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मानवता के उदद्देश्य
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR1212_378
Source:
सफलता के बीजमंत्र (Book)
#मानवता
#उदद्देश्य
मानवता के उदद्देश्य Document
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सार को ग्रहण करो असार को नहीं (लेख)
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प्रेम और त्याग (लेख)
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विवेक और वैराग्य (लेख)
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अपने देश को सर्वोच्च बनाइये (लेख)
क्रान्ति का भारतीय आदर्श (लेख)
कर्म करना हमारा उद्देश्य है (लेख)
परिस्थिति के अनुसार आचरण (लेख)
भगवान के अनेक उपकार (लेख)
बुराई में भी भलाई ढूढों (लेख)
सांसारिक हानि के लिये खेद मत करो (लेख)
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सत् चित् आनन्द (लेख)
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सदगुणों की प्रेरणा (लेख)
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असत्य से सत्य की ओर (लेख)
सधु और सन्यासी का आदर्श (लेख)
धन और साधुता (लेख)
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सत्य से मुक्ति (लेख)
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जन सतावाद कब सफल होगा (लेख)
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सच्चे चमत्कारी व्यक्ति (लेख)
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भगवान और भक्त (लेख)
ईश्वर भक्त की पहिचान (लेख)
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पाप प्रकट हो जाता है (लेख)
सत्पात्र को उतम शिक्षा (लेख)
कौन अच्छा है (लेख)
विषय वासना का विष (लेख)
आहार का विचारों पर प्रभाव (लेख)
आलस्य का अभिशाप (लेख)
कल्याणकारी कला (लेख)
भगवत् प्राप्ति का लक्षण (लेख)
कर्म भक्ति और ज्ञान का समन्वय (लेख)
आत्म श्रद्धा की महता (लेख)
आत्म निर्भरता आत्म ज्ञान (लेख)
मानव जीवन का उद्देश्य (लेख)
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अभिलाषाऐं सीमित रखो (लेख)
निष्काम कर्म (लेख)
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गरीब से अमीर (लेख)
सर्वोतम धर्मोपदेश (लेख)
आलस्य का अभिशाप (लेख)
हमारा जीवन ध्येय (लेख)
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जग कैसा मैं जैसा (लेख)
अछूत कौन है (लेख)
सबसे बड़ा धोखा (लेख)
अहंकार मत करो (लेख)
अपनी जातीयता की व्यर्थ निन्दा मत करो (लेख)
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समाज के प्रति हमारा कर्तव्य (लेख)
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शान्ति का स्त्रोत अन्दर (लेख)
अपरिग्रही बनो (लेख)
उठो अपना गुण प्रकट करो (लेख)
व्यभिचार की ओर आकर्षित मत होना (लेख)
अपने चिकित्सक स्वयं बनिये (लेख)
विश्वास की अपराजेयता (लेख)
अन्यायी अपनी सीमा में रहो (लेख)
सबसे बड़ा मन्दिर (लेख)
मृतकों की तरह न जिए (लेख)
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पुरुषार्थ की विजय (लेख)
असुविधाजनक नियम सुधारे जायँ (लेख)
आत्म सुधार और आत्म निरीक्षण (लेख)
जमाने की जिम्मेदारी (लेख)
विचारों का दमन ठीक नहीं (लेख)
विश्व मानव की सेवा (लेख)
शिक्षा महान् उतरदायित्व (लेख)
विवाह आत्म विकास का साधन (लेख)
