युग गीता भाग  १

युग गीता भाग १

Author: Dr. Pranav Pandya Publisher: Yug Nirman Yojana, Mathura Code: HINR1646 5589 Views In Stock (4)
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गीता माहात्मय (लेख)
गीता प्रथम अध्याय-अर्जुन विषाद योग (लेख)
सद़्गुरु के रुप में भगवान का वरण (लेख)
गुरु हमें आत्मोन्मुख करने के लिए दिखाता है आईना (लेख)
योगस्थ हो युगधर्म का निर्वाह करें (लेख)
जो परमात्मा सत्ता में अधिष्ठित हो, वही है स्थितप्रज्ञ (लेख)
कैसे हो आसक्ति से निवृति (लेख)
स्थितप्रज्ञ-प्रज्ञावान की यही पहचान (लेख)
कर्म किए बिना रह कैसे सकता है (लेख)
व्यावहारिक अध्यात्म का मर्म सिखाता है गीता का कर्मयोग (लेख)
कर्म हमारे यज्ञ के निमित्त ही हों (लेख)
शिक्षण यज्ञ-कर्म के रुप में जीवन जीने के मर्म का (लेख)
लोकशिक्षण के लिए समर्पित जाग्रतात्माओं के कर्म (लेख)
कर्म किए बिना कोई रह ही कैसे सकता है (लेख)
आत्माभिमान छोडकर ही बना जा सकता है कर्मयोगी (लेख)
जहि शत्रुं महाबाहो कामरुपं दुरासदम़् (लेख)
Book Size Regular
Pages 160
Publisher Yug Nirman Yojana, Mathura
Publication Year 2010
Format 14x21.5 CM
Weight 0.17
Code H_SJ_17

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