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लोक-शिक्षण करने वाले परिष्कृत धर्मतंत्र के संस्थापक
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Author:
Brahmavarchas
Code:
HINR1188_18
Source:
संस्कृति पुरूष हमारे गुरुदेव (Book)
#धर्मतंत्र
#संस्थापक
लोक-शिक्षण करने वाले परिष्कृत धर्मतंत्र के संस्थापक Document
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Topic Of Source Title
संस्कृति पुरुष परम पूज्य गुरुदेव (लेख)
देव पुरुष का अवतरण (लेख)
संस्कृति के पुण्य प्रवाह को मिला नवजीवन (लेख)
उपनयन संस्कारों ने जगाई साधक की अभीप्सा (लेख)
गुरुरेव परब्रह्म (लेख)
पूर्वजन्मों की अनुभूति ने कराया आत्मबोध (लेख)
वेदमाता उनकी चेतना में अवतरित हुई (लेख)
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गृहस्थ ही बना एक तपोवन (लेख)
देवात्मा हिमालय था उनका अभिभावक (लेख)
यज्ञमय जीवन से उगमती तप की ज्वालाएँ (लेख)
पुरुषार्थ चतुष्टय के थे वे साकार भाव विग्रह (लेख)
उन्होंने सुनी आर्ष साहित्य की पुकार (लेख)
गुह्य विध्या और भारतीय विज्ञान का उद्धार (लेख)
संस्कारों के माध्यम से संस्कृति की प्रतिष्ठा (लेख)
वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिता (लेख)
तीर्थ-चेतना के उन्नायक (लेख)
लोक-शिक्षण करने वाले परिष्कृत धर्मतंत्र के संस्थापक (लेख)
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ऋषि-परंपराओं को नवजीवन दिया युगऋषि ने (लेख)
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