेव के सपनों को पूरा करें (लेख)
भगवान को अपने में आत्मसात करें (लेख)
कर्तव्य निष्ठा सफलता से अधिक श्रेयस्कर है (लेख)
प्रचारकों की निष्ठा और चेष्टा प्रखर होनी चाहिए (लेख)
साधु संस्था का पुनर्जागरण युग की महती आवश्यकता है (लेख)
आदर्श आचरणशीलता ही अनुकरण की प्रेरणा दे सकती है (लेख)
पतन के प्रवाह को निष्ठावान लोकसेवी ही रोक सकते हैं (लेख)
ज्ञान यज्ञ से ही समस्याओं का समाधान संभव है (लेख)
युग निर्माण योजना की सफलता व्यक्तियों के निर्माण में निहित है (लेख)
जीवंत देवमानव ही प्रेरणा के स्त्रोत बन सकते हैं (लेख)
आत्मा, परमात्मा और आदर्शवादी परंपरा ही सच्चे सलाहकार (लेख)
आंतरिक विभूतियों से ही कल्याण संभव है (लेख)
व्यक्तित्व के सर्वतोमुखी परिष्कार को जीवन लक्ष्य बनाया जाय (लेख)
लोक निर्माण के लिए अपनी तत्परता नियोजित करें (लेख)
अविध्या या माया ही जीवन को नीरस-निरर्थक बनाती है (लेख)
अध्यात्म की गरिमा समझें (लेख)
लोक मानस परिष्कृत बनाना ही कल्याण का एकमेव मार्ग (लेख)
आदर्शो की अपनी आस्था बनाएँ (लेख)
आत्म परिष्कार एवं आत्म विस्तार को अपनाएँ (लेख)
नैतिकता ही सुख-शांति का आधार है (लेख)
भावनाशील ही महान बन सकते है (लेख)
अध्यात्म का उद्देश्य आत्मा का विस्तार करना है (लेख)
संघ शक्ति अपराजेय होती है (लेख)
पराक्रम भरा पुरुषार्थ चाहिए (लेख)
ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से ही आत्मकल्याण संभव (लेख)
अहंकार को निरस्त करना ही श्रेयस्कर (लेख)
तप का सही अर्थ समझा जाय (लेख)
महामानव बनने का सूत्र है मनोबल अर्जन (लेख)
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