Read
Books
Magazines
Artical
Artical & Series
Stories
Great Personalities
Festival & Retuales
Lectures
Pragya Geet
Audio
Listen
ऑडियो पुस्तकें
प्रेरक कहानियाँ
प्रवचन
प्रज्ञा गीत
ऋषि चिंतन
ध्यान
मंत्र
About us
Contact us
✖
Tags
Books
Magazines
Articles
Article & Series
Stories
Great Personalities
Festival & Rituals
Lectures
Pragya Geet
Audio
Trending searches
0
0
No items in cart
Guest
Not logged in
Guest
Not logged in
Profile
My Order
Wishlist
सज्जनता और मधुर व्यवहार-मनुष्यता की पहली शर्त
Share
0
Author:
श्रीराम शर्मा आचार्य
Code:
HINB0193_21
Source:
युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त भाग१बडी (Book)
सज्जनता और मधुर व्यवहार-मनुष्यता की पहली शर्त Document
PDF is Ready
Scroll to read the document.
Topic Of Source Title
भूमिका
आस्तिकता एवं उपासना का प्रयोजन-प्रतिफल
देववाद और पूजा-अर्चा का रहस्य
जीवन-लक्ष्य समझें और उसे प्राप्त करने का प्रयत्न करें
स्वर्ग और मुक्त्ति का आनन्द इसी जीवन में संभव
कर्म-फल आज नहीं तो कल भोगना ही पडे़गा
दुष्कर्मो के दण्ड से प्रायश्चित ही छुडा सकेगा
हम कामना ग्रस्त न हों-प्रगति शील बनें
भाग्यवाद हमें नपुंसक और निर्जीव बनाता है
बौद्धिक परावलम्बन का जुआ उतार फैंके
ज्ञान योग,कर्म योग,भक्त्ति-योग की महान साधना
आध्यात्मिक जीवन के पाँच कदम
हर दिन को एक नया जन्म समझें और उसका सदुपयोग करें
स्वाध्याय दैनिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता
अपना महान महत्त्व समझें और अपने को सुधारें
कर्त्तव्य परायणता-मानव-जीवन की आधार शिला
असत्य व्यवहार-सदभावना और सामाजिकता पर कुठाराघात
बेईमानी का नहीं.ईमानदारी का मार्ग अपनायें
हँसती और हँसाती जिन्दगी ही सार्थक है
अपना ही नहीं,कुछ समाज का भी हित साधन करें
सज्जनता और मधुर व्यवहार-मनुष्यता की पहली शर्त
साहस जुटाये-औचित्य अपनायें
आलस्य त्यागें-सुसम्प्न्न बनें
समय का सदुपयोग सफलता के लिए अमोघ वरदान
अवरोध हमें अधीर न बनाने पावें
आवेश-ग्रस्त न हों-शान्ति और विवेक से काम लें
विचार शक्त्ति का महत्त्व समझें और सदुपयोग करें
आरोग्य रक्षा के लिए संतुलन आवश्यक है
स्वास्थ्य रक्षा के लिए प्रकृति का अभुसरण आवश्यक
आहार और विहार का असंयम न बरतें
संयम बरतें-सुखी रहें
हम अस्वच्छ न रहें-घृणित न बनें
ढलती आयु का उपयोग इस तरह करें
अनीति से सतर्क रहें-अन्याय को रोकें
जो अनुचित है उससे सहमत न हों
औचित्य की सराहना और अनौचित्य की भर्त्सना की जाये
सुव्यवस्था ही परिवारों को सुविकसित रख सकेगी
दाम्पत्य जीवन-एक आध्यात्मिक योग साधना
पतिव्रत ही नहीं पत्नीव्रत भी निभाया जाये
संयुक्त परिवार प्रणाली एक श्रेयस्कर परम्परा
सन्तान कितनी और क्यों पैदा करें
सुसंस्कृत संतान के लिये पूर्व तैयरी आवश्यक
बलकों को जन्म ही न दें-उनका निर्माण भी करें
सन्तान को स्वावलम्बी भर बनाना ही पर्याप्त है
पर्दा प्रथा-नारी के साथ बरती जाने वाली एक नृशंस अनीति
अपव्यय एक पाई का भी न करें
धन का उपार्जन ही नहीं सदुपयोग भी ध्यान में रहें
अपव्यय और फैशन परस्ती-एक ओछापन
जेवरों का भौंडा फैशन-हर दृष्टि से हानिकारक
माँस मनुष्यता को त्याग कर ही खाया जा सकता है
तम्बाकू का दुर्व्यसन छोडा ही जाना चहिए
Related Articles
No related articles found.
Related Stories
No related stories found.
Share this Document
WhatsApp
Facebook
X
Telegram
LinkedIn
Copy Link