अंतर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग १

अंतर्जगत की यात्रा का ज्ञान विज्ञान भाग १

Author: Dr. Pranav Pandya Publisher: Shantikunj, Haridwar Code: HINR0078 9733 Views In Stock (1)
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Hindi
अपनी बात आपसे (लेख)
प्रवेश से पहले जानें अथ का अर्थ (लेख)
मन मिटे,तो मिल-चित्तवृति योग का सत्य (लेख)
क्या होगा मंजिल पर (लेख)
सावधान बड़ा बेबस बना सकता है मन (लेख)
अनूठी हैं-मन की पाँचों वृतियाँ (लेख)
जीवन कमल खिला सकती हैं-पंच वृतियाँ (लेख)
आखिर कैसे मिले सम्यक ज्ञान (लेख)
जानें, किस भ्रम में हैं हम (लेख)
कल्पना में भी है अक्षय ऊर्जा का भंडार (लेख)
नींद, जब आप होते हैं केवल आप (लेख)
जो यादों का धुंधलका साफ हो जाए (लेख)
कहीं पाँव रोक न लें सिद्धियाँ (लेख)
रस्सी की तरह घिस दें-चुनौतियाँ के पत्थर (लेख)
बिन श्रद्धा-विश्वास के नहीं सधेगा अभ्यास (लेख)
वैराग्य ही देगा साधना में संवेग (लेख)
प्रभु प्रेम से मिलेगा--वैराग्य का चरम (लेख)
जब वैराग्य से धुल जाए मन (लेख)
जिससे निर्बीज हो जाएं-सारे कर्म संस्कार (लेख)
विदेह एवं प्रकृतिलय पाते हैं-अदभुत अनुदान (लेख)
इस जन्म में भी प्राप्य है--असम्प्रज्ञात समाधि (लेख)
तीव्र प्रयासों से मिलेगी,समाधि में सफलता (लेख)
चाहत नहीं,तड़प जगे (लेख)
समर्पण से सहज ही मिल सकती है--सिद्धि (लेख)
ऐसा है--वह घट-घट वासी (लेख)
बाँसुरी बनें तो गूँजे प्रभु का स्वर (लेख)
गुरुओं के गुरु हैं,प्रभु (लेख)
ॐकार को जाना,तो प्रभु को पहचाना (लेख)
यदि जान सकें-जप की कला (लेख)
आत्मसाक्षात्कार का साधन-जप (लेख)
मंत्र में छिपी है, विघ्र विनाशक शक्ति (लेख)
बहुत बड़ी है, आततायी विघ्रों की फौज (लेख)
एक से ही हों एकाकार (लेख)
करुणा कर सकती है--चंचल मन पर काबू (लेख)
बड़ा गहरा है प्राण व मन का नाता (लेख)
ध्यान से उपजती है--अतीन्द्रिय संवेदना (लेख)
ध्यान की गहराई में छिपा है--परम सत्य (लेख)
राग शमन करता है--वीतराग का ध्यान (लेख)
अन्तर्चक्षु खोल देगा निद्रा का मर्म (लेख)
अभिरुचि के ही अनुरुप हो ध्यान (लेख)
अतिचेतन तक को वश में कर लेता है ध्यान (लेख)
स्फटिक मणि सा बनाइये (लेख)
मंजिल नहीं,पड़ाव है--सवितर्क समाधि (लेख)
सत्य का साक्षात्कार है निर्वितर्क समाधि (लेख)
ध्यान की अनुभूतियों द्धारा ऊर्जा स्नान (लेख)
ध्यान का अगला चरण है--समर्पण (लेख)
परम शुद्ध को मिलता है,अध्यात्म का प्रसाद (लेख)
निर्मल मन को प्राप्त होती है,ऋतम्भरा प्रज्ञा (लेख)
बिन इन्द्रिय जब अनुभूत होता है सत्य (लेख)
जब मिलते हैं व्यक्ति और विराट़् (लेख)
सारे नियंत्रणों पर नियंत्रण है--निर्बीज समाधि (लेख)
Book Size Regular
Pages 200
Publisher Shantikunj, Haridwar
Publication Year 2013
Format 13.5x21.5 CM
Weight 0.18
Code H_SA_27

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