युग गीता भाग  ३

युग गीता भाग ३

Author: Dr. Pranav Pandya Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINR1648 4764 Views In Stock (4)
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Hindi
कर्मसंन्यास एवं कर्मयोग में कौन सा श्रेष्ठ है (लेख)
सांख्य (संन्यास) और कर्मयोग दोनों एक ही हैं, अलग-अलग नहीं (लेख)
कर्मयोग के अभ्यास बिना संन्यास सधेगा नहीं (लेख)
कर्ताभाव से मुक्त द्रष्टा स्तर का दिव्यकर्मी (लेख)
कर्मयोग की परमसिद्धि-अंत शुद्धि (लेख)
न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तने (लेख)
निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन (लेख)
आदर्शोनिष्ठ महामानव कैसे बनें (लेख)
ब्रह्म में प्रतिष्ठित संवेदनशील दिव्यकर्मी (लेख)
ज्ञानीजन क्षणिक सुखों में रमण नहीं करते (लेख)
योगेश्वर का प्रकाश-स्तंभ बनने हेतु भावभरा आमंत्रण (लेख)
परम शांतिरुपी मुक्ति का एकमात्र मार्ग (लेख)
’महावाक्य’ से समापन होता है, कर्म संन्यास योग की व्याख्या का (लेख)
आइए ध्यान योग में प्रवेश करें (लेख)
संकल्पों से मुक्ति मिले, तो योग साधे (लेख)
योगारुढ़ होकर ही मन को शांत किया जा सकता है (लेख)
उद्धरेदात्मनाडत्मानं नात्मानमवसादयेत़् (लेख)
जीता हुआ मन ही हमारा सच्चा मित्र (लेख)
कैसे बनें पूरी तरह युक्तपुरुष (लेख)
Book Size Regular
Pages 172
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2011
Format 14x22 CM
Weight 0.29
Code H_SJ_33

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