डरो मत (लेख)
सच्चा विजेता (लेख)
स्वाधीनता या पराधीनता (लेख)
परिवर्तन आवश्यक (लेख)
नि:स्वार्थ सेवा (लेख)
लौह इच्छा शक्ति (लेख)
विचारों का परिष्कार कीजिये (लेख)
शौर्य में मनुष्य का गौरव (लेख)
उल्लास पूर्ण जीवन जियें (लेख)
अपना स्वरुप पहचानो (लेख)
हम आगे ही बढ़ें (लेख)
संयम की महिमा (लेख)
छोटा और बड़ा आदमी (लेख)
केवल उचित को ही स्वीकार करें (लेख)
संघर्ष करो (लेख)
आध्यात्मिक श्रद्धा (लेख)
स्त्रियाँ ब्रह्म विधा परायण हों (लेख)
समाज की प्रतिष्ठा ईमानदारी पर निर्भर है (लेख)
मुस्कान और तलवार (लेख)
अपना सब कुछ समाज का समझें (लेख)
गुणों को कम में मूर्तिमान करना ही श्रेयस्कर (लेख)
समाज कल्याण का उतरदायित्व (लेख)
सामूहिक सुविधाए आवश्यक (लेख)
परिस्थितियाँ बदली जा सकती हैं (लेख)
छीनो मत (लेख)
मानव जीवन कठपुतली नहीं (लेख)
संशयात्मा विनश्यति (लेख)
सत्य और प्रेम (लेख)
कर्म कौशल (लेख)
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गाँठ का बीज बेकार न जाये (लेख)
लिप्सा के त्याग से हो सुख सम्भव है (लेख)
आवश्यकतायें सीमित रखें (लेख)
अपने आप को भी देखो (लेख)
कठिनाइयों का साहसपूर्वक सामना करें (लेख)
कार्य के प्रति दिलचस्पी और लगन (लेख)
अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह करो (लेख)
हमारा भविष्य मातृ दर्शन से ही उज्वल होगा (लेख)
सुखकर और कल्याणकर दोनों को नमस्कार (लेख)
दोष रहित जीवन हौ सत्य है (लेख)
निराशा एक प्रकार की नास्तिकता है (लेख)
छोटी शक्ति से ही कार्य आरम्भ करो (लेख)
उचित को ही स्वीकार करिये (लेख)
तपस्या से ही अभीष्ट उद्देश्य प्राप्त होता है (लेख)
सत्कर्मों और सद्गुणों की आदत डालिये (लेख)
परोपकार जीवन का सबसे बड़ा लाभ है (लेख)
मन की शक्ति का स्दुपयोग करना सीखीये (लेख)
जागो जाग्रत हो तेजस्वी बनो (लेख)
निर्भय रहो निशचिन्त रहो (लेख)
शक्ति की आवश्यकता (लेख)
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जातीय जीवन की मूल भिति (लेख)
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ब्रह्मचर्य को पहचानें (लेख)
पति पत्नी समता (लेख)
श्रम से बचना अपराध (लेख)
धन से सुख प्राप्त नहीं होता (लेख)
प्रेम ही चरित्र है (लेख)
ईमानदारी और कार्य कुशलता (लेख)
विकास का अनुकूल अवसर (लेख)
सामाजिक न्याय की स्थापना (लेख)
जीवन और मृत्यु की पहेली (लेख)
सच्ची वीरता (लेख)
शारीरिक श्रम (लेख)
जिनका जीना मरना बराबर है (लेख)
समाजवाद कैसे आये (लेख)
स्वतन्त्रता की योग्यता (लेख)
दूसरों की स्वतन्त्रता में बाधक न हों (लेख)
कर्तव्य परायणता के लक्षण (लेख)
पाप का धन (लेख)
नकली वेदान्त से खतरा (लेख)
विचारशीलता का महत्व (लेख)
जीवित के लक्षण (लेख)
विधा की महिमा (लेख)
पशुबलि को धिक्कार है (लेख)
विचार ही भविष्य के निर्माता हैं (लेख)
स्वाधीनता आत्मा से उत्पन्न होती है (लेख)
जन्मसिद्ध अधिकार (लेख)
नि:स्वार्थ काम की महिमा (लेख)
हमको महान बनना है (लेख)
स्वतन्त्रता और सत्य प्रियता (लेख)
धर्म द्धेष का त्याग (लेख)
हमारे आन्तरिक शत्रु (लेख)
मोक्ष पर सबका अधिकार (लेख)
मित्र बनकर रहो (लेख)
नीच की मित्रता (लेख)
मानव जाति की एकता (लेख)
अपनी सत्वरक्षा धर्म है (लेख)
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प्रारब्ध की मूढ़तावाद (लेख)
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