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युग निर्माण की रुपरेखा और कार्य पद्धति

युग निर्माण की रुपरेखा और कार्य पद्धति

Author: Pt. Shriram Sharma Achary Publisher: Yug Nirman Yojana, Mathura Code: HINB0190 4286 Views Out of Stock
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Hindi
हमारी असंख्य समस्याओं का एक मात्र हल विचार क्रान्ति
युग निर्माण योजना की मूल मान्यतायें
व्यक्ति निर्माण के लिये यह करना होगा
प्रगतिशील समाज का आधार और स्वरुप
प्रतिभायें नव निर्माण के लिये आगे आयें
धर्म तंत्र की शक्ति नव निर्माण में नियोजित की जाय
विश्व राष्ट्र विश्व धर्म विश्व भाषा की एकात्म भूमिका
मनुष्य और पशु कुटुम्बी बन कर रहें
साम्प्रदायिका अनेकता से धार्मिक एकता की ओर
नारी का वर्चस्व विश्व का उत्कर्प
जन संख्या की वृद्धि एक भयावह अभिशाप
हमारो अर्थ मान्यता उदारता के साथ जुड़ जाय
अर्थ व्यवस्था इस तरह सँभलेगी
प्रजातन्त्र की सफलता के लिये हम यह करे
रचनात्मक कार्यों के लिये जन उत्साह जगाया जाय
ज्ञान यज्ञ इस युग का महानतम अभियान
ज्ञान यज्ञ और उनकी महान सम्भावनायें
नव निर्माण के लिये समग्र शिक्षा नितान्त आवश्यक
प्रखर प्रेरणा भरे साहित्य का सृजन और प्रसार आवश्यक
कला की शक्ति लोक मंगल में लग जाये
लोक रंजन और लोक मंगल का अनुषम संगम
इन उधोगों में पूजी लग सके तो सृजन की सम्भावना बढ़ेगी
सक्रिय सदस्यों की सुगंठित सेना
लोक निर्माताओं की सेवा सेना और उसका निर्वाह
भावी महाभारत जो नव निर्माण के लिये लड़ा जायेगा
Book Size Big
Pages 101
Publisher Yug Nirman Yojana, Mathura
Publication Year 1973
Format # NA
Weight 0
Code Rare Book

Gayatri Pariwar Books, Pt. Shriram Sharma Acharya, Free Books for Download, vicharkrantibooks, awgp, rishichintan,

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