Read
Books
Magazines
Artical
Artical & Series
Stories
Great Personalities
Festival & Retuales
Lectures
Pragya Geet
Audio
Listen
ऑडियो पुस्तकें
प्रेरक कहानियाँ
प्रवचन
प्रज्ञा गीत
ऋषि चिंतन
ध्यान
मंत्र
About us
Contact us
✖
Tags
Books
Magazines
Articles
Article & Series
Stories
Great Personalities
Festival & Rituals
Lectures
Pragya Geet
Audio
Trending searches
0
0
No items in cart
Guest
Not logged in
Guest
Not logged in
Profile
My Order
Wishlist
आलस्य एक प्रकार की आत्म-हत्या ही है।
Share
0
Author:
N/A
Code:
AJH1966Nov_9
#आलस्य
#आत्म
#
आलस्य एक प्रकार की आत्म-हत्या ही है। Document
PDF is Ready
Scroll to read the document.
Topic Of Source Title
हम घट नहीं रहे—बढ़े ही हैं।_AJH1966Nov
हम वास्तविक बुद्धिमत्ता अपनायें
परमात्मा का अस्तिव और अनुग्रह
आत्म-सत्ता और उसकी महान् महत्ता
मन_बुद्धि_चित्त अहंकार का परिष्कार
ममता हटाने पर ही चित्त शुद्ध होगा
वासना-त्याग के बिना चैन कहाँ?
धनवान नहीं चरित्रवान होने की बात सोचिए
सद्ज्ञान का संचय एवं प्रसार आवश्यक है।
आलस्य एक प्रकार की आत्म-हत्या ही है।
भाग्यवाद को तिलाँजलि देना ही श्रेयस्कर
मनुष्यता को निर्दयता से कलंकित न करें
गौ-रक्षा मनुष्यमात्र का धर्म-कर्तव्य
परिवार किसी उद्देश्य के लिये बसाया जाय
समाज सुधार के लिए प्रबुद्ध वर्ग आगे बढ़े।
गायत्री की उच्चस्तरीय साघना-आत्म-कल्याण की सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वोपरि उपासना
अपनों से अपनी बात-हम घट नहीं रहे_बढ़े ही हैं। (लेख शृंखला)
Related Articles
7_आवेदन हेतु बायोडेटा का प्रारुप (लेख)
64
0
6_प्रशिक्षण के विषयों का सिलेबस (लेख)
70
0
5_शिक्षण-प्रशिक्षण का दैनिक कार्यक्रम (लेख)
64
0
4_प्रशिक्षण के विषय एवं उनकी शिक्षण अवधि (लेख)
66
0
3_प्रशिक्षण में प्रवेश हेतु आवश्यक अर्हताएँ एवं अन्य जानकारियाँ (लेख)
47
0
2_गायत्री परिवार द्धारा संचालित गोशालाओं का उद्देश्य एवं कार्यक्रम (लेख)
55
0
1_प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि (लेख)
80
0
33_सभ्यता व संस्कृति (लेख)
123
0
32_बच्चों को आज्ञाकारी कैसे बनाएँ (लेख)
116
1
31_बच्चों को अधिक आदेश न दें (लेख)
125
0
Related Stories
सदाचारी ही भगवान का सच्चा भक्त्त है
485
0
हमारे बाल्यावस्था के आचार्यजी
386
0
प्रेरणा-प्रद दोहे
646
0
प्रलय तो होगी-पर अभी कुछ देर है
520
0
मानव जीवन की सार्थकता
515
0
हमें भगवान कैसे मिलें?
409
0
कष्ट साघ्य तपश्चर्या व्यर्थ है
462
0
सत्य की साघना और सिद्धि
425
0
आचार्यजी की डायरी के कुछ पृष्ठ
438
0
गायत्री उपासना विघि पूर्वक ही की जाय!
482
0
Share this Document
WhatsApp
Facebook
X
Telegram
LinkedIn
Copy Link