अदभूत आश्र्चर्यजनक किन्तु सत्य भाग २

अदभूत आश्र्चर्यजनक किन्तु सत्य भाग २

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बातें दूसरों की, समाधान मेरा
तेरे सामान एवं स्वास्थ्य की देखभाल में करूंगा
गुरुदेव ने स्वयं आकर आश्वासन दिया
इसे वैष्णो देवी से पकड़ कर लायी हूँ!
वह कौन था?
पुनः जीवित कर दिया
फलित हुई ऋषिवाणी
साधना से हुई साधना की जीवन रक्षा
गुरुदेव ने ही मुझे बचाया
जब गुरुदेव की करुणा बरसी
मिशन ने बदला जीवन
बदमाश का हृदय परिवर्तन
जब कट्टा नहीं चला
मारकेश से बचाया
तू मेरा काम कर, मैं तेरा काम करूंगा
बाल-बाल बचे
मुझे लुटने से बचाया
आपके हाफिज़ बहुत बलवान् हैं
और प्रार्थना सुन ली गयी…
गहने वापस मिल गये
उनकी भगवद् दृष्टि सब कुछ देखती है
अन्तः की पुकार वे सुनते हैं
असम्भवं सम्भव कर्तु मुद्यतम्
ऐसा है सद्गुरु के नाम का प्रभाव
सत्यमेव जयते
अभिमंत्रित जल से ठीक हुआ हृदय रोग
मारकेश से अधिक बलवान गुरु
यह तो अचम्भे की बात है
काल हुआ महाकाल के आगे नतमस्तक
तुम्हारा कोई काम रुकेगा नहीं
तेरे बाप को क्या जवाब देता ?
उमड़ी कृपा शीतल छाया बनकर
मिठाई की दुकान चल पड़ी
तुम्हारे गुरु सामर्थ्यवान् हैं
दर्द हमेशा के लिए गायब हो गया
कैंसर से मुक्ति मिली
माताजी शक्ति स्वरूपा हैं
रामधन बनकर भोजन कराया
साधारण-सी दवा असाधारण बन गई
कारण सत्ता का चमत्कार
बहू को नया जीवन मिला
और ट्रैक्टर चल पड़ा
अंगुलियाँ तबले पर स्वत: ही थिरकने लगीं
ट्रक में घुसी कार, सब बचे
जब भगवान् को भक्त का बायना चुकाना पड़ा
मुझे बालक भी बनना पड़ता है
स्पर्श से पीड़ा मुक्ति
गुरु कृपा से प्राण बचे
अदृष्य हाथों ने थामा, जीवन रक्षा की
बेटे को मिला नया जन्म
आँखों की रोशनी लौटी
जीवन बचाया
आए थे दूसरों के पैर से, जायेंगे अपने पैर पर
आंच न आने दी
समय की सत्ता उनकी मुट्ठी में
सूनी गोद खिलखिलाई
तर्क हारा, श्रद्धा जीती
उन्हें कोटिशः धन्यवाद
दूसरा प्रह्लाद
बच्चों को बेचने का लगा आरोप
गुरु सत्ता के चरणों में शत-शत नमन्
कारण सत्ता की सामर्थ्य
वे भी द्रष्टा हैं
गुरुदेव की गोद में बच्चा
कुएँ का पानी मीठा हो गया
मौत से साक्षात्कार
तुम हमारे, हम तुम्हारे
साहित्य ने की रक्षा
सूक्ष्म शरीर द्वारा समाधान
खड़ाऊँ लाया है ?
चमत्कारी व्यक्तित्व
अनोखा अचरज
मैं महाकाल का अग्रदूत हूँ
माँ का पल्ला थामे रहना
मुर्दा जिन्दा हो गया!
पुलिस अधिकारी का प्रायश्चित्त
सबसे पहले मिशन
ध्यान में सुनी बाणी
इस जीवन पर उन्हीं का अधिकार
बस मेरी बहन ही बची
दीवारों, गमलों से कही व्यथा
चिकित्सा में घुला आशीर्वाद
सचमुच अध्यापक बना
सुरक्षा की बन्दूक बनी संकट
माँ के आशीष की वर्षा
झूठे आरोप गलत साबित हुए
अभी चार दिन यहीं रुकेगा !
डाकू का आत्मसमर्पण
असम्भव बना सम्भव
बच्चों की शादी सबको दिखाई
सूक्ष्म रूप में माँ के दर्शन
उनकी कृपा से जड़-चेतन गतिशील
गुरुदेव की भक्त वत्सलता
मृत्यु को टाला
विपत्ति से छूटा, मजिस्ट्रेट बना
सूक्ष्म शरीर का आश्वासन
मेरी एक आँख ऐसे बची..
चिकित्सा विज्ञान भी अचम्भित !
हमारे बच्चों के घर में चोर घुस आते हैं
मैं ही तुम्हें जीवनदान देता हूँ
Book Size Regular
Pages 0
Publisher NO BOOK
Publication Year NO BOOK
Format # NA
Weight 0
Code H_SJ_85

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