अब यह पुकार अनसुनी न रहने पाए मूर्च्छना व व्यामोह कहीं श्रेयार्थी बनने से हमें वंचित न कर दे_AJH1995Jan

अब यह पुकार अनसुनी न रहने पाए मूर्च्छना व व्यामोह कहीं श्रेयार्थी बनने से हमें वंचित न कर दे_AJH1995Jan Document