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महत्वाकांक्षाएँ अनियंत्रित न होने पाएँ
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINB0129_330
Source:
ऋषि चिंतन के सान्निध्य में भाग १ (Book)
#महत्वाकांक्षाएँ
#अनियंत्रित
#
महत्वाकांक्षाएँ अनियंत्रित न होने पाएँ Document
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Topic Of Source Title
आत्मनिवेदन
अंतिम संदेश
युगऋषि परम पूज्य पं.श्रीराम शर्मा आचार्य
अंतिम संदेश
वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा
गायत्री का दर्शन
देवसंस्कृति की माता गायत्री
गायत्री महामंत्र की विलक्षण शक्ति
देव संस्कृति का दर्शन गायत्री मंत्र
प्रखर प्रज्ञा सजल श्रद्धा
प्रखर प्रज्ञा सजल श्रद्धा
बुझा सकेगी इसे न झंझा
ज्ञानयज्ञ की लाल मशाल
युगऋषि की अभिलाषा
मेरी अंतिम इच्छा
युगऋषि की तपस्थली गायत्री तपोभूमि
हमारा युग निर्माण सत्संकल्प
उठो हिम्मत करो
आनंस की खोज
पहले दो,पीछे पाओ
उद्देश्य उँचा रखें
तुम ईश्वर को पूजते हो या शैतान को
आत्मिक तृप्ति का आधार
गीता का कर्मयोग
कर्म या पाखंड
आत्मशक्ति का विकास
सच्चा धर्मात्मा कौन
प्रभु की माया
कर्तव्यपालन
द्रृष्टिकोण बदलो
हदय मंदिर के अंदर संतोष
अंतर्मुखी होने पर ही शांति
असत्य की ओर नहीं,सत्य की ओर
सत्य का प्रकाश
दूसरों पर दया करो
तृष्णाएँ छोड़ो
सत्संग का महत्व
सत्यस्वरुप आत्मा
सथायी सुख कहाँ है
सच्चा और अच्छा व्यापार
ज्ञान का संचय
क्रोध मत करो क्षमा करो
बादलों की तरह बरसते रहो
प्रार्थना कब सफल होगी
अपनी रोटी बाँटकर खाइए
किसी परिस्थिति में विचलित न हों
मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है
प्रेम ही सर्वोपरि है
तुम बीच में खड़े हो
प्रेम ही सुख शांति का मूल है
धर्म का सार
ईश्वर कहाँ है
जीवन का सद्व्यय
ज्ञानयोग की एक सुलभ साधना
सहसयता में जीवन की सार्थकता
मृत्यु का भय दूर कर दीजिए
रोने से काम न चलेगा
जिंदगी में आनंद का निर्माण करो
मन जीता तोजग जीता
ज्ञान की उपासना कीजिए
हम स्वयं अपने स्वामी बनें
दुर्भावनाओं को जीतो
प्रेम का वास्तविक स्वरुप
शक्ति संचय कीजिए
शेखी मत बधारो
विचार ही कर्म के बीज हैं
जीवन को तपस्यामय बनाइए
सत्यता में अकूत बल भरा हुआ है
अपने को जीतो
हमारी दुनियाँ वैसी,जैसा हमारा मन
मन से भय की भावनाएँ निकाल फेंकिए
अपनी भूलों को स्वीकार कीजिए
जोश के साथ होश
मानसिक विकास का अटल नियम
जीने योग्य जीवन जियो
जीवन की बागडोर आपके हाथ में
कर्म की स्वतंत्रता
भलाई करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी
