युग निर्माण की रुपरेखा और कार्य पद्धति

युग निर्माण की रुपरेखा और कार्य पद्धति

Author: Pt. Shriram Sharma Achary Publisher: Yug Nirman Yojana, Mathura Code: HINB0190 3980 Views Out of Stock
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हमारी असंख्य समस्याओं का एक मात्र हल विचार क्रान्ति
युग निर्माण योजना की मूल मान्यतायें
व्यक्ति निर्माण के लिये यह करना होगा
प्रगतिशील समाज का आधार और स्वरुप
प्रतिभायें नव निर्माण के लिये आगे आयें
धर्म तंत्र की शक्ति नव निर्माण में नियोजित की जाय
विश्व राष्ट्र विश्व धर्म विश्व भाषा की एकात्म भूमिका
मनुष्य और पशु कुटुम्बी बन कर रहें
साम्प्रदायिका अनेकता से धार्मिक एकता की ओर
नारी का वर्चस्व विश्व का उत्कर्प
जन संख्या की वृद्धि एक भयावह अभिशाप
हमारो अर्थ मान्यता उदारता के साथ जुड़ जाय
अर्थ व्यवस्था इस तरह सँभलेगी
प्रजातन्त्र की सफलता के लिये हम यह करे
रचनात्मक कार्यों के लिये जन उत्साह जगाया जाय
ज्ञान यज्ञ इस युग का महानतम अभियान
ज्ञान यज्ञ और उनकी महान सम्भावनायें
नव निर्माण के लिये समग्र शिक्षा नितान्त आवश्यक
प्रखर प्रेरणा भरे साहित्य का सृजन और प्रसार आवश्यक
कला की शक्ति लोक मंगल में लग जाये
लोक रंजन और लोक मंगल का अनुषम संगम
इन उधोगों में पूजी लग सके तो सृजन की सम्भावना बढ़ेगी
सक्रिय सदस्यों की सुगंठित सेना
लोक निर्माताओं की सेवा सेना और उसका निर्वाह
भावी महाभारत जो नव निर्माण के लिये लड़ा जायेगा
Book Size Big
Pages 101
Publisher Yug Nirman Yojana, Mathura
Publication Year 1973
Format # NA
Weight 0
Code Rare Book

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