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मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है, इस विश्वास के आधार पर हमारी मान्यता है कि हम उत्कृष्ट बनेंगे औ दूसरों को श्रेष्ठ बनाएँगें, तो युग अवश्य बदलेगा
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Author:
Pt. Shriram Sharma Acharya
Code:
HINR0581_18
Source:
इक्कीसवीं सदी का संविधान (Book)
#मनुष्य
#भाग्य
#निर्माता
मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है, इस विश्वास के आधार पर हमारी मान्यता है कि हम उत्कृष्ट बनेंगे औ दूसरों को श्रेष्ठ बनाएँगें, तो युग अवश्य बदलेगा Document
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Topic Of Source Title
युग निर्माण मिशन का घोषणा-पत्र (लेख)
हम ईश्वर को सर्वव्यापी, न्यायकारी मानकर उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतारेंगे (लेख)
शरीर को भगवान का मंदिर समझकर आत्म-संयम और नियमितता ध्वारा आरोग्य की रक्षा करेंगे (लेख)
मन को कुविचारों और दुर्भावनाओं से बचाए रखने के लिए स्वाध्याय एवं सत्संग की व्यवस्था रखे रहेंगे (लेख)
इंद्रिय संयम, अर्थ संयम, समय संयम और विचार संयम का सतत् अभ्यास करेंगे (लेख)
अपने आपको समाज का एक अभिन्न अंग मानेंगे और सबके हित में अपना हित समझेंगे (लेख)
मर्यादाओं को पालेंगे, वर्जनाओं से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिष्ठ बने रहेंगे (लेख)
समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को जीवन का एक अविच्छिन्न अंग मानेंगे (लेख)
चारों ओर मधुरता, स्वच्छता, सादगी और सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे (लेख)
अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे (लेख)
मनुष्य के मूल्यांकन की कसौटी, उसकी सफलताओं,योग्यताओं,एवं विभूतियों को नहीं,उसके सद्विचारों और सत्कर्मों को मानेंगे (लेख)
दूसरों के साथ वह व्यवहार नहीं करेंगे,जो हमें अपने लिए पसंद नहीं (लेख)
नर-नारी परस्पर पवित्र दृष्टि रखेंगे (लेख)
संसार में सत्प्रवृत्तियों के पुण्य प्रसार के लिए,अपने समय,प्रभाव,ज्ञान,पुरुषार्थ एवं धन का एक अंश नियमित रुप से लगाते रहेंगे (लेख)
परंपराओं की तुलना में विवेक को महत्त्व देंगे (लेख)
सज्जनों को संगठित करने, अनीति से लोहा लेने और नवसृजन की गतिविधियों में पूरी रुचि लेंगे (लेख)
राष्ट्रीय एकता एवं समता के प्रति निष्ठावान रहेंगे ! जाति,लिंग,भाषा,प्रांत,संप्रदाय आदि के कारण परस्पर कोई भेदभाव न बरतेंगे (लेख)
मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है, इस विश्वास के आधार पर हमारी मान्यता है कि हम उत्कृष्ट बनेंगे औ दूसरों को श्रेष्ठ बनाएँगें, तो युग अवश्य बदलेगा (लेख)
हम बदलेंगे युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा इस तथ्य पर हमारा परिपूर्ण विश्वास है (लेख)
अपना मूल्यांकन भी करते रहें (लेख)
तो फिर हमें क्या करना चाहिए (लेख)
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