दु:ख काल्पनिक होते हैं
अच्छाइयाँ देखिए अच्छाइयाँ फैलेंगी
वर्तमान परिस्थितियाँ हमने स्वयं उत्पन्न की हैं
आत्मनिर्माण सबसे बड़ा पुण्य परमार्थ है
पूर्ण शांति की प्राप्ति
जीवन में सच्ची शांति के दर्शन
अपने को आवेशों से बचाइए
बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए
सत्य की अकूत शक्ति पर विश्वास कीजिए
सद्ज्ञान का संचय करो
सच्ची कमाई,सद्गुणों का संग्रह
स्वर्ग और नरक इसी लोक में
अपनी दुनियाँ अपनी द्रृष्टि में
अधिकार और कर्तव्य
अपनी शक्तियों को विकसित कीजिए
पराजय विजय की पहली सीढ़ी है
मृत्यु से जीवन का अंत नहीं होता
आध्यात्मिकता की कसौटी
गुण ग्राहक द्रृष्टि को जाग्रत कीजिए
तुम पापी नहीं पुण्यात्मा हो
जानी तथा ज्ञानी
अपने ऊपर विश्वास कीजिए]
बुद्धिमानो मूर्ख क्यों बनते हो
लक्ष्यविहीन जीवन
शारीरिक और बौद्धिक श्रम
साधक को सब कुछ भूल जाना चाहिए
विचारों का केंद्रबिंदु क्यों और कैसे
दूसरों के दोष ही गिनने से क्या लाभ
परिस्थितियों के अनुकूल बनिए
समाज सेवा से ही आत्मरक्षा
अनीति से धन मत जोड़िए
अपने में अच्छी आदतें डालिए
अपनी दशा सुधारिए
आत्मज्ञान को प्राप्त करो
धर्म की प्रथम घोषणा
सूक्ष्म और अतिसूक्ष्म
भाग्य का निर्माण अपने हाथ में है
ब्रह्म की सर्वव्यापकता
अपनी उतम कल्पनाओं को चरितार्थ कीजिए
विश्वास करो कि तुम महान हो
हमारी अतृप्ति और असंतोष का कारण
अपनी योजना पर मजबूती से टिके रहिए
हमारी आर्थिक कठिनाइयाँ कैसे दूर हों
लक्ष्य में तन्मय हो जाइए
सत्कर्मो से दुर्भाग्य भी बदल सकता है
मरने से डरना क्या
आत्मसुधार की एक नवीन योजना
मनुष्य की महानता का रहस्य
अपने लक्ष्य पर केंद्रित हो जाइए
देवत्व का अवलंबन
हम दिव्य जीवन जिएँ
विश्वमाता की पवित्र आराधना
संवेदना शक्ति का विकास कीजिए
आप निराश मत होइए
बच्चों के निर्माण का दायित्व
सच्चे मित्र का चुनाव
ईश्वरीय सता का का तत्वज्ञान
आत्मा ब्रह्मरुप है,इसे पहचानिए
सर्वत्र अपना ही प्राण बिखरा पड़ा है
जैसे आप वैसा आपका संसार
अपना द्रृष्टिकोण ऊँचा रखें
निष्काम भाव से कर्म करते रहिए
अपने को बुराइयों से बचाइए
सत् और असत् का अंतर
आवेश और उद्धेग से बचिए
मानव जीवन की सफलता का प्रधान केंद्र प्रेम
अमर्यादित इच्छाएँ त्याज्य हैं
चित शुद्धि की आवश्यकता
मनुष्य जीवन का उद्देश्य
विचार और कार्य में समन्वय कैसे हि
जीवन और सिद्धांत
अपने आप के साथ सद्व्यवहार करें
लोक व्यवहार की कुशलता के गुप्त रहस्य
दूसरों के कामों में हस्तक्षेप
आदर्श जीवन का रहस्य
चित का संशोधन और परिमार्जन
उद्धिग्न मत होइए
कठिनाई का सामना करने को तैयार रहो
अकेले चलना पड़ेगा
