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परम पुज्य गुरुदेव के अमृत कण नवयुग गीता - २

परम पुज्य गुरुदेव के अमृत कण नवयुग गीता - २

Author: Jitendr Raghuvanshi Publisher: Pragyakunj Jagajitapur Haridwar Code: HINR1694 6725 Views Out of Stock
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Hindi
नम्र-निवेदन check
वह हुँकार जिसने लाखों को जगाया
गुरुवर की पुकार-बने सच्चाई के सहचर
सत्य की हत्या के दोषी न बने
पूर्वाग्रह पूर्ण मान्याता सत्य की अवमानना
सत्य उपासक का कर्त्तव्य
जिनमे जीवट है इतना तो करें
अनीति के विरुद्ध मोर्चा बनार्ये
गुरुदेव का आइना और हमारा स्वरूप
क्षुद्रता प्रकट होती ही है
अन्तरात्मा की धिक्कार
धर्मबुद्धि को सावधान रखें
स्वेच्छाचारी की दुगीति
परले सिरे की मूर्खता
कंटीली झाडियोँ में न फँसें
गुरुनिष्ठ गाण्डीव उठायें-पाञ्चजन्य बजाये
हर उदारचेता का कर्त्तव्य
अशान्ति का आधार-बिलगाव
विचार क्रान्ति का गाण्डीव
नवयुग गीता-१,प्रतिक्रिया-परामर्श
मिशन जिनका सदैव ऋणी रहैगा
प्रज्ञाकुञ्ज के बढते चरण
Book Size Regular
Pages 32
Publisher Pragyakunj Jagajitapur Haridwar
Publication Year 2002
Format # NA
Weight 0
Code Rare Book

Gayatri Pariwar Books, Pt. Shriram Sharma Acharya, Free Books for Download, vicharkrantibooks, awgp, rishichintan,

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