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दु:ख निवृति का केवल एक ही मार्ग
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR0360_67
Source:
दिव्य अनुभूतियाँ और दिव्य सन्देश (Book)
#दुख
#निवृति
#केवल
#मार्ग
दु:ख निवृति का केवल एक ही मार्ग Document
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Topic Of Source Title
मानव जीवन की सार्थकता (लेख)
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जीवन का अर्थ (लेख)
मनुष्य तुच्छता को छोड़ें और महान बनें (लेख)
हम तुच्छ नहीं गौरवास्पद जीवन जियें (लेख)
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नाव न खेई जाय बिना मल्लाह के (लेख)
परमात्मा का स्वरूप विराट विश्व (लेख)
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प्रेम का अमृत चखो (लेख)
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पाप की अवहेलना मत करो (लेख)
आत्म विश्वास और सफलता (लेख)
दु:ख की निवृत्ति ज्ञान से ही सम्भव (लेख)
जीवन की त्रिधारा (लेख)
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हम जड़ नहीं गतिशील बनें (लेख)
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बलमुपास्व बल की उपासना करो (लेख)
दु:ख निवृति का केवल एक ही मार्ग (लेख)
व्यक्ति-व्यक्ति जीवन सुन्दर बनाने में सहायता करे (लेख)
सत्य के लिए सर्वस्व त्याग (लेख)
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आदर्शो की रक्षा (लेख)
सार्वभौमिक उपासना (लेख)
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धर्म और धार्मिकता की कसौटी (लेख)
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आत्मविश्वास ही अटूट शक्ति (लेख)
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नीव अच्छी होनी चाहिए (लेख)
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कर्तव्य पालन का अविरल आनन्द (लेख)
क्या हमारे लिये यही उचित है (लेख)
अन्त:करण का परिष्कार करें (लेख)
आत्म त्याग ही सर्वोच्च धर्म (लेख)
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प्रतिभा को बखेरिये मत (लेख)
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अपनी दुनियाँ आप बनावें (लेख)
प्रेम से कल्याण (लेख)
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कर्मवीर का मार्ग कौन रोक सका है (लेख)
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केवल अपने लिये ही नहीं (लेख)
अभिमान का विषधर सर्प (लेख)
अन्धे होकर चलना ठीक नहीं (लेख)
कर्म-कर्म-कर्म (लेख)
हम सह्रदय बनें (लेख)
सामाजिक कर्तव्यों का पालन (लेख)
आत्म प्रेरणा की उपेक्षा न करें (लेख)
विचारों को कार्यान्वित कीजिए (लेख)
वाणी की नम्रता बोली में मिठास (लेख)
हम कठोर परिश्रम के आदी बनें (लेख)
बलिष्ठता बाहरी नहीं भीतरी (लेख)
संघर्ष आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है (लेख)
परिश्रम ही सच्चा देवता (लेख)
वीर दूसरों के लिये मरते हैं (लेख)
स्वार्थ का दुरूपयोग ही निन्दनीय (लेख)
विश्वास रखो और आगे बढ़ो (लेख)
जिन्दगी करीने के साथ जियें (लेख)
आत्मविश्वास पुरूषार्थ और सज्जनता (लेख)
मिलना ही सत्य है (लेख)
सफलता का राजमार्ग (लेख)
परिस्थितियों पर ही निर्भर न रहें (लेख)
तीन बड़े सत्य (लेख)
काम को टालिए मत (लेख)
विचारों की शक्ति (लेख)
शरीर को निष्क्रिय न बनावें (लेख)
संकल्प से सफलता (लेख)
बीज की तरह उगे सड़े नहीं (लेख)
सदाचरण सबसे बड़ा धन (लेख)
बढ़ो आगे बढ़ो (लेख)
तुम उठो तो सही (लेख)
जीवन की सफलता (लेख)
काम करो इसी में सुख है (लेख)
कायर का निस्तार नहीं (लेख)
आत्मविश्वास का अपार बल (लेख)
जीवन का आरम्भ और अन्त (लेख)
वीर बनो कायर नहीं (लेख)
भावनायें आपकी शत्रु है (लेख)
वासना उसका क्या करेगी (लेख)
मनुष्य जीवन एक अनुपम अवसर (लेख)
मनुष्य अपना निर्माण स्वयं करता है (लेख)
वास्तविक स्वावलम्बन की महता (लेख)
सदुश्द्देय के लिए अनवरत श्रम (लेख)
निरूत्साह एक अभिशाप (लेख)
मधुर वाणी बोलिए (लेख)
समस्यायें अनेक मत रखिए (लेख)
वाचलता की व्यर्थता (लेख)
साहसी का पराभव नहीं (लेख)
संकट के समय मानसिक सन्तुलन न खोये (लेख)
प्रेम का संसारव्यापी साम्राज्य (लेख)
मानसिक व्यभिचार से बचो (लेख)
आपका सहायक (लेख)
व्यक्तित्व की महिमा समझिए (लेख)
व्यक्तित्व को विकसित करें (लेख)
सफलता का राजमार्ग (लेख)
भौतिक पदार्थो की लालसा पतन करा देगी (लेख)
भाग्यवादी कायरता (लेख)
वह परम मंगल है (लेख)
ठहरना पर आराम के लिए नहीं (लेख)
अकर्मण्यता ही मृत्यु है (लेख)
उत्साह ही अनन्त शक्ति (लेख)
बढ़े चलो बढ़े चलो (लेख)
अकेलो चलो अकेले चलो (लेख)
उन्नति का मूल मन्त्र (लेख)
अन्ध परम्परायें नहीं चाहिए (लेख)
भूत को भूलिए-वर्तमान को देखिए (लेख)
हम अतिवादी न बनें (लेख)
जीवन उत्साही का (लेख)
सद्गुणों से ही यश श्री (लेख)
नरक में भी पुस्तकालय (लेख)
निराशा एक सामाजिक पाप (लेख)
निन्दा से डरिए मत (लेख)
मिथ्याचार और उसके दुष्परिणाम (लेख)
सज्जनता स्वाभाविक होनी चाहिए (लेख)
न अपमान करें न अत्याचार (लेख)
सामाजिक सुव्यवस्था का आधार (लेख)
धर्म की जय होती है (लेख)
निकम्मे साहित्य से दूर रहें (लेख)
सच्ची महानता की परख (लेख)
समन्वयात्मक दृष्टिकोण (लेख)
अक्षुण्ण बड़प्पन का आधार (लेख)
सुखी जीवन का मूल साधन धर्म (लेख)
वीरता ही उन्नति का मूलभूत कारण (लेख)
ईमानदारी संसार की सर्वोपरि विभूति (लेख)
मेल मिलाप की शक्ति (लेख)
उन्नति का मूल मन्त्र-काम (लेख)
उठो महान कार्य में लग जाओ (लेख)
विपति की आशका से घबराइए नहीं (लेख)
अपनी योग्यताओं का प्रमाण दीजिए (लेख)
आत्म विश्वास से महानता प्राप्त होती है (लेख)
बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए (लेख)
अपने दोष और दुर्गुणों को निकाल डालिये (लेख)
सुखी और समृद्ध बनने का मार्ग-परिश्रम (लेख)
मन में से भय की भावना निकाल फेंकिए (लेख)
पहले अपनी सेवा और सहायता करो (लेख)
समय का सदुपयोग कीजिए (लेख)
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