व्यावहारिक अध्यात्मवाद
अंत:शुद्धि की आवश्यकता
किसी का बुरा मत सोचिए
धर्मो की मूलभूत एकता
मानव जीवन का तत्वज्ञान
मन में सद्भावनाएँ रखें
ईश्वर शक्ति का आदि स्त्रोत
ये भयंकर भूलें कदापि न करें
जीवन यज्ञ
श्रेष्ठतम कार्य करें
आत्मा का आदेश पालन करें
प्रभु की शरण में
पहले अपने को सुधारो
विचारों की प्रचंड शक्ति
अरे इस आसुरी संस्कृति को रोको
कर्मयोग का रहस्य
धृणा नहीं प्रेम कीजिए
शांत विचारों की शक्ति
विचारों की शक्तिशाली दुनियाँ
प्रतिस्पर्द्धा की भावना से हानि
जीवन का चरम लक्ष्य ऐसे प्राप्त करो
मानसिक संतुलन आवश्यक
मनुष्य जीवन ऊँचे उद्देशयों के लिए
बातें नहीं काम कीजिए
संतोषामृत पिया करें
त्याग और शक्ति भोग और अशकता
भारतीय संस्कृति का प्रसार
महात्मा बुद्ध के व्यावहारिक उपदेश
सद्वृतियाँ सद्मार्ग की और चलती हैं
ईश्वर से नाता जोड़ो
भगवान का अनंत भंडार
आत्मनिरीक्षण आवश्यक है
अपने चित को प्रसन्न रखिए
सच्चा धन कहाँ है
आलस्य न करना ही अमृत पद है
त्याग या स्वार्थ
सत्संग का महत्व
दुर्बलता एक पाप है
असीम संग्रह और उपभोग की तृष्णा
विलासी मनुष्य धर्मात्मा नहीं हो सकता
आचरण और व्यवहार में सत्य का प्रयोग
पाप की कमाई से सच्चा सुख नहीं मिलता
कमाई में बहुतों का हिस्सा
सच्ची आध्यात्मिकता का मार्ग
मनुष्य स्वयं अपना भाग्य बनाता है
आशावादी व्यक्तियों से मिलें
अपनी क्षमता को पहचानें
समय का औषध रुप
सुझाव देने से पूर्व सोचो
सुख के लिए चित शांति
आध्यात्मिक साधना का मार्ग
सत्य व्यवहार की अपार शक्ति
कर्मवाद और मानवीय प्रगति
मनुष्य देवता बन जाएगा
परम सत्य को जानो
सुख-दु:ख का आधार ज्ञान
आत्मनियंत्रण की शक्ति
नैतिकता का उदय
दानशीलता की भावना
माँ की शरण में दिव्य शक्ति
ज्ञान और कर्म का समन्वय ही मोक्ष-मार्ग
तीर्थ और लोक-कल्याण
मानसिक विकास और आत्मज्ञान
अपने आप को पहचानो
जीवन की सार्थकता
प्रेमी और धनवान बनें
मनुष्य बनकर जिओ
समाज का ऋण चुकाइए
सफलता का रहस्य
हम महानता की ओर क्यों न चलें
इच्छाओं का त्याग कीजिए
जीवन में निर्भीकता आवश्यक है
अनुकरणीय जीवन जिएँ
मानव जीवन की महानता एवं उपयोगिता
अपनी इच्छाशक्ति को बढ़ाइए
स्वार्थ भाव को मिटाने का व्यावहारिक उपाय
गृहस्थी में रहकर ही मुक्ति प्राप्त कीजिए
संतान के लिए विरासत क्या छोड़ें
मानवदेह का सदुपयोग
मनुष्यो ! पूर्ण मनुष्य बनो
द्रृढ़ इच्छाशकति के चमत्कार
प्रतिकूल परिस्थिति में चिचलित न हों
मनोबल द्धारा रोग का निवारण
आतंरिक शत्रुओं से सावधान
अपने आप को पहचानिए
न मद,न दीनता
वास्तविक प्रार्थना का सच्चा स्वरुप
सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन है
सुख शांति का सच्चा मार्ग
क्या स्वर्ग और नरक इसी संसार में मौजूद हैं
जीवन का लक्ष्य एक हो
संसार की सर्वश्रेष्ठ वस्तु प्राप्त करें
अपने गुरु स्वयं बनिए
आत्मनिरीक्षण कर कमजोरियाँ दूर करें
विरासत में बच्चों के लिए धन न छोड़ें
भोजन और भजन का संबंध
अपने द्रृष्टिकोण को परिमार्जिन कीजिए
आत्मनिरीक्षण का स्वभाव बनाइए
विश्वासयुक्त प्रार्थना का प्रभाव
मानव जीवन की सफलता का मार्ग
विश्व प्रेम ही ईश्वर प्रेम है
मन:शक्तियों का सदुपयोग
धर्मबुद्धि की अवहेलना से मानसिक क्लेश
जीवन यात्रा का महान पथ
हम पहले अपने को ही क्यों न सुधारें
पराश्रित होना पाप है
आत्मसुधार से ही सच्ची शांति संभव है
प्रगति के पथ पर बढ़ते ही जाइए
दोषों में भी गुं ढ़ूँढ निकालिए
भाग्य बनाना अपने हाथ की बात है
संतोष सर्वदा सुखी
ईर्ष्या की आग में मत जलिए
हम कितनी ही सेवा क्यों न करें
बाधाओं का स्वागत कीजिए
मन को साधो सुधारो
कठिन समस्याओं के सरल समाधान
हर काम ईमानदारी और रुचि से करें
जीवन एक समझौता है
भले ही थोड़ा पर उत्कृष्ट
आत्मनिर्माण ही साधना है
अशांत रहने से क्या लाभ
जीवनोद्देश्य का निर्धारण
सधा हुआ मन,वर देने वाला देवता
आत्मनिरीक्षण की प्रवृति
मनोबल की न्यूनता
संकल्प शक्ति की दुर्बलता
आत्मा पर से मल आवरण भी तो हटें
सामयिक चेतावनी
प्रतिकूल परिस्थिति में भी हम अधीर न हों
सफलता का गुप्त स्त्रोत द्रृढ़ इच्छाशक्ति
आंतरिक दुर्बलताओं से लड़ें
ज्ञान से ही बंधन टूटते हैं
कुविचारों का प्रतिरोध सद्विचारों से
पाप की अवहेलना मत करो
मनोविकार शारीरिक विकारों से ज्यादा पीड़ादायक
अपनी गुत्थी सुलझाएँ
उतेजना और आवेश की विभीषिका
भलाई की शक्ति मर नहीं सकती
परमार्थ में ही स्वार्थ सन्निहित
मानवता के आदर्शों पर आस्था
सद्गुणों के विकास से ही समस्याओं का हल
स्वाध्याय और सत्संग
समय के अनुरुप अपनी मनोभूमि ठीक रखें
गुत्थियों का हल अपने भीतर है
समय का सदुपयोग
मानवीय सदाशयता का लाभ आज भी मिलता है
मह ही शत्रु मन ही मित्र
इस संसार की श्रेष्ठतम विभूति ज्ञान
स्वच्छ मन से सभ्य समाज
उत्कृष्ट भावनाओं का महत्व
श्रेय और प्रेय दोनों मार्ग खूले हैं
आत्मनिर्माण का साधन स्वाध्याय और सत्संग
उत्कृष्टता से श्रेष्ठता का जन्म
दिव्य विभूति की दिव्य अनुभूति
जीवन का सच्चा सहचर ईश्वर
कर्म पर भावना का प्रभाव
सद्भाव रखें शांति प्राप्त करें
अहंकार एक सत्यानाशी दुर्गुण
मानव जीवन और ईश्वर विश्वास
आत्मसंतोष और आत्मसम्मान
हमें मानसिक चिंताएँ क्यों घेरती हैं
विचारों की उत्कृष्टता का महत्व
हमारा द्रृष्टिकोण भी तो सुधरे
उत्कृष्ट जीवन की आवश्यकता
आत्मसुधार का सरल पथ सेवा
आध्यात्मिक विचारधारा से स्वर्गीय जीवन
बाहार नहीं भीतर भी देखें
तप से ही कल्याण होगा
कठिनाइयों का भी स्वागत करें
देने से ही मिलेगा
श्रद्धाबल से ही महान कार्य संभव
आत्मशोधन अध्यात्म का श्रीगणेश
जिंदगी कैसे जिएँ
अपने स्वभाव पर विजय प्राप्त करें
कठिनाइयाँ आपकी सहायक भी तो हैं
प्रेम और परमेश्वर
सफलता आत्मविश्वासी को मिलती है
अपने लिए नहीं ईश्वर के लिए जिएँ
हमारा जीवनलक्ष्य आत्मदर्शन
प्रेम और कृतज्ञता का सौंदर्य
आत्मविश्वास की शक्ति
सच्ची सफलता का एकमात्र साधन
शांति तो अंदर ही खोजनी पड़ती है
अपने स्वामी आप बनिए
हम पुरुष से पुरुषोतम बनें
हमारा आत्मविश्वास जाग्रत हो
ईश्वरप्राप्ति कठिन नहीं सरल है
आत्मनिरीक्षण और उसकी महता
आध्यात्मिकता की मुस्कान
महत्वाकांक्षाएँ अनियंत्रित न होने पाएँ
जीवन संग्राम में पुरुषार्थ की आवश्यकता
मन को अस्वस्थ न रहने दिया जाए
उतना बोलिए जितना आवश्यक हो
मनुष्य जीवन का उद्देश्य भी समझें
अपना भाग्य अपने हाथों बनाइए
अत:करण की आवाज सुनो और उसका अनुकरण करो
जीवन एक वरदान है,इसे वरदान की तरह जिएँ
प्रतिशोध की भावना छोड़िए
मानव जीवन को सार्थक बनाएँ
आत्मविकास की विचार साधना
अमर हो तुम अमरत्व को पहचानो
संस्कृति का गौरव फिर से उज्जवल करें
धैर्य की उपयोगिता
विचारों की शक्ति अपरिमित है
खिन्न नहीं,प्रफुल्लित रहा कीजिए
निराश मत होइए अन्यथा सब कुछ खॊ बैठेंगे
मनुष्य परमात्मा का प्रखर प्रतिनिधि
लक्ष्यसिद्धि के लिए धैर्य आवश्यक है
मन को सुधारिए वह सुधर जाएगा
ज्ञान दान की परंपरा चलती रहे
आत्मविश्वास की अटूट शक्ति
दुष्कर्मों का प्रतिफल भोगना पड़ता है
निर्मल और निर्विकार जीवन
स्वर्गप्राप्ति के लिए ऊँचा सोचें,अच्छा करें
परमात्मा का दर्शन कैसे मिले
श्रद्धा से बुद्धि का नियमन कीजिए
जीवन कलात्मक ढंग से जिएँ
विचार ही नहीं कार्य भी कीजिए
चरित्र अनमोल रत्न है
दु:ख से डरिए मत
शिष्ट एवं सभ्य व्यवहार जरुरी है
जीवन को उलझन से बचाइए
परदोष दर्शन की कुत्सा त्यागिए
सत्य को खोजें और उसे ही प्राप्त करें
सच्ची लोकप्रियता इस तरह मिलती है
समय के सदुपयोग की महता समझिए
युग निर्माण योजना
आत्मीय पाठक बंधुओं से हमारा स्नेह भरा अनुरोध
ज्ञानयज्ञ की क्रांतिकारी योजनाएँ
श्रीराम झोला पुस्तकालय
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गायत्री ज्ञानयज्ञ योजना
युग निर्माण विधा परिषद्
अपना मूल्यांकन भी करते रहें
युग निर्माण योजना के सात आंदोलन
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